यह शिक्षक सात साल से मनोरोगियों की कर रहे नि:स्वार्थ भाव से सेवा

बालोद जिले के एक ऐसा शिक्षक जो बच्चों को पढ़ाई कराने के साथ नि:स्वार्थ भाव से दिव्यांग और मनोरोगी बच्चों की सेवा स्वयं के खर्च से कर रहे हैं। बीते सात साल से इस शिक्षक ने लाखों रुपए खर्च कर लगभग 100 से ज्यादा लोगों का इलाज करा चुके है। इनमें 7 बच्चे भी शामिल है। यह शिक्षक अन्य के लिए आदर्श बने हुए है।

By: Chandra Kishor Deshmukh

Published: 05 Sep 2019, 08:01 AM IST

बालोद @ patrika. जिले के एक ऐसा शिक्षक जो बच्चों को पढ़ाई कराने के साथ नि:स्वार्थ भाव से दिव्यांग और मनोरोगी बच्चों की सेवा स्वयं के खर्च से कर रहे हैं। बीते सात साल से इस शिक्षक ने लाखों रुपए खर्च कर लगभग 100 से ज्यादा लोगों का इलाज करा चुके है। इनमें 7 बच्चे भी शामिल है। यह शिक्षक अन्य के लिए आदर्श बने हुए है।

भरदा स्कूल में है प्राचार्य
जिले के डोंडीलोहारा विकासखंड के ग्राम भरदा शासकीय हाई स्कूल के प्राचार्य उमेशचन्द्र अग्रवाल गणित विषय की पढ़ाई के साथ-साथ नि:स्वार्थ भाव से मानसिक रोगियों की सेवा भी कर रहे हैं। वे अब तक 100 से अधिक लोगों का इलाज भी करा चुके हंै।

दिव्यांग को देख मन में आया सेवाभाव का ख्याल
प्राचार्य उमेशचंद्र अग्रवाल ने बताया कि 7 साल पहले वह एक मानसिक रोगी को देखा
उसका दिल पसीज गया। उसे देखकर सोचा कि क्यों न इनके लिए कुछ किया जाय। सेवाभाव में फिर ऐसे रमा कि जहां भी मानसिक रोगी दिखते है उनके पालकों से बात कर उनकी इलाज के लिए आगे आते हैं। उन्होंने बताया कि दुर्ग के वरिष्ठ मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. शैल वर्मा के यहां रोगियों का इलाज कराते हैं।

मनोरोगियों के लिए धर्मार्थ आश्रम बनाने की योजना
उन्होंने बताया कि मनोरोगियों को देखकर दिल पसीज जाता है और स्कूल व गांवों में जाकर ऐसे बच्चों व लोगों को चिंहित करते हैं। पालक अगर सहमति देते है तो उनका इलाज भी स्वयं के खर्च से करते हैं। मनोरोगियों की संख्या को देखते हुए (दिव्यांग, लावारिस, मनोरोगी बच्चों के लिए) धर्मार्थ आश्रम बनाने की उनकी योजना है।

अभियान भी चला रहे
वे ग्रामीण क्षेत्रों में अंधविश्वास, नशामुक्ति, मनोरोग के प्रति जागरूकता अभियान भी 2012 से चला रहे हैं। इसके अलावा मानव सेवा के साथ बच्चों को कला सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से बारीकी भी सिखाते है।

दुर्गेश नंदिनी यादव, प्राचार्य, शा.उ.मा.वि. दुधली ने अध्ययन-अध्यापन के लिए किया नवाचार
पर्यावरण संक्षरण के प्रति सजग होकर स्कूल कैंपस को पॉलीथिन मुक्त बनाया। पॉलीथिन के उपयोग को रोकने बच्चों को कपड़े के थैले बांटे ताकि पालक भी जागरूक हों। स्कूल में पौधरोपण के साथ ही योग की कार्यशाला के जरिए स्वास्थ्य जागरूकता। अध्ययन-अध्यापन के लिए नवाचार।

जिला मुख्यालय में शिक्षक दिवस पर नहीं होगा कोई आयोजन
IMAGE CREDIT: balod patrika

जिला मुख्यालय में शिक्षक दिवस पर नहीं होगा कोई आयोजन
बालोद @ patrika . जिला मुख्यालय में इस बार शिक्षक दिवस पर कोई आयोजन जिला शिक्षा विभाग द्वारा नहीं किया जा रहा है। इसका कारण ग्राम भ्रमण को बताया जा रहा है। शासन के निर्देशानुसार जिले के आला अधिकारी ग्राम भ्रमण में निकलेंगे। इस वजह से शिक्षा विभाग द्वारा 5 सितंबर को शिक्षक दिवस का आयोजन के बजाय माह के दूसरे सप्ताह में कराए जाने की बात सामने आ रही है।

दुर्ग में होगा सम्मान
जिले के 12 उत्कृष्ट शिक्षकों को संभाग स्तरीय शिक्षक पुरस्कार के लिए चयन किया गया है। इनका सम्मान दुर्ग में आयोजित होने वाले समारोह में किया जाएगा। बताया जाता है कि इस बार समायाभाव के चलते 5 सितंबर को शिक्षक दिवस का आयोजन नहीं होगा। आयोजन सितंबर माह के दूसरे सप्ताह में किया जाएगा।

शिक्षादूत शिक्षाश्री के लिए शिक्षकों की खोज
डीईओ आरएल ठाकुर ने बताया कि जिला स्तरीय शिक्षक सम्मान के लिए शिक्षाश्री व शिक्षादूत के लिए शिक्षकों की खोज चल रही है। शिक्षकों का चयन अंतिम चरण में है। जल्द ही शिक्षक सम्मान समारोह में इनका सम्मान किया जाएगा।

Chandra Kishor Deshmukh Bureau Incharge
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