कागज में बन गया आदर्श ग्राम, पौने तीन करोड़ की योजना धरी रह गई

कागज में बन गया आदर्श ग्राम, पौने तीन करोड़ की योजना धरी रह गई

Chandra Kishor Deshmukh | Updated: 21 Aug 2019, 08:11:11 AM (IST) Balod, Balod, Chhattisgarh, India

बालोद जिले के जिस गांव को सांसद आदर्श गांव बनाने के लिए चयन किया था उसे शासन के अधिकारियों ने ही पलीता लगा दिया। अधिकारियों ने जिले के ग्राम लाटाबोड़ को सांसद आदर्श ग्राम तो कागज में बना दिया और दो करोड़ 97 लाख की लागत से 43 कार्ययोजना धरी की धरी रह गई।

बालोद @ patrika . जिले के जिस गांव को सांसद आदर्श गांव बनाने के लिए चयन किया था उसे शासन के अधिकारियों ने ही पलीता लगा दिया। अधिकारियों ने जिले के ग्राम लाटाबोड़ को सांसद आदर्श ग्राम तो कागज में बना दिया और दो करोड़ 97 लाख की लागत से 43 कार्ययोजना धरी की धरी रह गई।

गांव में मूलभूत सुविधाएं तक नहीं
43 कार्यों में मात्र नौ को छोड़ एक भी काम शुरू नहीं हुआ है। सांसद आदर्श ग्राम की स्थिति ऐसी है कि गांव में मूलभूत सुविधाएं तक नहीं है। सड़क, पानी, बिजली, शिक्षा और चिकित्सा सुविधाओं का बुरा हाल है। पंचायत द्वारा कई बार संबंधितों को आवेदन दिया जा चुका है।

जनवरी 2018 में मिला सांसद आदर्श ग्राम का दर्जा
जिला पंचायत से मिली जानकारी के मुताबिक सन 2018 जनवरी में ग्राम लाटाबोड़ को सांसद आदर्श ग्राम बनाया गया। इसी के साथ जिले के सभी विभागों को निर्देश जारी किया गया था कि गांव के विकास में सभी कामों को प्राथमिकता देना है। जिला पंचायत सहित ग्राम पंचायत द्वारा गाव में विभिन्न विकास कार्यो की सूची तैयार की गई। पूरा साल बीत गया पर आज तक कोई निर्माण नहीं हुआ। शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधियों कीउदासीनता के चलते यह गांव आज भी उपेक्षित है।

43 काम के लिए 2 करोड़ 97 लाख की कार्ययोजना
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक इस गांव को सांसद आदर्श ग्राम बनाया तो पंचायत ने उच्च अधिकारियों के कहने पर ग्राम विकास और मूलभूत सुविधाओं के लिए कुल 43 काम के लिए 2 करोड़ 97 लाख की कार्ययोजना तैयार की गई। जिम्मेदार विभागों ने गांव के विकास में कोई रूचि नहीं दिखाई। ग्रामीण कभी यह अहसास नहीं करा पाए कि यह एक सांसद आदर्श ग्राम है।

भेज रहे विभागों को रिमाइंडर, सभी ने साधी चुप्पी
जिला पंचायत द्वारा जिस विभागों को गांव को संवारने की जिम्मेदारी दी गई थी उसे कई बार रिमाइंडर भेजा गया। रिमाइंडर के बाद संबंधित विभागों ने कोई ध्यान नहीं दिया। सभी ने चुप्पी साध ली है।

यह काम होने थे
आंगनबाड़ी दो में अहाता निर्माण, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में बाउंड्रीवाल, शिशु स्वास्थ्य गृह का निर्माण, गांव के सभी मुहल्लों में बड़ी नाली निर्माण, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की जगह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण, गांव के सभी आंगनबाड़ी केंद्र में टीवी, हथकरघा वस्त्र उत्पादन उद्योग लगाना व कौशल प्रशिक्षण केंद्र सहित 43 प्रकार के कार्ययोजना में शामिल थे। मात्र 9 काम ही पूर्ण हुए है जो पंचायती राज के अंतर्गत है। बाकी आज भी स्वीकृत नहीं है।

गांव की यह काम पहली प्राथमिकता
* गांव में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण।
* गांव में कॉलेज की स्वीकृत।
* गांव की सभी गलियों का कंक्रीटीकरण।
* गांव के गली व मुख्य मार्ग में नाली निर्माण।
* मैदान समतलीकारण

फैक्ट फाइल
ग्रांम पंचायत लाटाबोड़
जनसंख्या 2029
मकान 588

सभी भवन जर्जर
गांव में बैंक, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक से हायर सेकंडरी स्कूल भवन सहित पशु व आर्युर्वेदिक औषधालय है। बैंक व स्कूल भवन को छोड़ ये सभी जर्जर स्थिति में है।

 

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पंचायती राज के काम हुए
ग्राम लाटाबोड़ के उपसरपंच कुलेश्वर ठाकुर ने कहा कि शासन व प्रशासन ने गांव को सांसद आदर्श ग्राम बनाया है। जब से यह दर्जा मिला है तब से कोई काम नहीं हुआ। पंचायत द्वारा 43 कार्यों का प्रस्ताव बनाकर दिया गया है। इसमें से भी पंचायती राज के मात्र 9 काम ही पूरा हुआ है।

अलग से कोई फंड नहीं
जिला परियोजना अधिकारी जिला पंचायत बालोद अनिल लछानी ने कहा कि सांसद आदर्श ग्राम विकास के लिए अलग से कोई फंड नहीं आता। विभिन्न विभाग के अधिकारी पहली प्राथमिकता के तौर पर काम कराते है। समय समय पर विभागों को रिमाइंडर भिजवाते है। इस मामले को दिखवाता हूं फिर आगे की कार्यवाही की जाएगी।

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