सात सालों से नहीं हुई शिक्षक की व्यवस्था, ग्रामीण कर रहे स्कूल का बहिष्कार

सात सालों से मांग पूरी नहीं हो पाने के बाद ग्रामीण जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली से बहुत अधिक नाराज हो गए है।

By: Deepak Sahu

Published: 24 Jul 2018, 05:57 PM IST

देवभोग. छत्तीसगढ़ के परेवापाली के ग्रामीण पिछले सात सालों से प्राथमिक शाला के लिए शिक्षक की मांग कर रहे थे। वहीं सात सालों से मांग पूरी नहीं हो पाने के बाद ग्रामीण जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली से बहुत अधिक नाराज हो गए है।

इसी के चलते ग्रामीणों ने सोमवार से शाला बहिष्कार का निर्णय ले लिया है। गांव के सरपंच शिवशंकर नायक के साथ ही ग्रामीणों का कहना है कि पिछले सात साल से जिम्मेदार अधिकारियों के साथ ही सुराज में भी शिक्षक के लिए आवेदन कर मांग की जा चुकी है, लेकिन आज तक शिक्षक की व्यवस्था नहीं की गई है। गांव के गुलाबचंद और कुर्तीराम का कहना है कि दिन ब दिन प्राथमिक शाला के बच्चों की शिक्षा का स्तर गिरता जा रहा है। स्थिति यह हो गई है कि दूसरी कक्षा के बच्चों को नाम लिखना तक नहीं आ रहा है। ऐसी स्थिति में बच्चों को स्कूल भेजने या नहीं भेजने से का क्या मतलब रह गया है।

गांव के सरपंच शिवशंकर नायक के साथ ही गुलाबचंद और कुर्तीराम ने कहा कि मामले में आवेदन कर शिक्षक व्यवस्था करने के लिए जिम्मेदारों के पास गुहार लगाया गया, लेकिन जिम्मेदारों ने आए दिन आवेदन को ठंडे बस्ते में डालना ही उचित समझा। उस पर कार्रवाई भी नहीं की।इसी के मद्देनजर अब परेवापाली के ग्रामीण बहुत अधिक नाराज हो गए हैं।

ग्रामीणों ने कहा कि पूरे गांव के 40 बच्चों के पालकों ने निर्णय लिया है, कि जब तक स्कूल के लिए शिक्षक की व्यवस्था नहीं की जाएगी। तब तक स्कूल का बहिष्कार किया जाएगा। परेवापाली के ग्रामीणों ने बताया कि पिछले चार साल से गांव के प्राथमिक शाला में शिक्षा का स्तर दिन ब दिन गिरता जा रहा है।

शिक्षा से महरूम हैं बच्चे
ग्रामीणों की माने तो पूरे पांच क्लास के 40 बच्चों को एक ही जगह पर बिठाकर एक ही शिक्षक रूपचंद्र नायक पढ़ा रहे हैं। ऐसी स्थिति में एक शिक्षक के ऊपर पांचों क्लास के बच्चों की जवाबदारी होती है। ऐसी स्थिति में बच्चों की पढ़ाई नहीं हो पा रही है। वहीं शिक्षक रूपचंद्र नायक का कहना है कि वे पांच क्लास की पढ़ाई एक साथ संपन्न कराते हैं। रूपचंद के मुताबिक पहली में 8, दूसरी में 10,तीसरी में 6, चौथीं में 6 और पांचवीं में 10 बच्चे हैं।

एक ही शिक्षकीय शाला होने के कारण सभी बच्चों को एक ही जगह पर बिठाकर पढ़ाया जाता है। रूपचंद्र ने बताया कि आज पालकों ने सभी बच्चों को स्कूल नहीं भेजा। शिक्षक के मुताबिक दिनभर स्कूल खुला रहा। लेकिन एक भी बच्चे स्कूल नहीं पहुंचे।

देवभोग के बीईओ, प्रदीप शर्मा ने बताया पालकों ने शिक्षक की मांग को लेकर आवेदन मुझे सौंपा था। वहीं जल्द ही वहां पर शिक्षक की व्यवस्था की जा रही है।

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