scriptNow Anganwadi workers and helpers are uprooting tiles on verbal orders | अब मौखिक आदेश पर आंगनबाड़ी केंद्रों में टाइल्स उखाड़ रही आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं | Patrika News

अब मौखिक आदेश पर आंगनबाड़ी केंद्रों में टाइल्स उखाड़ रही आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं

आंगनबाड़ी केंद्रों में लगाई गई टाइल्स उखाडऩे का काम शुरू हो गया है। यह कार्य आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका खुद कर रही हैं। हालांकि उन्हें कोई लिखित आदेश नहीं दिए गए हैं। मौखिक आदेश का पालन किया जा रहा है। महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी ने टाइल्स उखाडऩे के निर्देश दिए हैं।

बालोद

Published: April 20, 2022 10:47:25 pm

बालोद. आंगनबाड़ी केंद्रों में लगाई गई टाइल्स उखाडऩे का काम शुरू हो गया है। यह कार्य आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका खुद कर रही हैं। हालांकि उन्हें कोई लिखित आदेश नहीं दिए गए हैं। मौखिक आदेश का पालन किया जा रहा है। महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी ने टाइल्स उखाडऩे के निर्देश दिए हैं। आंगनबाड़ी में खनिज न्यास निधि से करोड़ों रुपए खर्च कर स्तरहीन टाइल्स लगाई गई। घटिया कार्य से भविष्य में होने वाली घटना को नजरअंदाज कर दिया गया। भैंसबोड़ में टाइल्स गिरने के घटना के बाद यह कदम उठाए गए हैं। जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों में टाइल्स लगाने का उद्देश्य भी महिला बाल विकास विभाग नहीं बता पा रहा है। प्रत्येक केंद्र में कितना खर्च किया गया, इसकी भी जानकारी नहीं है। जिम्मेदार अधिकारियों का यही कहना है कि उनके आने के पहले टाइल्स लगाई गई।

भ्रष्टाचार की टाइल्स : जांच अधिकारी को गड़बड़ी से संबंधित कई सवालों के जवाब तलाशने हैं
केंद्र में अब आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिकाएं उखाड़ रहीं टाइल्स।

इन सवालों के जवाब देना जरूरी
भ्रष्टाचार की टाइल्स मामले में महिला एवं बाल विकास मंत्री अनिला भेडिय़ा के निर्देश के बाद कलेक्टर ने जांच शुरू करा दी है। जांच में सिर्फ घटना स्थल का निरीक्षण हुआ है। जांच अधिकारी ने यह जानकारी नहीं ली है कि किस मद से राशि खर्च की गई। योजना किसने बनाई और उद्देश्य क्या था। ठेका कैसे दिया। नियम के तहत कार्य हुआ या नहीं। टाइल्स लगाने के दौरान मूल्यांकन किया गया या नहीं। राशि का भुगतान किस आधार पर किया।

मौखिक आदेश, कार्यकर्ता घायल हो जाए तो जिम्मेदार कौन
महिला बाल विकास विभाग ने टाइल्स उखाडऩे के लिए लिखित आदेश नहीं दिया है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता टाइल्स उखाड़ रहे हैं। कार्यकर्ताओं ने दबी जुबान से कहा कि टाइल्स उखाड़ते समय हम घटना के शिकार हो गए तो जवाबदारी कौन लेगा।

बच्ची की सिर में गंभीर चोट, रेफर
भैंसबोड आंगनबाड़ी केंद्र में टाइल्स गिरने से घायल मिताली के सिर में गंभीर चोट लगी है। जिसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उसे बेहतर इलाज के लिए दुर्ग रेफर किया गया। बाकी बच्चे जिला अस्पताल में भर्ती है।

कुछ आंगनबाड़ी केंद्रों में टाइल्स उखाड़ी जा रही है
महिला एवं बाल विकास अधिकारी एचके राठौर ने बताया कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को पहले से ही निर्देश दिए हैं कि जहां-जहां टाइल्स उखड़ रही है, वहां टाइल्स को उखाड़ दें रिस्क न लें। कुछ आंगनबाड़ी केंद्रों में टाइल्स उखाड़ी जा रही है।

भैंसबोड़ की घटना से पता चला कि खनिज मद से सरकारी कार्यों में जमकर चल रही गड़बड़ी
बालोद/डौंडीलोहारा. पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष एवं भाजपा नेता देवलाल ठाकुर ने सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार का खेल चलने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि खनिज न्यास से होने वाले जितने भी कार्य हैं, वहां कार्यस्थल पर ना नाम है और न सूचना पटल। न कार्य करने वाले को कोई जानता है। राशि किस मद से ली गई है, इसकी भी जानकारी ग्राम पंचायत को नहीं होती है। यह सब भैंसबोड़ आंगनबाड़ी क्रमांक-3 की घटना से पता चलता है। सरकारी अमले को ही नहीं पता कि किसने कार्य किया। किसकी लापरवाही से चार बच्चों को गंभीर चोटें आई। इस तरह से डौंडीलोहारा विधानसभा में करोड़ों के कार्य कर दिए गए। यह ग्राम पंचायतों के प्रस्ताव के अनुरूप नहीं थे और जनता की मांग भी नहीं थी।

संरक्षण में चल रहा खेल, चिंता का विषय
देवलाल ठाकुर ने आरोप लगाते हुए कहा कि आदिवासी अंचल में आदिवासियों को मिलने वाले राशि की जमकर लूट हो रही है। यह डौंडीलोहारा विधानसभा के लोगों के लिए चिंतनीय है। यह खेल भी क्षेत्र के आदिवासी विधायक मंत्री के संरक्षण में खेला जा रहा है।

ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने बन रही योजनाएं
उन्होंने कहा कि दुख का विषय है विधानसभा अंतर्गत डौंडी ब्लॉक में सालों से किसान अपूर्ण बांधों को बनाने और अपनी सिंचाई व्यवस्था के लिए मांग कर रहे हैं। उन पर ना राशि खर्च करते हुए करोड़ों की राशि सिर्फ सप्लाई और ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने योजनाएं बनाई गई। जबकि लोगों की जरूरत कुछ और है। डौंडी ब्लॉक में स्कूल हो, ग्राम पंचायत हो या फिर आंगनबाड़ी केंद्र हो, ठेकेदार अपना समान छोड़ कर चले जाते हैं। संबंधित विभाग को पता ही नहीं चलता है कि सामान कहां से आया। उनका बिल भी पास हो जाता है। ऐसे भ्रष्टाचार की गाथा लंबी है।

पेसा कानून पर राज्य सरकार कर रही ढोंग
छत्तीसगढ़ सरकार की घोषणा में था कि पेसा एक्ट लागू करेंगे। अनुसूचित क्षेत्र की ग्राम सभा के प्रस्ताव पर ही काम होगा। प्रशासन ग्राम सभा व ग्राम पंचायतों की मांगों को लगातार दरकिनार कर आदिवासी समाज के अधिकारों का हनन कर रहा है। प्रशासन ठेकेदारों से प्रस्तावित किस कार्य में ज्यादा पैसा बचेगा, वैसे अनुपयोगी कार्यों को स्वीकृति प्रदान कर रहा है। ग्राम सभा व पेसा कानून को मजबूत प्रभावी करने वाली सरकार की मंशा महज ढोंग नजर आती है।

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