गन्ने की आवक घटने से कारखाने में पेराई हो गई बंद, लक्ष्य से कम हुआ शक्कर का उत्पादन

बालोद जिले के एकमात्र दंतेश्वरी सहकारी शक्कर कारखाने में गन्ना पेराई बंद हो गई है। शुक्रवार दोपहर ढाई बजे कारखाने में गन्ना नहीं होने के कारण पेराई बंद की गई है। इस सत्र में 1,120 गन्ना किसानों ने कुल 57,268.215 मीट्रिक टन गन्ना बेचा। इतने ही गन्ने की पेराई की गई।

By: Chandra Kishor Deshmukh

Published: 14 Mar 2020, 10:55 PM IST

बालोद @ patrika. जिले के एकमात्र दंतेश्वरी सहकारी शक्कर कारखाने में गन्ना पेराई बंद हो गई है। शुक्रवार दोपहर ढाई बजे कारखाने में गन्ना नहीं होने के कारण पेराई बंद की गई है। इस सत्र में 1,120 गन्ना किसानों ने कुल 57,268.215 मीट्रिक टन गन्ना बेचा। इतने ही गन्ने की पेराई की गई। लगभग 73 दिन चले कारखाने में गन्ने की पेराई से कुल 52,740 क्विंटल शक्कर का उत्पादन हुआ।

70 हजार क्विंटल शक्कर उत्पादन करने का लक्ष्य
इस बार कारखाना प्रबंधन ने 70 हजार क्विंटल शक्कर उत्पादन करने का लक्ष्य रखा था। कारखाना में पर्याप्त गन्ना उपलब्ध नहीं होने के कारण लक्ष्य पूरा नहीं हो पाया। कारखाना प्रबंधन का कहना है कि जिले में अचानक गुंडरदेही ब्लॉक के ग्राम कोटगांव में गुड़ की फैक्ट्री खुल जाने से कई किसानों ने गुड़ फैक्ट्री में गन्ना बेच दिया है, जिसके कारण जितना गन्ना कारखाना में आने की उम्मीद थी, उतना नहीं आया।

इस बार बिना खराबी के चला कारखाना
कारखाना के मुताबिक इस बार कारखाने में गन्ने की पेराई बिना किसी परेशानी व खराबी के कारखाना चला। पर 26 फरवरी के बाद से अचानक गन्ना की आवक कम होने से ही पेराई प्रभावित हुई, यही नहीं इस बार बेमौसम बारिश से भी आवक व पेराई प्रभावित हुई।

किसानों ने 14 करोड़ 96 लाख 13 हजार का गन्ना बेचा
कारखाने से मिले आंकड़े के मुताबिक इस बार कारखाना में 1,120 किसानों ने 14 करोड़ 96 लाख 13 हजार 211 रुपए का गन्ना बेचा है। जिसके जवाब में शासन की ओर से 15 फरवरी की स्थिति में 12 करोड़ 43 लाख 7 हजार 336 रुपए का भुगतान किया जा चुका है। अभी भी 2 करोड़ 53 लाख 5 हजार 875 रुपए का भुगतान बाकी है। इसका भुगतान किसानों को बाद में किया जाएगा। प्रबंधन का कहना है कि यदि किसानों ने पूरा गन्ना शक्कर कारखाने में बेचा होता तो शक्कर उत्पादन का लक्ष्य आसानी से हासिल करने की उम्मीद थी, लेकिन अब इसका असर लक्ष्य पर पड़ा है। जिसके कराण कारखाना बंद करना पड़ा।

सरकारी शक्कर कारखाने के भविष्य पर खतरा
कारखाना प्रबंधन के मुताबिक जिले का एकमात्र दंतेश्वरी मईया सहकारी शक्कर कारखाना बड़ी मुश्किल से संचालित हो रहा है। गन्ने की फसल के प्रति किसानों को जागरूक कर गन्ने की खेती करा रहे हैं। लेकिन अचानक व बिना जानकारी के गुड़ फैक्ट्री खुल जाने के कारण शक्कर कारखाना पर ही ग्रहण लग गया है। अब तो शक्कर कारखाना में पर्याप्त गन्ना उपलब्ध कराने की चुनौती खड़ी हो गई है।

किसानों ने गन्ना फैक्ट्री में बेच दिया गन्ना
जिले में 20 दिसम्बर 2019 से शक्कर कारखाने में गन्ने की पेराई शुरू हुई, जो 13 मार्च को दोपहर ढाई बजे तक चली। इस बार जबसे कारखाना में पेराई के दौरान कोई खराबी नहीं आई। बिना रुकावट के ही कारखाना चलता रहा। गन्ने की आवक कम हुई तो अधिकारी इसका कारण जानने में जुट गए। कारखना के जीएम पीताम्बर ठाकुर ने बताया कि पेराई के शुरुआती दौर में गन्ने की अच्छी आवक थी। लेकिन दो माह बाद अचानक गन्ने की आवक में कमी आ गई। अचानक आवक कम होने का कारण पता किया तो पता चला कि जिले के गुंडरदेही ब्लॉक के कोटगांव में गुड़ फैक्ट्री खुल गई है। इस कारण कई किसानों ने गुड़ फैक्ट्री में ही गन्ना बेच दिया, जिसके कारण कारखाने में आवक कम हो गई।

शक्कर का उत्पादन पहले से बेहतर
दंतेश्वरी मईया सहकारी शक्कर कारखाना, करकाभाट (बालोद) के जीएम पीतांबर ठाकुर ने कहा कि इस बार शक्कर का उत्पादन पहले से बेहतर हुआ है। जिले के गुंडरदेही ब्लॉक में गुड़ फैक्ट्री खुल जाने से इस बार गन्ने की आवक उम्मीद से कम हुई। जिसके कारण शक्कर उत्पादन पर भी प्रभाव पड़ा है। गुड़ फैक्ट्री की जानकारी ली जा रही आखिर किसने फैक्ट्री खोलने की अनुमति दी है।

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Chandra Kishor Deshmukh Bureau Incharge
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