बृहस्पति अस्त होने से वैवाहिक के साथ इन शुभ कार्यक्रमों पर लगा विराम, अप्रैल से शुरू होंगे मांगलिक कार्य

- अप्रैल से शुरू होंगे मांगलिक कार्य
- 16 फरवरी से शुक्र ग्रह भी होगा अस्त

By: Ashish Gupta

Published: 22 Jan 2021, 08:08 AM IST

बलौदा बाजार. मकर संक्रांति के बाद 19 तारीख से देव गुरु बृहस्पति के अस्त (Jupiter sets) होने के बाद एक बार फिर से शहनाइयों की गूंज पर विराम लग गई है। मकर संक्रांति के बाद भले ही खरमास समाप्त हो चुके हैं, परंतु बृहस्पति का अस्त होना वैवाहिक कार्यक्रमों के लिए एक बड़ी रोक लग गया है। वर्तमान में पूस माह के कारण वैसे ही मांगलिक कार्य रुके हुए हैं, जो अब सीधे अप्रैल माह से ही प्रारंभ होंगे। गुरु के अस्त होने के बाद अब विवाह मुहूर्त सीधे तीन माह बाद अप्रैल माह में होंगे, जिसके लिए अभी से भवन, पंडित, हलवाई, टैंट, डीजे आदि की एडवांस बुकिंग होने लगी है।

ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार आने वाले तीन माह फिर से मांगलिक कार्यों के लिए वर्जित माने जा रहे हैं। इसका कारण वर्तमान में गुरु का अस्त होना माना जा रहा है। जानकारों के अनुसार मकर संक्रांति पर सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने के साथ ही वर्तमान का खरमाह समाप्त हो गया है, लेकिन 19 जनवरी से देव गुरु बृहस्पति के अस्त होने पर मांगलिक कार्यों पर फिर से विराम लग गया है।

29 जनवरी से माघ माह प्रारंभ होगा, जिसे हिंदू धर्म में बेहद शुभ माह माना जाता है। परंतु, बृहस्पति के अस्त होने की वजह से मांगलिक कार्य नहीं होंगे। जानकारों के अनुसार इस दौरान सिर्फ विवाह, सगाई, नए घर का गृह प्रवेश आदि को छोड़कर खरीदी बिक्री, नामकरण जैसे कार्यों को किया जा सकता है। देव गुरु बृहस्पति के बाद 16 फरवरी से शुक्र ग्रह भी अस्त होंगे। इस दौरान आवश्यक होने पर 16 फरवरी बसंत पंचमी के दिन विवाह तथा अन्य मांगलिक कार्यों को किया जा सकता है।

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विवाह में दोनों ग्रहों का उदय रहना आवश्यक
जानकारों के अनुसार शुक्र ग्रह भोग-विलास का नैसर्गिककारक होने के कारण दाम्पत्य सुख का प्रतिनिधि होता है। वहीं गुरु कन्या के लिए प्रतिकारक होता है। इन दोनों ग्रहों का अस्त होना दाम्पत्य के लिए हानिकारक माना गया है। विवाह मुहूर्त निकालते समय यदि गुरु व शुक्र अस्त प्रारूप में हों तो विवाह नहीं करना चाहिए। गुरु व शुक्र के उदित प्रारूप होने पर ही विवाह करना शास्त्र सम्मत है।

गुरु तथा शुक्र विवाह के कारक ग्रह हैं। जिनका विवाह के समय उदय रहना बेहद आवश्यक है। परंतु, 19 जनवरी से देव गुरु बृहस्पति अस्त हो चुके हैं, जो अब 12 फरवरी को उदय होंगे। परंतु 16 फरवरी से शुक्र ग्रह भी अस्त होंगे, जिसकी वजह से इस अवधि में विवाह जैसे मांगलिक कार्यों को नहीं किया जाना चाहिए।

अति आवश्यक मांगलिक कार्यों को 16 फरवरी बसंत पंचमी के अबूझ मुहूर्त के दिन किया जा सकता है। गुरु तथा शुक्र अस्त होने की वजह से गृहप्रवेश, नींव पूजन, भूमिपूजन, नवीन प्रतिष्ठान का शुभारंभ, नवीन प्रति की प्राण प्रतिष्ठा, सगाई, विवाह नहीं किया जाना चाहिए। परंतु, बच्चे के जन्म के बाद के सूतक आदि संस्कार, नामकरण, पूजन, हवन, कथा वाचन, भूमि, भवन, वाहन की खरीदारी पर इसका असर नहीं पड़ता है। परंतु, मांगलिक कार्यों के लिए अप्रैल तक रुकना ही श्रेयस्कर होगा। क्योंकि, गुरु-शुक्र अस्त के बाद 14 मार्च से 13 अप्रैल तक फिर खरमास तथा 22 मार्च से 28 मार्च तक होलाष्टक रहेगा।

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अप्रैल में अब विवाह मुहूर्त
नगर के सिविल लाइन निवासी पंडित पृथ्वीपाल द्विवेदी ने बताया कि गुरु तथा शुक्र अस्त होने की वजह से अब विवाह के मुहूर्त सीधे अप्रैल में ही है। 25 अप्रैल को पहला विवाह मुहूर्त है। इसके बाद 26 अप्रैल, 27 अप्रैल तथा अन्य मुहूर्त भी हैं।

कैसे उदय तथा अस्त माना जाता है
ज्योतिषीय गणना के अनुसार बृहस्पति जब सूर्य के आगे अथवा पीछे 11 डिग्री पर होता है तो अस्त माना जाता है। वहीं, जब शुक्र सूर्य के अधिक करीब होता है तो वह अस्त हो जाता है। 16 फरवरी से शुक्र सूर्य से पहले एक राशि पर दो राशि पीछे चलने की वजह से अस्त रहेंगे। इस अवधि में शुक्र की सूर्य से दूरी 9 या 10 डिग्री से भी कम पर रहेगी।

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