scriptThe demand for watermelon in our place reaches to Mumbai and Kolkata | हमारे यहां की तरबूज की मांग मुंबई और कोलकाता तक | Patrika News

हमारे यहां की तरबूज की मांग मुंबई और कोलकाता तक

गर्मी शुरू होते ही तरबूज की मांग बढ़ जाती है। जिले के सबसे बड़े जलाशय तांदुला के डूबान खल्लारी, बोरिद, धोबनी में किसान लगभग 300 एकड़ की खाली जमीन पर तरबूज की खेती कर अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं।

बालोद

Published: March 26, 2022 10:44:17 pm

बालोद. patrika news गर्मी शुरू होते ही तरबूज (watermelon) की मांग बढ़ जाती है। जिले के सबसे बड़े जलाशय तांदुला (Tandula Reservoir) के डूबान खल्लारी, बोरिद, धोबनी में किसान लगभग 300 एकड़ की खाली जमीन पर तरबूज की खेती कर अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। इस उच्च क्वालिटी के तरबूज की मांग मुंबई, कोलकाता व रायपुर से लेकर पूरे छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) में हो रही है। इन गांव सहित आसपास के लगभग 250 ग्रामीणों को भी रोजगार मिल रहा है।जिले के लोकल किसान तरबूज की खेती कर रहे हैं। साथ ही कांकेर से भी किसान (farmer) यहां आकर तरबूज (watermelon) की खेती कर रहे हैं। उन्हें अच्छी आमदनी हो रही है। तरबूज की खेती कर रहे किसानो कि माने तो यह फसल 63 दिन की है। खेती करने में लगभग तीन माह का समय लग जाता है। बीज बोने के लगभग 63 दिन में फसल पक कर तैयार हो जाती है।
तांदुला के डूबान वाले गांव खल्लारी, बोरिद, धोबनी में 300 एकड़ में हो रही तरबूज की खेती, दूसरे राज्यों में भी मांग
तरबूज को ट्रक में लोडकर बाजार में भेजा जा रहा है।

48 एकड़ में ली फसल, रोज 50 मजदूर को रोजगार
ग्राम खलारी के तांदुला डूबान में किसान समीर विश्वास ने 48 एकड़ में तरबूज की खेती की है। तरबूज की खेती में मेहनत है। मौसम साथ दे तो मुनाफा है। मौसम खराब तो नुकसान भी है। उन्होंने बताया कि इस साल तरबूज के दाम बढे हैं। इस साल मुनाफा हो सकता है। इस गांव के 50 मजदूरों को रोज काम मिल रहा है।

इस बार फसल अच्छी है
तांदुला के डूबान में खल्लारी, धोबनी, बोरिद व गोंदली जलाशय की तराई में भी तरबूज की खेती हो रही है। जिले के लोगों को भी पता नहीं है किइन गांवों में भी तरबूज की खेती हो रही है। किसान अजीत कुमार ने बताया कि वर्तमान में मांग अच्छी है। अभी फसल ठीक है। फल भी अच्छा है। इस बार नुकसान नहीं होने की उम्मीद है।

पौधे की ग्रोथ तापमान पर निर्भर
तरबूज के पौधे की ग्रोथ तापमान पर निर्भर करती है। यदि तापमान 35 से 40 डिग्री के बीच है तो फसल 55-60 दिन में आ जाती है। वहीं 30-32 डिग्री तापमान में 70 दिन में पहली बार फल पूरी तरह तैयार हो जाता है। जितना ज्यादा तापमान रहता है, पौधा उतनी ही तेजी से ग्रोथ करता है। गर्मी के मौसम में तरबूज का पौधा सबसे तेजी से ग्रोथ करता है। साथ ही फल भी बड़ा और स्वादिष्ट होता है, लेकिन पानी ज्यादा लगता है। गर्मी में वहीं किसान लगा सकते हैं, जिनके पास पर्याप्त पानी है।

एक बार की लागत में दो फसलें
किसान के मुताबिक एक पौधे में चार बार फल निकलता है। इसके बाद फल आना बंद हो जाता है। इस तरह अगस्त में लगाई फसल दिसंबर में समाप्ति पर आ जाएगी। लगभग 15 दिसंबर तक इसी खेत में दूसरी बार तरबूज की फसल लगाएंगे। इससे लागत करीब 70 फीसदी कम आएगी। क्योंकि दोबारा पौधे लगाने पर सिर्फ मजदूरी और खाद-बीज का खर्च ही आता। दूसरी फसल भी मार्च तक आ जाएगी।

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