पीड़ा ऐसी कि इन गांवों के वासी अब नहीं रखना चाहते लोकतंत्र से कोई वास्ता

महिला व बाल विकास मंत्री अनिला भेडिय़ा के विधानसभा क्षेत्र के मामले में दशकों से लोग अपनी परेशानियां शासन-प्रशासन के सामने रखते आ रहे हैं, पर वाह रे जिम्मेदार लाल फाइन्स से खेती जमीन को बर्बाद होने से बचाने कोई पहल नहीं की। इसलिए प्रभावित ग्रामीणों ने चुनाव बहिष्कार का ऐलान कर दिया है।

By: Niraj Upadhyay

Published: 04 Apr 2019, 09:02 AM IST

बालोद. 47 वर्षों से लाल पानी की समस्या से जूझ रहे लौहनगरी क्षेत्र के किसानों ने लोकसभा चुनाव बहिष्कार का ऐलान कर दिया है। ऐसी घोषणा करने वाले कोई और नहीं बल्कि प्रदेश की महिला बाल विकास मंत्री अनिला भेडिय़ा के विधानसभा क्षेत्र डौंडीलोहारा की जनता है।

बावजूद विडंबना ये है कि बाहर के लोगों को रोजगार दिया जा रहा है
बीएसपी प्रबंधन द्वारा लाल पानी से प्रभावित किसानों की बजाय बाहरी मजदूरों को काम पर रखने के विरोध में आगामी लोकसभा चुनाव में मतदान बहिष्कार किया है। डौण्डीलोहारा विधानसभा क्षेत्र के गांव कुमुड़कट्टा और नलकसा के सैकड़ों ग्रामीण पिछले करीब 47 साल से लाल पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। माइन्स की पहाड़ी से बहकर आने वाला लाल पानी व फाइन्सयुक्त मिट्टी के कारण खेतों में सही ढंग से फसल नहीं उग पाती है।

पांचवीं अनुसूची क्षेत्र होने के बावजूद हम हैं उपेक्षित
ग्रामीणों ने जानकारी दी कि इतना ही नहीं बल्कि पांचवीं अनुसूची क्षेत्र होने के बावजूद यहां के ग्रामीणों को सही ढंग से रोजगार व मूलभूत सुविधाएं भी नहीं मिल पा रही है। ग्रामीणों की मानें तो वे पिछले लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर लगातार शासन-प्रशासन से जमीनी स्तर पर लड़ाई लड़ रहे हैं, लेकिन उन्हें आज तक इसका सही हल नहीं मिल पाया। शासन-प्रशासन द्वारा मांगों की अनसुनी करने के बाद अब ग्रामीणों ने लोकसभा चुनाव के बहिष्कार का ऐलान कर दिया है। ग्रामीणों के इस ऐलान के बाद जिला निर्वाचन में हड़कंप मच गया है।

ग्राम कुमुड़कट्टा और नलकसा है माइंस का निचला हिस्सा
बता दें कि डौण्डीलोहारा विधानसभा के डौंडी विकासखण्ड अंतर्गत ग्राम कुमुड़कट्टा और नलकसा है जिनकी बसाहट महामाया माइन्स पहाड़ी का निचला हिस्सा है। महामाया माइन्स पहाड़ी से बहकर आने वाले लाल पानी व फाइन्सयुक्त मिट्टी इन ग्रामीणों के लिये परेशानी का कारण बन गया है। ये पानी सीधे इनके खेतों में जाता है और इसी के कारण यहां के खेतों में सही ढंग से फसल भी उग नहीं पाती है।

माइंस पहाड़ी में दब कर रह गई ग्रामीणों की पीड़ा
सालों से झेल रहे परेशानी और संबंधितों को पीड़ा बताने के बाद भी इनकी आवाज इसी माइन्स पहाड़ी में ही दब कर रह जाती है। लिहाजा इन्हें आज तक सही हल नहीं मिल पाया। इसके अलावा इन ग्रामीणों को इस माइन्स पहाड़ी से कोई खास लाभ हासिल नहीं हो पाया। लाल पानी से प्रभावित ग्रामीणों ने प्रत्येक परिवार से एक सदस्य को बीएसपी में नौकरी पर रखने की भी मांग की है, जहां बीएसपी प्रबंधन ने भी इनकी मांगों को नजरअंदाज कर दिया है।

सबकुछ हो जाएगा बर्बाद, नहीं रहेगा यहां जीवन
ग्रामीणों ने जानकारी दी कि इनके ही क्षेत्र से बीएसपी कच्चा लोहे का लगातार दोहन कर रहा है, लेकिन इसके आसपास के गांवों के ग्रामीणों को इसके एवज में कुछ भी हासिल नहीं हो पा रहा हैं। कहा जाए ऐसी ही स्थिति रही तो यहां जीवन पूरी तरह बर्बाद हो जाएगा। उसके बाद भी जिम्मेदार माइंस प्रबंधन ग्रामीणों को मूलभूत सुविधा नहीं दे रहा है। आखिरकार लाल पानी प्रभावित परिवार अब जनमुक्ति मोर्चा ब्लॉक इकाई कुमुड़कट्टा के साथ मिलकर लोकसभा चुनाव के बहिष्कार का ऐलान कर दिया है।

जिला निर्वाचन सहित प्रशासन में मचा हड़कंप
ग्रामीणों के आगामी लोकसभा चुनाव में मतदान नहीं करने के ऐलान से जिला निर्वाचन सहित प्रशासनिक खेमे में हड़कंप मच गया है। कलक्टर ने जिले के आला अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे ऐसे गांवों में जाएं और उनकी समस्याओं को सुने व मतदान का महत्व बताते हुए उन्हें मतदान के लिए प्रेरित करें। साथ ही समस्यायों को लेकर आचार संहिता हटने के बाद इनके लिए कोई कार्ययोजना बनाएं।

Niraj Upadhyay Desk/Reporting
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