Teacher's day 2018 : अंग्रेजी सरल बनाई, सुर-साधना सिखाया, गुरु के साथ निभाया पिता का भी फर्ज

Teacher's day 2018 : अंग्रेजी सरल बनाई, सुर-साधना सिखाया, गुरु के साथ निभाया पिता का भी फर्ज

Chandra Kishor Deshmukh | Publish: Sep, 05 2018 08:00:00 AM (IST) Balod, Chhattisgarh, India

पूर्व शिक्षक, पूर्व राष्ट्रपति मोच्छगुंडम विश्वेश्वरैया की जयंती को पूरे जिले में शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाएगा। इस अवसर पर शिक्षकों के सम्मान में शिक्षण संस्थाओं में समारोह आयोजित किए जाएंगे।

शैलेष-विकास ओटवानी
बालोद/डौंडीलोहारा. पूर्व शिक्षक, पूर्व राष्ट्रपति मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया की जंयती को पूरे जिले में शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाएगा। इस अवसर पर शिक्षकों के सम्मान में शिक्षण संस्थाओं में समारोह आयोजित किए जाएंगे। इस दौरान अनेक ऐसे शिक्षक शामिल होंगे जो बच्चों को उनके मुकाम तक पहुंचाने अपने साथियों से अलग तरह का नवाचार कर शिक्षा में रूचि पैदा करते हैं। ऐसे में जिले में उनकी अलग पहचान बन चुकी है। हम भी उनसे सीख लें।

डोंगरमल ने बना दिया अंग्रेजी भाषा को सहज अब बच्चों को इसे पढऩे में नहीं आती मुश्किल
शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय संजारी में पदस्थ व्याख्याता डोंगरमल रामटेके अंग्रेजी भाषा को अपने नवाचार के माध्यम से सहज बना दिया है। वे अपने शिक्षण में पिक्चर मैथड, पोस्टर मैथड व उदाहरण का प्रयोग करते हुए बच्चों में कमजोरी दूर करने प्रयास करते हैं। 2016 में ईएलटीआई से प्रशिक्षण एससीइआरटी रायपुर व दिल्ली में प्रशिक्षण प्राप्त कर वे स्कूल में नवाचार कर बच्चों में विषय के प्रति रूचि पैदा करने इंग्लिश स्टोरी टेलिंग फेस्टिवल का आयोजन करते हैं। उनके सहयोग से सामुदायिक सहभागिता अंतर्गत संस्था को कंप्यूटर, प्रोजेक्टर व प्रिंटर प्राप्त हुआ है। ड्रामा के माध्यम से स्वच्छ भारत अभियान के काम हो रहे हैं।

सफाई व स्वास्थ्य के प्रति सचेत करने कमलकांत ने बच्चों की बनाई टोली
शासकीय प्राथमिक शाला बडग़ांव में पदस्थ सहायक शिक्षक कमलकांत साहू एक ऐसे समाजसेवी शिक्षक हैं जो ग्रामीण स्वच्छता टोली (जीएसटी) का संचालन करते हैं। बड़ी बात ये है कि उनकी टोली में छोटे-छोटे बच्चे ग्रामीणों में सफाई के प्रति सालभर से जागरूता पैदा कर रहे हैं। साहू के मार्गदर्शन में बच्चे रोजाना गांव की सफार्ई करते हैं। सुबह 5 बजे उठकर गांव की गली, मोहल्ले, तालाब, हैंडपंपों के आसपास सफार्ई कर लोगों के प्रेरित करते हैं। स्वास्थ्य के प्रति लोगों को सचेत करने योग शिविर लगाकर बच्चों के माध्यम से नि:स्वार्थ समाज सेवा करते हुए शिक्षक कमलकांत क्षेत्र में मिसाल बने हुए हैं।

इनके पास बच्चों को संगीत में पारंगत करने का जादू, अपनी छुट्टियां छोड़ बच्चों को सिखाते हैं
शासकीय प्राथमिक शाला चिलमगोटा में पदस्थ सहायक शिक्षक सुभाष बेलचंदन शिक्षा के साथ एक संस्कार में बच्चों को ढाल रहे हैं। बच्चों में क्षेत्रीय संगीत सहित अन्य संगीत में रूचि पैदा करने लगातार प्रयास कर रहे हैं। इससे नई पीढ़ी में रूचि पैदा करने वनांचल ग्राम खेड़ी में उनका ग्रुप तैयार हो चुका है, जो आसपास क्षेत्र में विख्यात होते जा रहे हैं। शिक्षक बेलचंदन गर्मी की छुट्टियों में भी रोजाना स्कूल जाते हैं और स्वयं के खर्च से ग्राम संगीत कार्यशाला का आयोजन करते हैं। वे कई प्रसिद्ध मंचों में बच्चों के साथ अपनी प्रस्तुति दे चुके हैं। वे कई लोक गीतों में शोध भी कर रहे हैं। उनकी पहचान अब एक कलाकार के रूप में बन चुकी है।

