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गांव को ऑक्सीजोन बनाने पौधों के लिए श्मशान के कपड़ों से बनाया सुरक्षा घेरा

गुंडरदेही ब्लॉक मुख्यालय से 3 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत मचौद की सरपंच सुमन तिवारी एवं पंचों ने सराहनीय कार्य किया है। मचौद में 12 पंच एवं ग्रामीणों ने शपथ ली है कि मृत व्यक्तियों को कफन के कपड़े को पौधरोपण की सुरक्षा में उपयोग करेंगे।

बालोद

Published: February 23, 2022 12:26:20 pm

बालोद/गुंडरदेही. गुंडरदेही ब्लॉक मुख्यालय से 3 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत मचौद की सरपंच सुमन तिवारी एवं पंचों ने सराहनीय कार्य किया है। मचौद में 12 पंच एवं ग्रामीणों ने शपथ ली है कि मृत व्यक्तियों को कफन के कपड़े को पौधरोपण की सुरक्षा में उपयोग करेंगे। गांव में किसी मृत व्यक्ति के कफन के कपड़े को तालाब पार में लगे पौधों की सुरक्षा में लगाया गया है। जानवर और बकरी से बचाने इससे घेरा बनाया जा रहा है। दाह संस्कार के कपड़ों को नहीं जलाकर पर्यावरण को भी बचाया जा रहा है। मचौद में लगभग 3200 पौधे सरपंच सुमन तिवारी के नेतृत्व में लगाए गए हैं। लगभग 1600 पौधों को कफन के कपड़े से सुरक्षित किया गया है। गाय, बकरी, बैल पौधों को नष्ट नहीं करेंगे। पौधों में बांस से बना ट्री गार्ड भी लगाया गया है।
श्मशान के कपड़ों को जलाने से होता था प्रदूषण, अब नहीं जलाया जाता,गांव को बना रहे ऑक्सीजन जोन
कोरोना काल से लिया सबक, अब गांव को ऑक्सीजन जोन बना रहे।,गाय, भैंस और बकरी से रोपे गए पौधों की सुरक्षा के लिए बनाया घेरा।

पौधों में प्रतिदिन मनरेगा के तहत पानी भी डाला जा रहा
सरपंच पति कृष्णमूर्ति तिवारी एवं वार्ड-12 के पंच के अनुसार सभी पौधों में प्रतिदिन मनरेगा के तहत पानी भी डाला जा रहा है। पंच जानकी बाई, अनीता बाई, मोती चंद्राकर, विमला बाई, मीरा बाई, कुंती बाई चंद्राकर, अनु बाई साहू, चाणक्य, पुष्पा सोनवानी, विजय साहू, बिहारी लाल नागवंशी, कृष्णमूर्ति तिवारी ने मृत व्यक्तियों का कफन नहीं जलाने का निर्णय लिया है। इस कपड़े से बनाया गया सुरक्षा घेरा देखने योग्य है।

गांव को ऑक्सीजन जोन बना रहे
सरपंच सुमन तिवारी ने कहा कि एक समय था, जब ऑक्सीजन की कमी के कारण देश और राज्य में कोरोना वायरस ने हजारों लोगों की जान ले ली। अब गांव को ऑक्सीजन जोन के रूप में विकसित कर रहे हैं। हमारे मन में बात आई कि कफन को जलाकर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाते हैं। उसे पर्यावरण की सुरक्षा में उपयोग कर रहे हैं। उन्होंने लोगों से कफन के कपड़े का इसी तरह उपयोग करने और एक पौधा लगाने की अपील की।

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