महावीर गौशाला डौंडीलोहारा बन गया है नशेडिय़ों का अड्डा

बाउंड्री वाल नहीं होने से असामाजिक तत्वों का डेरा बन गया। गंदगी, अव्यवस्था व असुरक्षा के बीच हैं 100 मवेशी, गौशाला चाल से समिति को मिलने वाली बड़ी राशि का कोई हिसाब नहीं है।

By: Niraj Upadhyay

Published: 24 Jul 2018, 10:04 AM IST

डौंडीलोहारा. एक ओर जहां राज्य व केंद्र सरकार गौवंशीय पशुओं को बचाने की तरह के प्रयास कर रही है, वहीं दूसरी ओर महावीर गौशाला समिति से संचालित गौशाला बदहाली पर आंसू बहा रहा है। संचालन समिति में प्रमुख पदों पर वर्षों से जमे लोग शासन के दिशानिर्देश व समिति के बायलाज की अनदेखी कर रहे हैं। इसी वजह से परिसर में लगभग 100 पशु असुरक्षा, अव्यवस्था व गंदगी के बीच हैं। बारिश में गौशाला परिसर की स्थिति और भी दयनीय हो गई है। स्थिति ऐसी है कि वहां रहने वाले चौकीदार व चरवाहा चैतराम ने बताया कुछ समय पूर्व बालोद से जिले के एक बड़े अधिकारी गौशाला के निरीक्षण में आए थे। यहां सवाल ये है कि इतनी अव्यवस्था के बावजूद प्रशासन भी स्थिति की अनदेखी कर रहा है।

मुख्य द्वार टूटे हुए, टूटी चारदीवारी से नशेड़ी अंदर घुस जाते हैं
ज्ञात रहे कि डौंडीलोहारा में मस्जिद चौक में महावीर गौशाला समिति द्वारा संचालित गौशाला में चारों ओर अव्यवस्था का आलम है। पूरे गौशाला को दो चरवाहे भरोसे छोड़ दिया गया है। चरवाहा चैतराम ने बताया परिसर का मुख्य द्वार टूट गया है। बाउंड्रीवाल की दीवार भी जगह-जगह से टूट गई है। इस कारण उनकी अनुपस्थिति में बाहर से आकर नशेड़ी शराब पीते हैं। उसके बाद खाली शीशी व कचरा छोड़कर गंदगी फैलाकर चले जाते हैं। इसके अलावा परिसर में एक व्यक्ति द्वारा वर्षों से अवैध कब्जा कर रखा है। चारो ओर कीचड़ पसरी हुई है। ऐसे में गायों की देख भाल ठीक से नहीं हो पा रही है।

गायों की सेवा में पहुंचते हैं नगरवासी
एक ओर जहां संचालन समिति पशुओं को सुविधा उपलब्ध कराने में असफल नजर आ रही है। ऐसे में यहां के पशुओं की स्थिति में कमजोर है। उनकी संख्या घट रही है। वहीं नगरवासियों को अपने पशुओं की चिंता सताने लगी है। चरवाहे चैतराम ने बताया नगरवासी नरेंद्र भंसाली द्वारा प्रत्येक गुरुवार को 300 रोटियां बनवाकर पशुओं को खिलाई जाती है। अन्य लोग भी पशुओं के स्वास्थ्य को लेकर चिंतित हैं। यहां सवाल ये है कि प्रशासन इस गौशाला की ओर ध्यान नहीं दे रहा है।

गौशाला परिसर में अवैध निर्माण, एक को ही दे दी गई कई दुकानें
डौंडीलोहारा. ज्ञात रहे कि डौंडीलोहारा में वर्षों से महावीर गौशाला समिति द्वारा गौशाला व गौशाला चाल स्थित दुकानों व मकानों का संचालन किया जा रहा है। इसमें नियमानुसार कोई भी जरूरतमंद आवेदन देकर दुकान या रहने के लिए किराए से मकान ले सकता है। मामले में लोगों का आरोप है कि समिति का एक पदाधिकारी सार्वजनिक गौशाला के संचालन में मनमानी चल रही है। एक की व्यक्ति को कई दुकान दे दिया गया है। मामले में समिति के कुछ सदस्यों का करना है समिति का न तो नियमित चुनाव होता है और न ही उन्हें किसी प्रकार की कोई सूचना मिलती है।

