सिर पर बस्ता और हाथ में जूता-चप्पल लेकर पहुंचते हैं स्कूल, बच्चों के लिए बनी मजबूरी

आजादी के 70 साल बीत जाने के बाद भी नौनिहालों को स्कूल तक डेढ़ किमी का सफर दलदल से भरा हुआ है, जिसे बच्चे पार कर रोज स्कूल आना-जाना करते हैं।

लवन. आजादी के 70 साल बीत जाने के बाद भी नौनिहालों को स्कूल तक डेढ़ किमी का सफर दलदल से भरा हुआ है, जिसे बच्चे पार कर रोज स्कूल आना-जाना करते हैं। लेकिन उससे भी ज्यादा तरस तब आता है जब बच्चे जहरीले जीव-जंतुओं से भय खाते हुए घर से स्कूल और स्कूल से घर आना-जाना करते हैं।

एक तरह शिक्षा के नाम पर राज्य और केंद्र की सरकार स्कूल चले हैं अभियान चलाकर करोड़ों रुपए फूंक रही है। वहीं दूसरी ओर बलौदाबाजार जनपद के ग्राम पंचायत करदा के प्राथमिक और मिडिल शाला के बच्चों को कीचड़ के सने रास्ते को पार कर स्कूल जाना पड़ता है। कीचड़ और गंदगी पार कर रोज स्कूल जाना बच्चों की मजबूरी बनी हुई है।
बांधा पहुंच मार्ग की दूरी महज 1.5 किलोमीटर है।

वह भी काफी दलदल से सना हुआ है। 100 नौनिहाल इसी कच्चे मार्ग से होकर रोजाना स्कूल पहुंचते हैं। बच्चों के ड्रेस, कापी-पुस्तकें तक कीचड़ में सने होते हैं। यहां रहने वाले बच्चों के अभिभावक कलेक्टर, विधायक और मंत्रियों तक गुहार लगा चुके हैं। लेकिन ग्रामीणों को आश्वासन के अलावा अब तक कुछ नहीं मिला।

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Bhawna Chaudhary
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