एक दिन बाद छुट्टी में घर आने वाले थे शहीद छगन कुलदीप, तिरंगे में लिपटा पार्थिव देह आया तो गांव में छा गया मातम

दंतेवाड़ा में हुए नक्सली हमले में दंतेवाड़ा विधायक भीमा सिंह मंडावी की सुरक्षा में लगे बालोद जिले के ग्राम नर्रा के जवान छगन कुलदीप भी शहीद हो गया। बुधवार को शहीद जवान के पार्थिव शरीर को दंतेवाड़ा पुलिस लाइन से हेलीकाप्टर के जरिए बालोद लाया गया। ग्राम नर्रा में शहीद का अंतिम संस्कार किया गया।

By: Chandra Kishor Deshmukh

Updated: 10 Apr 2019, 11:27 PM IST

बालोद @ patrika . दंतेवाड़ा में मंगलवार को हुए नक्सली हमले में दंतेवाड़ा विधायक भीमा सिंह मंडावी की सुरक्षा में लगे बालोद जिले के ग्राम नर्रा के जवान छगन कुलदीप भी शहीद हो गया। बुधवार को शहीद जवान के पार्थिव शरीर को दंतेवाड़ा पुलिस लाइन से हेलीकाप्टर के जरिए बालोद लाया गया। जहां से एम्बुलेंस के माध्यम से शहीद जवान का पार्थिव शरीर उनके गाव नर्रा पहुचाया गया। बेटे की शहादत पर पूरे गांव में मातम छाया हुआ है। @ patrika . पार्थिव शरीर के गांव पहुंचते ही भारत माता की जयकारे और छगन कुलदीप अमर रहे के नारे गूंजते रहे। कलक्टर, एसपी, पूर्व विधायक सहित जिले भर के जनप्रतिनिधियो और ग्रामीणों ने गाव में शहीद छगन कुलदीप को श्रद्धांजलि दी। शहीद के सम्मान में पुलिस जवानों ने गार्ड आफ ऑनर पेश किया। देश के वीर सपूत शहिद छगन कुलदीप को उनके 12 साल के बेटे शाहिल ने मुखाग्नि दी।

मंगलवार के दिन ही ज्वाइन की थी सेवा
शहीद छगन कुलदीप 13 अगस्त मंगलवार को आठवीं बटालियन राजनांदगाव में पदस्थ हुआ था। मंगलवार को ही दंतेवाड़ा विधायक भीमा सिंह मंडावी के काफिल में हुए माओवादियों की कायराना हमले में अपनी ड्यूटी निभाते हुए प्राण गवां दिया। @ patrika . गांव में उनके करीबी लोगों ने बताया कि शहीद छगन कुलदीप बुधवार को छुट्टी में घर आने वाले थे। घर आने के लिए छुट्टी ले ली थी, लेकिन मंगलवार को शहीद होने के बाद बुधवार को तिरंगे से लिपटा उनका पार्थिव शरीर घर पहुंचा।

2001 में हुई थी पदस्थापना, परिवार के साथ रहते थे कांकेर में लगी थी वीआईपी ड्यूटी
पुलिस विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक शहीद छगन सन 2001 में 16 वीं बटालियन नारायणपुर में पदस्थ हुए थे। उसके बाद वीआइपी बटालियान माना में पदस्थ रहे। वही से ही विधायक मोहन मंडावी के सुरक्षा में ड्यूटी पर रहे।

मासूम बच्चों के सिर छिना पिता का साया
शहीद छगन के दो बच्चे हैं। एक 12 साल का बेटा शाहिल और एक 10 साल की बेटी सेजल । शाहिल ने अपने पिता को नम आंखों से मुखाग्नि दी। वे एक माह पहले ही घर आए थे। @ patrika . उनकी शहादत की खबर सुनकर उनकी मां और पत्नी हुई बेसुध हो गईं। परिजनों के मुताबिक शहीद छगन शादी के लिए रिश्तेदारी के लिए छुट्टी लेकर मार्च माह में ही गांव आए थे और फिर घर वाले से अगले माह आने की बात कहकर चले गए। पर ठीक एक माह बाद छगन की शहादत की खबर आई। पूरे गांव में मातम छा गया।

 

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शहीद को पहले घर नहीं ले जाने पर भड़के परिजन एसपी के समझाने के बाद मामला हुआ शांत
पुलिस ने नियम अनुसार शहीद के पार्थिव शरीर को गांव के मंच में रखा और सबसे पहले उनके भाई से श्रद्धांजलि दिलवाया। उसी समय उनके दो परिजन आ गए और पुलिस विभाग पर भड़कने लगे कि किसके कहने पर यहां श्रद्धांजलि दी जा रही है। एसपी ने उन्हें समझाया तब वे शांत हुए और फिर मंच में श्रद्धांजलि सभा समाप्त होने के बाद पार्थिव शरीर को उनके घर ले जाया गया।

कलक्टर, एसपी व जनप्रतिनिधियों ने दी श्रद्धांजलि
जब गांव में शहीद की पार्थिव शरीर को लाया गया तो सबसे पहले नगर पालिका अध्यक्ष विकास चोपड़ा ने हेलीपेड बालोद में श्रद्धांजलि अर्पित की। उसके बाद गाव में उनके भाई और उनके पिता व कलक्टर रानू साहू, एसपी एमएल कोटवानी, पूर्व विधायक भैयाराम सिन्हा, जिला कांग्रेस अध्यक्ष कृष्णाा दुबे, भाजपा जिला उपाध्यक्ष पवन साहू, दयानंद साहू सहित और भी बड़ी संख्या में लोगों ने श्रद्धांजलि दी।

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हेलीकॉप्टर से बालोद लाया शव
दोपहर की तेज धूप में भारतीय सेना का हेलीकॉप्टर जब गडगड़़ाते हुए भारी आवाज के साथ बालोद के कॉलेज ग्राउंड में उतरा तो धूल के गुबार चारों ओर ऐसे उड़ा मानों एक तेज आंधी आ गई हो। उस चलते हुए हेलीकॉप्टर से एक जवान नीचे उतरकर आया और उसने दूर खड़े एंबुलेंस को इशारा करते हुए अपनी ओर बुलाया। जहां शहीद जवान का पार्थिव शरीर हेलीकॉप्टर से उतार कर एंबुलेंस के माध्यम से गृह ग्राम नर्रा ले जाया गया। @ patrika . शहीद जवान का पार्थिव शरीर नर्रा पहुंचते ही वहां उमड़ी भीड़ ने भारत माता की जय व शहीद जवान अमर रहे के नारे से देश भक्ति का माहौल बना दिया। उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में नक्सल हमले में कुल 5 लोग शहीद हो गए जिसमें से एक जवान शहीद छगन कुलदीप, बालोद जिले के ग्राम नर्रा का निवासी था।

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Chandra Kishor Deshmukh Bureau Incharge
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