बालोद : फरवरी में ही जवाब देने लगे खेतों के बोर, हैंडपंप से भी निकल रही पतली धार, डबरी से हो रही सिंचाई

गर्मी अभी शुरू नहीं हुई है और अभी से ही जल संकट गहराने लगा है। जिला मुख्यालय सहित आसपास के खेतों में लगे बोर जवाब देने लगे हैं। हैंडपम्प सहित बोर से पानी की पतली धार निकलने लगी है। जिससे किसानों की चिंता बढऩे लगी है।

By: Chandra Kishor Deshmukh

Published: 17 Feb 2021, 07:51 PM IST

बालोद. गर्मी अभी शुरू नहीं हुई है और अभी से ही जल संकट गहराने लगा है। जिला मुख्यालय सहित आसपास के खेतों में लगे बोर जवाब देने लगे हैं। हैंडपम्प सहित बोर से पानी की पतली धार निकलने लगी है। जिससे किसानों की चिंता बढऩे लगी है। जबकि अभी गर्मी की शुरुआत है। सूखते फसलों को बचाने किसान अब नाले, डबरी से फसलों की सिंचाई करने लगे है।

धान की फसल में लाल रंग के कीट
किसान रामकिशन ने बताया कि बोर का जल स्तर अभी से नीचे चला गया है, जिससे बोर बंद हो गए हैं। फसलों की सिंचाई भी जरूरी है, इसलिए नाले व छोटे डबरी से फसलों की सिंचाई कर रहे हैं। पानी की समस्या के बाद अब धान की फसल में लाल रंग के कीट ने किसानों को परेशान कर दिया है। किसान कृषि वैज्ञानिकों व अधिकारियों से सलाह के बिना दवाई खरीदकर फसलों में छिड़काव कर रहे हैं, लेकिन कीट का प्रकोप कम नहीं हो रहा।

गोंदली, खरखरा, मटियामोती से पानी, तांदुला से नहीं
सिंचाई विभाग के मुताबिक जिले के गोंदली, खरखरा, मटियामोती जलाशय से सिंचाई के लिए पानी दिया जा रहा है। लेकिन तांदुला जलाशय से इस बार सिंचाई के लिए पानी नहीं दिया जा रहा है। इसका प्रमुख कारण है कि नहर के बीच में बनी जामगांव पुलिया की मरम्मत का कार्य चल रहा है। तांदुला से बालोद, दुर्ग, बेमेतरा जिला तक कुल 27 हजार हेक्टेयर से अधिक फसल की सिंचाई की जाती है, जो इस बार नहीं हो रही है।

भीषण गर्मी में होती है ज्यादा परेशानी
फरवरी के बाद मार्च में ही भीषण गर्मी शुरू हो जाती है। ऐसे में इस बार भी जल संकट की स्थिति निर्मित होने की संभावना है। तांदुला जलाशय से पानी नहीं छोडऩे के बावजूद इस बार तांदुला सिंचाई क्षेत्र में कई किसानों ने अपने निजी बोर से सिंचाई करने की जिद से धान की फसल ली है।

लगातार दवाई छिड़काव, फिर भी कीट पर असर नहीं
किसान रघुनाथ ने बताया कि धान की फसल में इस बार अजीब कीट नजर आ रहा है। यह कीट लाल रंग का है, जो फसल के तने व पत्तियों में भी देखा जा सकता है। इसके अलावा तना छेदक व पत्ता मोड़ कीटों से भी परेशानी हो रही है। किसान कृषि केंद्रों से दवाई खरीदकर छिड़काव भी कर चुके हैं, लेकिन कोई असर नहीं हो रहा।

फसल चक्र पर किसानों की रुचि नहीं
शासन प्रशासन व कृषि विभाग समय-समय पर कार्यशाला आयोजित कर किसानों को फसल चक्र अपनाकर कृषि करने की अपील करते हैं। वहीं धान की फसल पर पानी की खपत ज्यादा होती है। इस बार कृषि विभाग ने गन्ना, दलहन, तिलहन व अन्य नगदी फसल लेने किसानों को प्रेरित किया, लेकिन किसान आज भी धान की फसल पर ज्यादा भरोसा कर रहे हैं।

दलहन-तिलहन पर ध्यान नहीं दे रहे किसान
जिला कृषि अधिकारी नागेश्वर पांडे ने बताया कि किसानों को धान के अलावा अन्य दलहन, तिलहन की फसलों एवं गन्ने की फसल के फायदे बताए जा रहे हैं। हालांकि अभी भी किसान दलहन तिहलन की ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। रही बात फसलों में बीमारियों की तो किसान कृषि वैज्ञानिकों व अधिकारियों से चर्चा कर रोकथाम व निदान के बारे में सलाह ले सकते हैं।

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Chandra Kishor Deshmukh Bureau Incharge
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