अतिथि प्रोफेसर के भरोसे लीड कॉलेज बालोद, लैब तकनीशियन कर रहे बाबूगीरी

अतिथि प्रोफेसर के भरोसे लीड कॉलेज बालोद, लैब तकनीशियन कर रहे बाबूगीरी

Chandra Kishor Deshmukh | Publish: Jun, 20 2019 08:08:15 AM (IST) Balod, Balod, Chhattisgarh, India

जिले में उच्च शिक्षा की स्थिति बहुत ही दयनीय है। प्राध्यापकों की रिक्त पदों की पूर्ति आजतक नहीं हो पाई है। प्राध्यापकों की कमी के कारण पढ़ाई संविदा और अतिथि प्रोफेसर के भरोस चल रही है। पढ़ाई के अलावा कॉलेज में मैनपावर की कमी का असर व्यवस्था पर भी पड़ रहा है।

बालोद @ patrika. जिले में उच्च शिक्षा की स्थिति बहुत ही दयनीय है। प्राध्यापकों की रिक्त पदों की पूर्ति आजतक नहीं हो पाई है। प्राध्यापकों की कमी के कारण पढ़ाई संविदा और अतिथि प्रोफेसर के भरोस चल रही है। पढ़ाई के अलावा कॉलेज में मैनपावर की कमी का असर व्यवस्था पर भी पड़ रहा है। क्लर्क नहीं होने के कारण आफिस का काम लैब तकनीशियन संभाल रहे हैं। @ patrika. और-तो-और कॉलेज में चपरासी भी नहीं है। दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों द्वारा कॉलेज की साफ-सफाई करवाई जाती है। लीड कॉलेज की इस दयनीय स्थिति की जानकारी जिम्मेदारों को भी है। इसके बाद भी शासन-प्रशासन द्वारा ध्यान नहीं दिया जाना समझ से परे है।

32 पद में से मात्र 10 पर नियमित प्राध्यापक
हम बात कर रहे हैं जिले के 17 कॉलेजों के लीड कॉलेज पीजी कॉलेज बालोद की। इस कॉलेज में प्राध्यापक और सहायक प्राध्यापकों के कुल 32 पद स्वीकृत है। इन 32 पदों में से मात्र 10 पद ही नियनित प्राध्यापक है। शेष 22 पद पर पढ़ाई की जिम्मेदारी अतिथि प्राध्यापक संभाल रहे हैं। @ patrika. शासन की ओर से हर साल लीड कॉलेज में प्राध्यापकों सहित विभिन्न समस्याओं की जानकारी मांगी जाती है। शासन द्वारा सिर्फ जानकारी मांग कर खानापूर्ति कार्रवाई कर ली जाती है। समस्या जस की तस बनी रहती है। इस कॉलेज के साथ भी ऐसा ही हो रहा है।

2400 विद्यार्थियों के लिए अंग्रेजी विषय का एक प्राध्यापक
यह सुनने में बड़ा अजीब लगेगा कि जिला मु?यालय स्थित लीड कॉलेज में अंग्रेजी विषय पढ़ाने के लिए मात्र एक ही प्राध्यापक हैं। कॉलेज में बीए, बीएससी, बीकॉम मिलकर 2400 बच्चे अंग्रेजी विषय की पढ़ाई करते है। विद्यार्थियो की संख्या को देखते हुए कॉलेज प्रबंधन ने एक और सहायक प्रध्यापक की व्यवस्था जनभागीदारी समिति से की है। एक सेक्शन को अंग्रेजी पढ़ाने के लिए एक सप्ताह का इंतजार करना पड़ता है। यहां हर सेक्शन में सप्ताह में एक ही बार अंग्रेजी की पढ़ाई होती है।

न भृत्य न बाबू, तकनीशियन संभाल रहे बाबू का काम
इस लीड कॉलेज में भृत्य के दो पद और दोनों ही खाली है। इसके अलावा बाबू यानी क्लर्क के भी 4 पद में से चारों पद ही रिक्त है। इस कॉलेज में तो टेक्नीशियन ही बाबू का काम और पद संभाल रहे हैं। बता दे कि इस लीड कॉलेज में प्रध्यापक व् सहायक प्राध्यापक मिलाकर कुल 32 पद स्वीकृत है जिसमे से मात्र 10 पद ही भरे गए है बाकी 22 पद खाली है जो अतिथि शिक्षको से भरे गए है।

प्राचार्य का पद भी प्रभार के भरोसे
यहां सबसे से चौकाने वाली बात यह है कि प्राध्यापकों की बात तो छोड़ दें प्राचार्य का पद भी प्रभारी के भरोसे चल रहा है। स्थायी प्राचार्य नहीं होने के कारण गुंडरदेही कॉलेज के प्राचार्य को यहां का प्रभार दिया गया है। @ patrika. यहां प्राध्यापक के 6 पदों में से मात्र एक प्राध्यापक और 5 पद रिक्त है। इसी तरह सहायक प्राध्यापकोंके कुल 26 पद में से 9 सहायक प्राध्यापक और अभी भी 17 पद रिक्त है। सबसे बड़ी बात बिते 10 माह से इस कॉलेज में प्राचार्य के पद भी रिक्त है।

17 कॉलेज का भार इस लीड कॉलेज पर
बालोद पीजी कॉलेज जिले के 12 शासकीय और 5 निजी कॉलेज का लीड कॉलेज है। इस वजह से इस कालेज पर जिलेभर के कॉलेजेस का दबाव रहता है। स्टॉफ की कमी के कारण कॉलेज में पढ़ाईके अलावा अन्य कामों पर भी हमेशा दबाव बना रहता है। जानकारी के मुताबिक शासन की ओर से साल में दोबार हर छह महीने में प्रदेशभर के कॉलेजों की जानकारी मंगाई जाती है कि क्या क्या समस्या और परेशानी है। इसके बाद शासन की ओर से कोईकदम नहीं उठाया जाता है।
आंदोलन का भी नहीं होता असर
कॉलेज खुलने के बाद छात्र संगठनों की ओर से प्राध्यापकों की भर्ती की मांग को लेकर विभिन्न समस्याओं का निराकरण के लिएआंदोलन किया जाता है। @ patrika. कॉलेज में धरना देकर विरोध-प्रदर्शन भी किए जाते हैं किंतु नतीजा कुछ नहीं निकलता। हर बार सिर्फ आश्वासन देकर छात्र संगठनों का शांत कर दिया जाता है। समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो पाता । छात्र संगठनों को नई सरकार से उ?मीद है कि जल्द ही रिक्त पदों पर भर्ती की जाएगी।

शासन स्तर पर कार्रवाई
लीड कॉलेज बालोद के प्राचार्य श्रद्धा चंद्राकर ने कहा लीड कॉलेज में जो भी समस्या है उसकी जानकारी शासन द्वारा समय-समय पर मंगाई जाती है। कॉलेज में जो भी कमी और मांग है उनकी जानकारी शासन को दी जाती है। जानकारी के बाद शासन स्तर पर कार्यवाही होती है।

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