मदर्स डे: दो बेटों के दर्द को भुला पाती मां की उससे पहले हो गई ये अनहोनी, तीसरा बेटा भी...

मदर्स डे: दो बेटों के दर्द को भुला पाती मां की उससे पहले हो गई ये अनहोनी, तीसरा बेटा भी...

Bhawna Chaudhary | Publish: May, 12 2019 04:42:15 PM (IST) | Updated: May, 12 2019 04:50:49 PM (IST) Baloda Bazar, Baloda Bazar, Chhattisgarh, India

मदर्स डे से पहले दर्दनाक हादसे में एक मां से उसका बेटा छीन गया। पहले भी उसके दो बेटों की मौत हो चुकी है। बेटे के दर्द को भुला भी नहीं पाई थी की ये दर्दनाक हादसा (Accident) हो गया और...

तिल्दा नेवरा. छत्तीसगढ़ में मदर्स डे से पहले दर्दनाक हादसे में एक मां से उसका बेटा छीन गया। पहले भी उसके दो बेटों की मौत हो चुकी है (Accident) । बेटे के दर्द को भुला भी नहीं पाई थी की ये दर्दनाक हादसा हो गया और..

तिल्दा रेलवे स्टेशन में शनिवार को एक दर्दनाक हादसा हो गया। रायपुर नौकरी करने जा रहे 19 वर्षीय युवक प्रकाश थावरानी का हसदेव एक्सप्रेस में चढ़ते समय पैर फिसल गया और वह सीधा ट्रेन के नीचे चला गया और उसकी मौके पर ही मौत हो गई। मिली जानकारी के अनुसार प्रकाश थावरानी रायपुर के एक दुकान में नौकरी करता था। रोज की तरह शनिवार को भी वह काम करने घर से रायपुर जाने को निकला था। जब वह स्टेशन पहुंचा तो हसदेव रायपुर एक्सप्रेस प्लेटफार्म नंबर 2 पर खड़ी थी। वह दौडक़र ट्रेन के पास पहुंचा।

ट्रेन में चढ़ते ही ट्रेन भी चल पड़ी। इसी बीच प्रकाश का हाथ फिसल गया और वह ट्रेन से नीचे गिर गया। नीचे गिरते ही उसका आधा शरीर पटरी के अंदर चला गया और ट्रेन के पहिए उनके शरीर के ऊपर से पार हो गए। उसकी मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। दो साल पहले उसके भाई की मौत हो गई थी। बेटे के दर्द को उसकी मां भुला भी नहीं पाई थी कि शनिवार को उसके एक और बेटे की मौत हो गई।

ट्रेनों को एक नंबर प्लेटफार्म पर लाने की मांग
शनिवार को हुए दर्दनाक हादसे के बाद एक बार फिर से यात्री ट्रेनों को एक नंबर प्लेटफार्म पर लाए जाने की मांग ने जोर पकड़ लिया है। तिल्दा रेलवे स्टेशन पर एक नंबर प्लेटफार्म खाली होने के बाद भी यात्री ट्रेनों को दो नंबर प्लेटफार्म पर लाया जाता है। लोगों को दो नंबर प्लेटफर्म पर जाने पर काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। यदि ट्रेन प्लेट फार्म पर आ जाती है तो स्टेशन पर बनी पुल पर यात्रियों की भीड़ इतनी होती है कि एक तरफ से दूसरी तरफ जाना मुश्किल हो जाता है।

दरअसल फुल की चौड़ाई काफी कम है। खासकर सुबह ट्रेनों में नौकरी पेशेवर यात्री ज्यादा सफर करते हैं। और वे निर्धारित समय पर ही स्टेशन पहुंचते हैं। लेकिन ट्रेन दो नंबर प्लेटफार्म होने कारण वे जब तक पुल से चढक़र प्लेटफार्म तक पहुंचते हैं तब तक ट्रेन चल पड़ती है और कभी कभी यात्री दौडक़र चढ़ते हैं, क्योंकि उन्हें समय पर पहुंचना होता है।

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