शर्मसार हुआ जिला: 33 नाबालिग व 21 महिलाओं के साथ हैवानियत, सिर्फ एक दोषी को मिली फांसी

शर्मसार हुआ जिला: 33 नाबालिग व 21 महिलाओं के साथ हैवानियत, सिर्फ एक दोषी को मिली फांसी
शर्मसार हुआ जिला: 33 नाबालिग व 21 महिलाओं के साथ हैवानियत, सिर्फ एक दोषी को मिली फांसी

Chandra Kishor Deshmukh | Publish: Oct, 12 2019 08:00:02 AM (IST) Balod, Balod, Chhattisgarh, India

एक तरफ सरकार बेटी बचाव बेटी पढ़ाव पर जोर दे रही वहीं दूसरी ओर दूसरी ओर जिले में बालिका अपराध की संख्या बढ़ रही है। जिला बनने के बाद से और वर्तमान 2019 में सबसे ज्यादा 33 नाबालिग और 21 महिलाएं दुष्कर्म के शिकार हुए है।

बालोद @ patrika . एक तरफ सरकार बेटी बचाव बेटी पढ़ाव पर जोर दे रही वहीं दूसरी ओर दूसरी ओर जिले में बालिका अपराध की संख्या बढ़ रही है। जिला बनने के बाद से और वर्तमान 2019 में सबसे ज्यादा 33 नाबालिग और 21 महिलाएं दुष्कर्म के शिकार हुए है। वहीं इतनी संख्या में अपराध दर्ज भी नहीं हुए हैं। अधिकतर मामले में दुष्कर्म के आरोपी करीबी ही निकले हैं। इससे यह कहा जा सकता है कि नाबालिग अपनों से ही सुरक्षित नहीं है। नाबालिगों से दुष्कर्म मामले में पुलिस प्रशासन भी चिंतित है।

बच्चों में मोबाइल की लत, भटकने का एक कारण यह भी
वर्तमान में मोबाइल बच्चों के अलावा हर लोगों के करीबी हो गए है। बच्चों से लेकर युवाओं को स्मार्ट फोन अनिवार्य हो गया है। मोबाइल का उपयोग सही या गलत हो रहा है इसकी निगरानी पालक नहीं करते हैं। मोबाइल से बच्चे गलत राह पकड़ लेते हैं।

पुलिस के आंकड़े चौकाने वाले सबसे ज्यादा इस साल बढ़े मामले
वर्ष-नाबालिग-महिला
2012-12-10
2013-10-10
2014-22-12
2015-21-18
2016-25-10
2017-25-18
2018-13-09
2019-33-21 (सितंबर माह तक)

पालक रखें बच्चों के हाव-भाव पर निगरानी
एसपी एमएल कोटवानी ने कहा कि नाबालिगों से दुष्कर्म के मामले रोकने का एक ही उपाय है जागरुकता। उन्होंने कहा कि पालक अपने बच्चों की एक्टिविटी व हाव-भाव पर नजर रखे। बच्चों के फ्रेंडशिप अगर गलत है तो उनपर निगरानी रखे और बच्चों को समझाए की उनकी दोस्ती सही लोगों के साथ है या नहीं। बच्चे अगर ज्यादा देर तक मोबाइल में बिजी है तो उनके एक्टिविटी पर निगरानी रखे। बच्चों के व्यवहार पर नजर रखे, व्यवहार अगर गलत है तो बच्चों को समझाए और सही व्यवहार के लिए प्रेरित करें। बच्चों को गुड टच-बेड टच की जानकारी दें। साथ ही अपनों पर भी निगरानी रखे कि कौन बच्चों के साथ कैसा व्यवहार कर रहे हैं।

स्कूल-कॉलेज में जागरुकता अभियान
नाबालिगों के साथ दुष्कर्म चिंता का कारण जरूर है। नाबालिगों को समझाने के लिए स्कूल कॉलेजों में भी जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। बच्चों को गुड टच बेड टच की जानकारी के साथ दुष्प्रभाव व महिला कमांडो के साथ गांव गांव में नाबालिगों ंंको जागरूक किया जा रहा है।

अधिकतर मामले 10 से 17 साल के साथ नाबालिगों के साथ
हाल के तीन माह में भी दुष्कर्म के मामले आए हैं। जिसमें जून में 9 नाबालिग, जुलाई में 7, अगस्त में 6 और सितंबर में 4 नाबालिग दुष्कर्म के शिकार हुए। इसमें 3 से 8 साल की बच्ची भी शामिल है। अधिकतर
मामले 10 से 17 साल के नाबालिग के साथ दुष्कर्म के मामले शामिल हैं।

सख्त कानून का भी प्रभाव नहीं
निर्भया कांड के बाद कानून को सख्त बनाया गया है। पॅाक्सो एक्ट के तहत कठोर कानून में नई धाराओं को न्यायालयीन प्रक्रियाओं से जोड़ा गया है। जिसमें किसी भी नाबालिग के घर से लापता होने या किसी के बहला फुसलाकर ले जाने पर भी धारा 363, 366 दर्ज करने के निर्देश है। इसके अलावा नाबालिगों से किसी भी तरह की हरकत करने पर पॅाक्सो एक्ट की धारा में मामला दर्ज करने के निर्देश है। अगर किसी पर पाक्सो एक्ट लगता है तो उसे आसानी से जमानत नहीं मिलती है।

दुष्कर्मी को मिली फांसी की सजा
जिले में एक ऐसे प्रकरण भी सामने आया जहां एक नाबालिग से दुष्कर्म से बच्ची की मौत के बाद दुष्कर्मी को बालोद न्यायालय ने फांसी की सजा सुनाई। नाबालिगों से दुष्कर्म के मामले में कड़े कानून जरूर बने है पर बढ़ते अपराध के आंकड़े जिले को शर्मसार कर रहे है।

पालक रखे अपने बच्चोंं पर निगरानी
आंकड़े के मुताबिक कई दुष्कर्म के मामले को करीब के लोगों ने अंजाम दिया है। पालक भी बच्चों व घर पर निगरानी रखें कि बच्चे भटक तो नहीं रहे। पालक बच्चों को भी संस्कारित बनाए। कुसंगतियों से बच्चोंं को बचाए। बच्चे भी सतर्क रहे और अगर किसी पर शक हो तो तत्काल इसकी जानकारी पालकों को दें। किसी के बहकावे में न आए और न जाए।

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