त्रिपाल के सहारे करते हैं दाह संस्कार, शेड नहीं होने से बारिश में होती है परेशानी

त्रिपाल के सहारे करते हैं दाह संस्कार, शेड नहीं होने से बारिश में होती है परेशानी

Chandra Kishor Deshmukh | Publish: Aug, 13 2018 09:00:01 AM (IST) Balod, Chhattisgarh, India

गांव के मुक्तिधाम में शेड नहीं होने से किसी के निधन पर उनका शव जलाने में बड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में बारिश के दौरान त्रिपाल लेकर दाह संस्कार करने की मजबूरी है।

बालोद. गांव के मुक्तिधाम में शेड नहीं होने से किसी के निधन पर उनका शव जलाने में बड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में बारिश के दौरान त्रिपाल लेकर दाह संस्कार करने की मजबूरी है। यह मामला जिले के ग्राम नेवारीकला का है, जहां पंचायत होने के बाद भी गांव में शमशान शेड निर्माण करने पहल नहीं की है, ऐसे में नतीजा यह है कि आज ग्रामीण बारिश के बीच शव का संस्कार करने को मजबूर हैं।

आंधी में उड़ गए शेड, मरम्मत पर किसी का ध्यान नहीं
लगभग तीन हजार की जनसंख्या वाले इस ग्राम के श्मशान घाट में बने शेड आंधी में उड़ गए, उसके बाद तो इसकी मरम्मत पर किसी ने ध्यान ही नही दिया और अब हालत ऐसी हो गई है कि बारिश के दिनों में अगर किसी की मौत हो जाए तो उसके दाह संस्कार करने में मृत परिवार व ग्रामीणों को परेशानियों का सामान करना पड़ता है।

परिवार रहा परेशान
इसका ताजा उदाहरण रविवार को गांव में देखने को मिला, जब गांव के एक साहू परिवार में किसी की मौत हो गई। इस दौरान जोर की बारिश होने से उनके अंतिम संस्कार के लिए श्मशान घाट में शेड नहीं होने के कारण लोग हाथों में छाता लेकर बारिश से बचने का प्रयास किया। बताया जाता है यहां का शेड एक साल से उड़ गया है।

चार लोगों ने त्रिपाल उठाया तब दी मुखाग्नि
रविवार को सुबह से बारिश होने के कारण मृत शारीर का दाह संस्कार करने नदी किनारे लाया गया, तो वहां पहले चार लोगों ने बारिश से बचने त्रिपाल लगाया और फिर संस्कार के लिए मुखाग्नि दी। ग्रामीणों की मानें तो कई बार पंचायत को इसके बारे में अवगत कराया गया है।

पंचायत निधि से लगाएगे शेड
मामले में सरपंच प्रकाश सिंह नाहर ने बताया शासन द्वारा बनाया गया श्मशान शेड आंधी में उड़ गया और अब ग्राम पंचायत में अनुमोदन कराया गया है। जल्द ही ग्राम पंचायत की निधि से यहां के श्मशान घाट में शेड का निर्माण करने पर विचार कर रहे हैं।

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