सहेज रहे संस्कृति व परंपरा: लुप्त होते नाचा को बचाने 47 साल में 5 हजार मंचों में दी प्रस्तुति, 100 से ज्यादा बच्चों को सिखा रहे गुर

लुप्त होते छत्तीसगढ़ी हास्य गम्मत नाचा कला विधा को एक कलाकार 47 साल से परी व डाकू सुल्तान की भूमिका निभाकर जिंदा रखे हुए है। बालोद ब्लॉक के ग्राम लाटाबोड़ निवासी 72 साल के डोमार सिंह कुंवर अपने स्कूल से लेकर दिल्ली के मंच पर मंचन किया है।

By: Chandra Kishor Deshmukh

Published: 20 Feb 2021, 07:43 PM IST

बालोद . लुप्त होते छत्तीसगढ़ी हास्य गम्मत नाचा कला विधा को एक कलाकार 47 साल से परी व डाकू सुल्तान की भूमिका निभाकर जिंदा रखे हुए है। बालोद ब्लॉक के ग्राम लाटाबोड़ निवासी 72 साल के डोमार सिंह कुंवर अपने स्कूल से लेकर दिल्ली के मंच पर मंचन किया है। वे नाचा गम्मत व अपनी संस्कृति को बचाने प्रयास कर रहे हैं। वे छत्तीसगढ़ के अलावा देशभर में 5 हजार से ज्यादा मंचों पर प्रस्तुति दे चुके हंै। इसके अलावा प्रेरणादायक लोक गीत, पर्यावरण, नशामुक्ति, कुष्ठ उन्मूलन के गीत लिख चुके हैं।

नाचा-गम्मत की कार्यशाला आयोजित कर बच्चों को सिखा रहे
अब बच्चों को भी नाचा गम्मत की कार्यशाला आयोजित कर सिखा रहे हैं, ताकि यह विधा जिंदा रहे। इस बेहतर कार्य के लिए राज्य शासन, संस्कृति विभाग व जिला प्रशासन सहित विभिन्न सामाजिक व सांस्कृतिक एवं धार्मिक संगठनों सम्मान भी कर चुके हैं।

12 साल की उम्र से पहली बार मंच में उतरे
डोमार सिंह कुंवर ने बताया कि वे जब स्कूल में पढ़ रहे थे। तब 12 साल की उम्र में पहली बार मंच में उतरे। तभी से नाचा व गम्मत की प्रस्तुति कर रहे हंै। नाट्यकला की टीम ने नाट्य प्रतियोगिता में दिल्ली तक चयनित हुए। उसके बाद से लगातार नाचा में परी व डाकू सुल्तान की भूमिका निभा रहे है।

एक्टर, गम्मतिहा, के साथ फिल्म डायरेक्टर भी
उन्होंने बताया कि वे नाचा गम्मत की प्रस्तुति के साथ ही 150 से ज्यादा प्रेरणाप्रद गीत भी लिख चुके हैं। इसके अलावा मन के बात मन म रहिगे जैसी तीन छत्तीसगढ़ी फिल्म का निर्माण व उसमें काम कर चुके हंै। इनके गाने की प्रस्तुति आकाशवाणी एवं नाचा का प्रसारण बीबीसी लंदन से भी ब्रॉडकास्ट हुआ था।

शराबखोरी नहीं करने का दिलाते हैं संकल्प
उन्होंने छत्तीसगढ़ की राजधानी, राज्योत्सव, राजिम कुंभ सहित दिल्ली सहित देश के लगभग हर राज्यो में नाचा की प्रस्तुति दी है। अब नाचा लुप्त न हो जाए, इसलिए 10 साल से जगह-जगह कार्यशाला आयोजित कर 100 से अधिक छोटे बच्चों को नाचा व लोकगीत सिखा रहे हैं। साथ ही उनके बारीकी व महत्व भी बता रहे हैं। उन्होंने बताया कि जब नाचा की प्रस्तुति करते हैं, तब कार्यक्रम के अंत में सभी को शराबखोरी नहीं करने व अपराध नहीं करने का संकल्प दिलवाते है।

फूहड़ता बिगाड़ रही हमारी संस्कृति
उन्होंने कहा कि उनकी नाचा पार्टी में कोई अश्लीलता व फूहड़ता नहीं रहती है, लेकिन वर्तमान में कई ऐसी संस्था व गायक हैं, जो सिर्फ गंदे व फूहड़ता भरे गाना बनाते हैं। अश्लीलता के साथ नृत्य कर छत्तीसगढ़ की संस्कृति को बिगाडऩे का प्रयास कर रहे हैं, जो चिंता का कारण है। इस भौतिक व आधुनिक युग में भी हमें युवाओं को आगे आकर अपनी लुप्त होती संस्कृति बचाने का प्रयास करना चाहिए।

Chandra Kishor Deshmukh Bureau Incharge
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