कबाड़ से नई शिक्षण सामग्री, मिट्टी कला के प्रति शिक्षिका निशा बढ़ा रहीं रुचि
शासकीय प्राथमिक शाला कोटेरा में पदस्थ सहायक शिक्षिका निशा साहू अध्यापन में नित नए नवाचार का प्रयोग करती हैं। कला को जिंदा रखने गर्मी की छुट्टियों में बच्चों को मिट्टी के खिलौने बनाना सिखाती हैं। साथ ही प्रिंट रिच का स्वयं निर्माण करती हैं। स्वयं के खर्च से बच्चों के लिए पाठ्य सामग्रियों की भी व्यवस्था करती हैं। परीक्षा में परिणाम की घोषणा के समय कक्षा के सभी बच्चों को पुरस्कृत करती हैं ताकि उन्हें उचित प्रोत्साहन मिले। उनकी कक्षा में लगाए प्रिंट रिच, वॉल पेपर बोर्ड, गणितीय व ज्यामितीय आकृति, अक्षर खिड़की आदि बयान करते हैं कि किस तरह कबाड़ से जुगाड़ कर बेहतर शिक्षण सामग्रियों का निर्माण किया जा सकता है।

सालभर नि:शुल्क योग शिविर से लोगों को शिक्षक पीलूराम बना रहे निरोग
शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला बडग़ांव में पदस्थ शिक्षक पीलूराम साहू बच्चों को स्कूल में पढ़ाने के साथ गांव-गांव घूम कर नि:शुल्क योग शिविर का आयोजन करते हैं। वे प्रतिदिन सुबह 4 बजे उठ कर आसपास के ग्रामीण बच्चों के साथ सभी उम्र को लोगों को स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहने के लिए योग सिखाते हैं। वहीं स्थानीय साहू सदन में बाल संस्कार शाला का प्रति रविवार संचालन करते हुए संस्कार की शिक्षा में लगे रहते हैं। पतंजलि योग पीठ हरिद्वार से प्रशिक्षण प्राप्त पीलूराम नशा मुक्ति अभियान चला रहे हैं। आर्ट ऑफ लिविंग के शिविर में भी अपनी सेवाएं देते हैं। इसका लाभ शासकीय स्कूल बच्चों को भी मिल रहा है।

 

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शाला त्यागी बच्चों को शिवेंद्र्र बहादुर ने जोड़ा शिक्षा की मुख्य धारा से
शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय संजारी में पदस्थ व्याख्याता शिवेंद्र बहादुर साहू की पहचान एक ऐसे शिक्षक के रूप में है जो विद्यार्थियों को बीच में पढ़ाई छोडऩे ही नहीं देते। जो विद्यार्थी लगातार तीन से चार दिन बिना पूर्व सूचना के कक्षा में नजर नहीं आया, तो वे बच्चे का हाल-चाल जानने उसके घर पहुंच जाते हैं। यहां तक मजदूरी करने बाहर जा चुके परिवार को भी शिक्षा के प्रति रूचि बढ़ाईा। कमजोर आर्थिक स्थिति के बच्चों को शिक्षा के प्रति रुचि रखने पूरा मदद करते हैं। बेटी चित्ररेखा को उन्होंने पूरी शिक्षा के लिए गोद भी लिया है। उन्होंने कहा बच्चे का मुस्कान ही मेरा पुरस्कार है। शिवेंद्र ने इतिहास जैसे विषय में अधिकाधिक प्रोजेक्ट वर्क, खेल-खेल में शिक्षा इत्यादि पर जोर देते हैं। वे प्रतिमाह इतिहास प्रश्नोत्तरी स्पर्धा आयोजित करते हैं। बारहवीं व ग्यारहवीं के बच्चों के लिए ब्लू प्रिंट के आधार पर लिखित व मौखिक टेस्ट श्रृंखला से इस विषय के प्रति रूचि पैदा करते हैं। प्रत्येक शनिवार को बाल सभा रखते हैं। जिसमें बच्चे अपनी प्रतिभाओं को कहानी, कविता वाचन, चुटकुले, पहेली, प्रेरक प्रसंग, एक्टिंग, समूह गान के माध्यम से निखारते हैं। कॅरियर गाइडेंस व युवा संसद प्रतियोगिता के मास्टर ट्रेनर रह चुके हैं। साथ ही विद्यालय में पुस्तकालय का प्रभार संभालते हुए बच्चों को पुस्तक पढऩे प्रेरित करते हैं। क्विज प्रतियोगिता, चित्रकला व निबंध स्पर्धा से नवाचार करते रहते हैं। पूर्व छात्रों को वाट्सएप ग्रुप से छात्रों को कॅरियर मार्गदर्शन देते हैं।

सफल लेखक, खिलाड़ी व समाजसेवी शिक्षक संजय शिक्षकों के भी हैं रोल मॉडल
शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला भरदा में पदस्थ शिक्षक संजय मार्टिन को राज्य शासन ने उनके नवाचार के लिए सम्मानित किया है। सच कहा जाए तो मार्टिन एक शिक्षक के साथ ही बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं। एक कलाकार सा ह्दय उनके अंतश में बसता है। वे एक सफल लेखक, खिलाड़ी व समाजसेवी हैं। उनके द्वारा लिखित नाटक ठुठवा पेड़ ने तो राष्ट्रीय स्तर पर सराही गई थी। वे एक ऐसे शिक्षक हैं जो सदैव ऊर्जावान होकर अपना पूरा समय सिर्फ और सिर्फ शिक्षा की अलख जगाने लगा रहे हैं। आज की पीढ़ी के कई शिक्षक जो नवाचार के लिए जाने जाते हैं उनके रोल मॉडल संजय मार्टिन ही हैं।

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