जिले के बेरोजगारों में रोजगार पाने की उम्मीद हो गई खत्म, नहीं लगेगा उद्योग

जिले के बेरोजगारों में रोजगार पाने की उम्मीद हो गई खत्म, नहीं लगेगा उद्योग

Chandra Kishor Deshmukh | Publish: Apr, 13 2019 08:12:12 AM (IST) Balod, Balod, Chhattisgarh, India

बालोद जिले के बेरोजगारों को अब यहां रोजगार की उम्मीद खत्म हो गई है, क्योंकि अब जिले में औद्योगिक क्षेत्र बनाने की योजना निरस्त कर दी गई है। दो साल से चल रही औद्योगिक क्षेत्र बनाने की योजना पर लगभग विराम लग गया है, क्योंकि राज्य शासन की टीम ने इस पर मुहर लगाते हुए कहा है कि यहां ऐसे क्षेत्र लिए जगह नहीं है।

बालोद @ patrika . जिले के बेरोजगारों को अब यहां रोजगार की उम्मीद खत्म हो गई है, क्योंकि अब जिले में औद्योगिक क्षेत्र बनाने की योजना निरस्त कर दी गई है। दो साल से चल रही औद्योगिक क्षेत्र बनाने की योजना पर लगभग विराम लग गया है, क्योंकि राज्य शासन की टीम ने इस पर मुहर लगाते हुए कहा है कि यहां ऐसे क्षेत्र लिए जगह नहीं है।

फूड पार्क बनाने राज्य शासन ने उद्योग विभाग को भेजा पत्र
ऐसे में अब उद्योग विभाग औद्योगिक क्षेत्र की ओर ध्यान न देकर, नई योजना के तहत फूड पार्क बनाने की ओर ध्यान केंद्रित किया है। विभाग का मानना है कि यह योजना सफल होगी और इसके माध्यम से यहां के बेरोजगारों को रोजगार मिलेगा। इस मामले में अब जिले के हर ब्लॉक में एक फूड पार्क बनाने राज्य शासन ने उद्योग विभाग को पत्र भेजा है। माना जा रहा है कि इस पार्क के लिए 20 से 25 एकड़ की जमीन का चयन कर राज्य सरकार ने जानकारी मांगी है। हालांकि विभाग ने जिले के दो गांवों का चयन कर भेजे हैं। साथ ही ग्रामीणों की राय भी ली गई है।

फूड पार्क के लिए कपरमेटा और कोटेरा का किया चयन
उद्योग विभाग के जीएम बीपी वासनिक ने बताया कि राज्य सरकार ने जिले के प्रत्येक ब्लॉकों में फूड पार्क बनाने जमीन मांगी थी। हमने इसके लिए ग्राम कोटेरा व कपरमेंटा की जमीन का चिन्हांकन कर राज्य सरकार को भेज दी है। पर वर्तमान में लोकसभा चुनाव के कारण आचार संहिता की वजह से अभी यह कार्य धीमी गति से चल रहा है। बताया जा रहा है कि जैसे ही आचार संहिता समाप्त होगी उसके बाद इससे संबंधित काम शुरू किया जाएगा।

जाने फूड पार्क को लेकर क्यों की जा रही तैयारी
विभाग से मिली जानकारी अनुसार फूड पार्क फलों का उद्योग है। इस पार्क में कई तरह के उद्योग लगाए जाएंगे। इसके तहत पापड़, बड़ी, जूस, केंडी, चिप्स सहित कई प्रकार के जेली जो फलों से बनाया जाता है। विभागीय जानकारी के मुताबिक वर्तमान में किसान सिर्फ धान पर ही ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। अब आगे किसानों को नगदी फसल पर भी जोर देने यह पहल की जा रही है, ताकि फसल चक्र से जमीन भी ठीक रहे और किसानों को नगद लाभ मिलता रहे।

आचार संहिता खत्म होते ही काम में आएगी तेजी
उद्योग विभाग के जीएम बीपी वासिनिक ने बताया इससे संबंधित उद्योगों में जिले के बेरोजगारों को रोजगार दिया जाएगा। साथ ही पहली प्राथमिकता उस गांवों की रहेगी जहां यह उद्योग खोले जाएंगे। अधिकारी ने कहा आचार संहिता के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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