गहराने लगा जलसंकट तो आई तालाब, कुएं और एनीकट बनाने की याद

जल संरक्षण के लिए जिले में नई पहल की जा रही है। इसके तहत मनरेगा के माध्यम से पानी के संग्रहण के लिए ठोस काम करने की योजना है।

बालोद.जल संरक्षण के लिए जिले में नई पहल की जा रही है। इसके तहत मनरेगा के माध्यम से पानी के संग्रहण के लिए ठोस काम करने की योजना है। इससे भूमिगत जल स्रोत को बढ़ाने के लिए राज्य शासन के निर्देशानुसार जिला पंचायत के माध्यम से प्रत्येक विकासखंडों में दो-दो गांवों का चयन किया गया है। इन गावों में प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन के तहत कुआं, डबरी, एनीकट का निर्माण कराया जाएगा। इस पूरी योजना के लिए जिला पंचायत मनरेगा विभाग 5 करोड़, 44 लाख, 68 हजार की स्वीकृति दी है। विभाग इन गावों के सर्वे में जूट गया है कि कहां-कहां पर एनीकट, कुआं व डबरी बनाया जाए।

लाल पानी से प्रभावित क्षेत्र को प्राथमिकता 
इस योजना में जिला पंचायत ने डौण्डी विकासखंड के लाल पानी से प्रभावित क्षेत्र में इस योजना को ज्यादा प्राथमिकता से लागू करने का निर्णय लिया है। जल संरक्षण के लिए बीते साल भी डबरी निर्माण का लक्षय रखा गया था पर अब तक दिए गए लक्ष्य कितना पूरी हुई इसकी जानकारी अभी तक विभाग को नही है। इस बार फिर जल सरक्षण के लिए करोड़ों रुपए विभाग खर्च कर करेगी।

पहाड़ से लेकर जमीन तक जल संरक्षण पर ध्यान
इस योजना के तहत फिलहाल विभाग ने 11 गावों का चयन कर लिया है और कुछ दिनों बाद इन गावों में यह कार्य भी शुरू कर दिया जाएगा। बताया जाता है कि इन गावों में डबरी, एनीकट व कुआं निर्माण के लिए जगह के लिए सर्वे किया जा रहा है। विभाग के अनुसार जैसे ही बारिश होती है तो पहाड़ों से पानी नीचे उतरते हुए व्यर्थ बह जाता है, ऐसे ही पानी नाले के माध्यम से बह जाता है।

किस ब्लॉक में कितना होगा जल संरक्षण में खर्च
इन्हीं प्राकृतिक जल स्रोतों के पानी को संरक्षित करने के लिए इन स्थानों पर डबरी, एनीकट बनाया जाएगा। साथ ही कुएं का भी निर्माण करेंगे। अब पहाड़ से लेकर जमीन तक पानी का संरक्षण किया जाएगा।
बालोद ब्लॉक में 88.51 लाख, गुरुर में 1 करोड़ 23 लाख 38 हजार, गुंडरदेही में 1 करोड़ 3 लाख 68 हजार, डौंडीलोहारा में 1 करोड़ 23 लाख रुपए और डौंडी ब्लॉक में 1 करोड़ 6 लाख 68 हजार रुपए, इस तरह कुल 5 करोड़ 44 लाख 68 हजार रुपए खर्च किए जाएंगे।

संरक्षण के साथ सिंचाई के लिए करेंगे पानी का उपयोग
जहां बनाए जाने वाले डबरी, एनीकट व कुएं में पानी एकत्रित होकर पानी के संरक्षण के साथ भूमिगत जल स्रोत भी बढ़ेंगे। इसके अलावा एकत्रित जल का उपयोग किसान अपने खेतों के लिए फसल की सिंचाई पर भी करेंगे। विभागीय जानकारी अनुसार इस योजना के तहत सबसे अधिक काम डौण्डी विकासखंड के लाल पानी के क्षेत्र में किया जाएगा। साथ ही इस योजना में राशि की कमी हो जाए तो खनिज न्यास की निधि की राशि का उपयोग करने की बात कही है।

विभाग ने इन गांवों में शुरू किया है सर्वे
बालोद ब्लॉक के मड़वापथरा, मालगांव, गुरुर के बोरिदकला, घानापुरी, गुंडरदेही के साजा, मोहंदीपाट, डौंडीलोहारा के हितापठार, भीमपुरी और डौंडी ब्लॉक के नलकसा, बिटाल, धोबेदंड, बम्हनी (कटरेल)। जिला पंचायत सीईओ राजेंद्र कुमार कटारा ने बताया जल संरक्षण के लिए प्रकृतिक संसाधन प्रबंधन के तहत जिले के प्रत्येक ब्लॉक में 2 ग्राम पंचायतों का चयन कर सर्वे किया जा रहा है। जल्द ही काम शुरू किया जाएगा।
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Satya Narayan Shukla
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