इस नगर के हायर सेकंडरी के विद्यार्थी मिडिल स्कूल भवन में करते हैं पढ़ाई

शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय चिखलाकसा के तीन कमरों में बरसात में पानी टपकने के साथ छत का प्लास्टर गिरने से हमेशा दुर्घटना की आशंका बनी हुई है। मजबूरी में छात्र-छात्राओं को मिडिल स्कूल की कक्षाओं में बैठाना पड़ रहा है।

By: Chandra Kishor Deshmukh

Published: 07 Jul 2019, 08:38 AM IST

बालोद/दल्लीराजहरा @ patrika. शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय चिखलाकसा के तीन कमरों में बरसात में पानी टपकने के साथ छत का प्लास्टर गिरने से हमेशा दुर्घटना की आशंका बनी हुई है। मजबूरी में छात्र-छात्राओं को मिडिल स्कूल की कक्षाओं में बैठाना पड़ रहा है। क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों एवं पालकोंं ने तीनों जर्जर कमरों के जीर्णोद्धार कराए जाने की मांग शिक्षा विभाग से की है।

9 वीं से 12 वीं तक 340 विद्यार्थी अध्ययनरत
शासन द्वारा वर्ष 1986 मेें शासकीय उच्च्तर माध्यमिक शाला चिखलाकसा का निर्माण करवाया गया था। जहां वर्तमान में कक्षा 9 वीं से 12 वीं तक लगभग 340 बच्चे अध्ययनरत हैं। स्कूल भवन के तीन कमरे जर्जर स्थिति में हैं। छत के प्लास्टर गिर जाने से लोहे के छड़ दिखने नजर आ रहे हैं। @ patrika. इन तीनों कमरे में बरसात के इन दिनों छत से पानी टपकना व कमरे मेें पानी भर जाना आम बात हो गई है। इसके अलावा छत व फर्श हमेशा गीला रहता है। जिससे सीलन की दुर्गंध भी आती है। ऐसे में यहां पढऩे वाले छात्र-छात्राओंं के साथ कभी भी गंभीर दुर्घटना होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। इन्हीं स्थितियों को देखते हुए स्कूल प्रबंधन द्वारा विद्यार्थियों को मिडिल स्कूल भवन बैठाकर पढ़ाया जा रहा है।

छत से टपकता है पानी, पढऩा मुश्किल
हाल ही मेें गुजरा संकुल केन्द्र के अंतर्गत ग्राम बोरीद के प्राथमिक शाला के जर्जर स्थिति सबके सामने आई है। डौंडी ब्लॉक मेें ऐसे ही अनेक जर्जर स्कूल भवन में पानी गिरने पर छत से पानी टपकने की शिकायतें मिल रही है। ऐसे में छात्र-छात्राओं को वहां पढ़ाना शिक्षकों के लिए मुश्किल हो रहा है। इसी के चलते डौंडी विकासखंड के अनेक विद्यालयों में बरसात के दिनों में अध्ययन एवं अध्यापन कार्य प्रभावित होती है। शिक्षा के नाम पर राज्य शासन हर साल करोड़ों खर्च करती है। विडंबना यह है कि जर्जर भवनों की मरम्मत कराना भूल जाती है।

इन समस्याओं पर भी ध्यान दें शासन व विभाग
स्कूल भवन के जर्जर स्थिति के कारण पालक बच्चों के सुरक्षा को लेकर चिंतित रहते है। वहीं विकल्प नहीं होने के कारण जर्जर स्कूल में पढ़ाना उनकी मजबूरी है। निजी स्कूलों मेंं अधिक फीस देकर पढ़ाना मध्यम एवं गरीब वर्गीय परिवारों के लिए संभव ही नहीं है। मध्यम एवं गरीब बच्चों को शासकीय स्कूलों में अच्छी शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए शिक्षा विभाग को ध्यान देना चाहिए। @ patrika. राज्य शासन छात्र-छात्राओं के लिए कक्षा पहली से आठवीं के बाद अब कक्षा 9 वीं से 12 वीं तक विभिन्न योजना चला रही है। इसी तरह शासन व शिक्षा विभाग जर्जर स्कूल भवनों पर भी ध्यान दें। 5-6 किलोमीटर के दायरे में आने वाले ग्रामीण बच्चों को भी शासकीय स्कूलों में अच्छी शिक्षा दिलाकर पढ़ाई की गुणवत्ता को लेकर पालकों के बीच फैली भ्रांतियों को दूर किया जा सके।

केवल आश्वासन
नगर पंचायत के जनप्रतिनिधियों एवं पालकों ने बताया कि उनके साथ पूर्व प्राचार्य एवं शिक्षकों द्वारा कमरों के जर्जर स्थिति से विभाग के उच्चाधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है। उच्चाधिकारियों द्वारा केवल आश्वासन दिया जाता रहा है। जीर्णोद्धार नहीं किया गया है। बच्चों के पालकों में उनकी सुरक्षा को लेकर चिंता बनी रहती है।

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Chandra Kishor Deshmukh Bureau Incharge
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