अवैध बिक्री नहीं रोक सकते, तो गांव को बर्बाद करने खोल दें शराब दुकान

संभवत: प्रदेश का पहला पंचायत जो प्रशासन से मांगी शराब दुकान, नाराज पड़कीभाट के ग्रामीण प्रशासन से मांगा जवाब।

बालोद. अवैध शराब की बिक्री पर रोक नहीं लगा पाने व इस पर मौन प्रशासन व विभाग से ग्रामीण इतने नाराज हैं कि सरपंच के नेतृत्व में पत्र लिखकर प्रशासन को करारा जवाब दिया है। कहा है अगर गांव में हो रही अवैध शराब बिक्री को बंद नहीं करा सकते, तो गांव को बर्बाद करने के लिए गांव में ही शराब दुकान खोल दें। यह पीड़ा ग्राम पंचायत पड़कीभाट के सरपंच, ग्राम विकास समिति, महिला कमांडो व भारत माता वाहनी की है। यह प्रदेश का पहला मामला है जहां पंचायत व ग्रामीण अवैध शराब बिक्री पर कार्रवाई नहीं होने पर जिला प्रशासन से गांव में शराब दुकान खोलने की मांग की है।

गांव का माहौल बिगडऩे से हताश हो गए हम

जानकारी दी कि शराब बिक्री गांव में खुलेआम चल रही है। पंचायत ने शिकायत जिला प्रशासन व आबकारी विभाग से कई बार किए, पर कार्रवाई नहीं की जा सकी। इससे हताश सरपंच ने जिला जनदर्शन में कलक्टर को पंचायत पड़कीभाट में शराब दुकान संचालन करने की मांग कर डाली। सरपंच ने शासन-प्रशासन पर आरोप लगाया कि अवैध शराब बिक्री पर जिला प्रशासन द्वारा कोई अंकुश नहीं है जिससे गांव में तेजी से अवैध शराब बिक्री से माहौल खराब हो रहा है। सरपंच पुरूषोत्तम यादव ने कहा आखिर क्यों शासन-प्रशासन इन पर लगाम नहीं लगाते। इसलिए गांव में शराब दुकान खोलने की मांग किए हैं।

नशा मुक्त गांव चाहते हैं, पर जिम्मेदारों का साथ नहीं

जनदर्शन में सरपंच के अलावा ग्राम विकास समिति, भारत माता वाहनी, महिला कमांडो आई थीं, जो शराब बिक्री पर रोक लगाने की मांग कर रहे थे। कहा अगर प्रशासन मौन रहा तो गांव में शराब दुकान खोल दें ताकि गांव व गांव के बच्चे बर्बाद हो जाएं।

राज्य की तरह ग्राम सरकार को भी दे हक

इस दौरान सरपंच पुरुषोत्तम यादव, ग्राम विकास समिति अध्यक्ष रोहित कुरेशिया, महिला कमांडो अध्यक्ष सकुन यादव, भारत माता वाहनी अध्यक्ष शशिकला सहित दर्जनभर से अधिक ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से दुकान खोलने की मांग की है कि राज्य सरकार की तरह पंचायतों को भी शराब दुकान संचालन का अधिकार दिया जाए।

इसलिए खोलें शराब दुकान

शराब दुकान खोलने से शासन-प्रशासन की जनकल्याणकारी योजनाओं पर विपरीत असर पड़ेगा।
गांव की स्वछता पर बुरा असर पड़ेगा।
बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना निराधार साबित होगी।
महिला सशक्तिकरण व महिलाओं की भागीदारी पर बुरा प्रभाव पड़ेगा।
ग्राम पंचायत राजस्व वृद्धि करना व नियंत्रण नहीं होगा।
शासन-प्रशासन में निष्क्रियता व विषय की गंभीरता नहीं दिखेगी
सामाजिक समरसता व ग्राम विकास पर कुप्रभाव पड़ेगा।

Niraj Upadhyay Desk/Reporting
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