मेरी दुकान जर्जर हो गई है, दूसरा मांगा को मना कर दिया
मामले में पूनम पैथोलॉजी के संचालक राजेश साहू का कहना है एक ही व्यापारियों को बहुत सी दुकानें आबंटित कर मनमानी की जा रही है। उनकी दुकान जर्जर हो जाने से कुछ दिनों पूर्व समिति के अध्यक्ष ताराचंद लोढ़ा से पास जाकर खाली आवास को देने की गुजारिश की थी, परंतु उन्हें आवास नहीं दिया गया। वहीं चहेतों व रसूखदारों को एक साथ इतनी दुकानें दे दी गई है।

एक से कम, तो दूसरे से लिया जा रहा अधिक किराया
दुलार सिंह सिन्हा का कहना है गौशाला में दुकान आबंटन में एक विशेष समाज को तवज्जो दी जा रही है। अन्य के साथ भेदभाव किया जा रहा है। बड़ी मिन्नतों के बाद दुकान दी गई है, परंतु अन्य लोगों से जहां 1200 से 1500 के आसपास किराया ले रहे हैं, वहीं उनसे 2000 रुपए किराया लिया जा रहा है। समिति के चुनाव का भी आता-पता नही है।

भवन में सभी हो मिले समाज तवज्जो
मामले में राजू सफहा व गिरीश निर्मोही का कहना है पिछले 10 वर्षों से वे यहां रह रहे हैं और नियमित किराया भी देते हैं, परंतु परिसर में कई लोगों ने वर्षों से अवैध तरीके से अतिक्रमण कर लिया है। समिति के एक पदाधिकारी द्वारा गौशाला संचालन में मनमानी की जा रही है। दुकानों के आबंटन में सभी लोगों को समान तवज्जो मिलनी चाहिए।

अवैध निर्माण पर कहा नहीं है जानकारी
जानकारी अनुसार गौशाला संचालन में जिम्मेदारों की मनमानी सामने है। परिसर में कई लोग मुख्य मार्ग की नाली के ऊपर टीन शेड व अवैध निर्माण कर मनमानी की जा रही है, लेकिन गौशाला संचालन समिति के जिम्मेदार इसकी जानकारी नहीं होने की बात कह रहे हैं।

मिलकर दूंगा जानकारी, चुनावी प्रक्रिया जारी है
मामले में महावीर गौशाला समिति, डौंडीलोहारा के अध्यक्ष ताराचंद जैन ने कहा परिसर के सामने नाली के ऊपर अवैध निर्माण की सूचना हमें नहीं है। किसी को भी इस तरह के निर्माण की कोई अनुमति नहीं दी गई है। बाकी जानकारी फोन पर नहीं दे सकता। मिलकर ही जानकारी बता पाऊंगा। वहीं गौशाला समिति के सचिव गुमानचंद लोढ़ा ने कहा कई दुकानदारों द्वारा नियमित किराया नहीं दिया जाता। समिति को सरकार से किसी तरह का अनुदान नहीं मिलता। किराया व चंदा से प्राप्त राशि से ही अन्य कार्यों का संचालन होता है। अरिहंत एजेंसी के संचालक सुशील पारख को आबंटित दुकानों के निर्माण में कुछ पैसे उन्होंने स्वयं निवेश किए हैं जिसे किराया में घटाया जाएगा। कार्यकारिणी में अभी 48 नए सदस्य शामिल किए गए हैं। बाकी चुनावी प्रक्रिया जारी है। वर्तमान में समिति के पास लगभग 4 से 5 लाख की राशि है। जिन दुकानदारों द्वारा किराया समय पर देते हैं उन्हें ही दुकांने देते हंै।

Niraj Upadhyay Desk/Reporting
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