#Water Crisis : जल संरक्षण में लापरवाही से जिले का औसत जल स्तर गया 130 फीट नीचे

चेत जाएं : बूंद-बूंद पानी सहेज कर आने वाली पीढ़ी को जल संरक्षण की सीख देनी जरूरी हो गई है। जागरूकता की कमी के कारण जिले के कई इलाकों में तो 300 फीट तक पानी नहीं मिल पा रहा है।

By: Niraj Upadhyay

Updated: 29 Mar 2019, 10:30 AM IST

बालोद@Patrika.गर्मी ने अभी से अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। आगे अप्रैल में और तापमान बढऩा निश्चित है। ऐसे में जल संकट के गहराने के भी आसार है। इस साल जिले में भू जल स्तर और नीचे गिर गया है। अभी से नदी, तालाब, कुओं में पानी कम हो रहा, तो वहीं हैंडपंप भी जवाब देने लगे हैं।

नहीं तो हो सकती है गंभीर स्थिति पैदा
मिली जानकारी के मुताबिक जिले भर में जिले का औसत भू जल स्तर 130 फीट नीचे चला गया है, पर कई जगह ऐसा भी है जहां 300 फीट में भी पानी नहीं मिल रहा। ऐसे में गिरते भू जल स्तर अब चिंता का कारण बन गया है।@Patrika. समय रहते इस ओर पहल नहीं की गई तो और भी गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है। इसमें सबसे बड़ी खामी ये सामने आ रही कि चारों ओर धरती का पक्कीकरण हो रहा है, पर जल सहेजने के नियमों की उपेक्षा की जा रही है।

योजनाएं चली जाती है ठंडे बस्ते में
भू जल स्तर को सुधारने शासन-प्रशासन ने तो कई योजना जरूर बना रखी है, पर यह योजना धरातल पर नजर नहीं आती। कुछ समय तक इसका प्रचार-प्रसार किया जाता है उसके बाद मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है।@Patrika. बाद में इस योजना का कहीं अता-पता नहीं रहता। इसका खामियाजा अब जल समस्या की परेशानी के रूप में भुगतना पड़ रहा है।

गुरुर ब्लॉक में बढऩे लगी पानी को लेकर परेशानियां
जानकारी अनुसार जिले में पानी की सबसे गंभीर समस्या गुरुर ब्लॉक में रहती है, तो डौण्डी ब्लॉक में लाल पानी व आयरन, फ्लोराइड पानी ने जीवन पर खतरा डाल रहा है। हालांकि पीएचई विभाग ने ऐसे हैंड पंपों में आयरन फ्लोराइड रिमुआल प्लांट लगाया है, पर कई जगह का यह सिस्टम ही खराब हो गया है। ऐसे में लोग मजबूरी में इसी दूषित पानी का उपयोग करने को मजबूर हैं।

आदेश की अवहेलना, हार्वेस्टिंग सिस्टम का उपयोग नहीं
साल दर साल धरती पर गहराते जल संकट पर चिंता जताते सुप्रीम कोर्ट ने भी रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को अनिवार्य किया है, पर इस मामले में संबंधित जिम्मेदार व विभाग ठोस पहल नहीं करते। इस पर शहर सहित ग्रामीण क्षेत्र व शासकीय विभागों में भी अमल नहीं होता।@Patrika. कलक्टोरेट, जिला पंचायत को छोड़ दें तो और भी शासकीय विभागों के भवन व शासकीय आवासों में यह सिस्टम ही नहीं लगाया गया है। आम लोग भी इस गंभीर मामले की अनदेखी कर रहे हैं। ऐसे में बारिश का पानी संरक्षित नहीं हो पाता और कीमती पानी यूं ही बह जाता है।

धरती पर पानी जाने से ऐसे रोक रहे हैं हम
देखा जाए तो एक ओर लोगों को साफ-सुथरा मार्ग मिल रहा है, तो वहीं बड़ी परेशानी ये सामने आ रही है कि गांवों से लेकर शहर तक कुछ वर्षों में कंक्रीटीकरण के चलते जमीन के अंदर पानी नहीं जा पा रहा है। इस ओर किसी का भी ध्यान नहीं जा रहा है। @Patrika.वहीं अत्यधिक बोर खनन से धरती छलनी हो रही है। लोग प्रतिदिन हजारों गैलन पानी का दोहर कर रहे हैं, पर धरती के अंदर पानी पहुंचाने पर कोई ध्यान नहीं दे रहे। इसलिए जल स्तर गिरते जा रहा है। यही वजह है कि अब समय से पहले ही पानी की कमी महसूस होने लगी है।

नदी किनारे कराया बोर हो गया था फेल
जल संकट की दयनीय स्थिति को ऐसे समझी जा सकती है कि पिछले साल पत्रिका ने नदी बचाओ अभियान चलाया था। इसमें साथ देने वाले निषाद समाज के एक सदस्य ने धरती पर नीचे जाते पानी के स्तर पर चिंता व्यक्त की थी। उन्होंने जानकारी दी थी कि पानी के लिए उन्होंने नदी से लगी जमीन पर बोर कराया, पर पानी नहीं मिलने पर दूसरी जगह प्रयास किया था तब जाकर सफलता मिली थी।@Patrika. ऐसे में हम कैसे सोच सकते हैं कि जहां हम पानी धरती पर नहीं सहेज पा रहे हैं और उसका दोहन करेंगे तो पानी कहां से आएगा।

बिगड़े हैंड पंपों को सुधारने में लगा पीएचई विभाग
इधर पीएचई विभाग गर्मी को देखते हुए अभी से बिगड़े हैंड पंप को सुधारने में लग गया है। विभाग के ईई आरके शुक्ला ने बताया कि बिगड़े हैंड पंपों को सुधारने का काम जारी है। शिकायत पर तत्काल कार्रवाई की जा रही है।@Patrika.वहीं इस मामले में पिछली बार नगर पालिका के अधिकारी रोहित साहू ने कहा था कि भवनों में हार्वेस्टिंग सिस्टम को अनिवार्य किया गया है। जो लोग नहीं लगाए हैं उन्हें नोटिस दिया जाएगा।

Niraj Upadhyay Desk/Reporting
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