बिजली विभाग की लापरवाही, करंट की चपेट में आने से भालू की हुई मौत

विद्युत विभाग के अधिकारी कर्मचारियों की लापरवाही से छाता पहाड़ के पास करंट की चपेट में आने से वयस्क मादा भालू की मौत हो गई।

By: Bhawna Chaudhary

Published: 03 Sep 2020, 10:00 PM IST

कसडोल. विद्युत विभाग के अधिकारी कर्मचारियों की लापरवाही से छाता पहाड़ के पास करंट की चपेट में आने से वयस्क मादा भालू की मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही वन परिक्षेत्र अधिकारी डीआर वर्मा स्टॉफ के साथ मौके पर पहुंचकर भालू को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कराया और पोस्टमार्टम के बाद एसडीओ वन के समक्ष शव का निरस्त्रीकरण किया गया।

मामले में विद्युत विभाग के अधिकारी कर्मचारियों के खिलाफ वन संरक्षण अधिनियम 1972 एवं वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम 1980 के विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई की जा रही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार कसडोल उप वनमण्डल के अर्जुनी परिक्षेत्र के अंतर्गत आरक्षित वन कक्ष क्र 377 छाता पहाड़ के पास विद्युत तार के ऊपर पेड़ की डंगाल टूटकर गिर जाने के कारण तार जमीन पर आ गया था। इस बात की जानकारी होते ही वन विभाग के मैदानी कर्मचारियों ने अपने उच्चअधिकारियों को दी एवं उनके निर्देशानुसार जानमाल की क्षति की आशंका से गिरौदपुरी विद्युत वितरण उपकेन्द्र के कनिष्ठ यंत्री गिरधर कुमार को तार टूटने की जानकारी आज से चार दिन पहले फोन पर दी।

सूचना देने के दो दिन बाद याने 30 अगस्त के शाम के समय विद्युत विभाग के कर्मचारी राजेश धीरहि, रमेश कश्यप, महंगू दास भार्गव, तरुण कुमार कुर्रे आए थे और क्या किया या नहीं किसी को नहीं मालूम। आज तड़के जंगल लकड़ी बीनने जाने वाले लोगों ने करंट की चपेट में आने से भालू के मरने की सूचना वन विभाग के स्थानीय कर्मचारियों को ग्रामीणों ने दी। ग्रामीणों की सूचना पर वन विभाग का अमला घटनास्थल पर गए और देखा तो एक भालू मृत पड़ा हुआ है और बिजली तार से उस समय भी करंट प्रवाहित हो रहा था।

घटना की सूचना मिलते ही रेंजर टीआर वर्मा तुरंत मौके पर पहुंचे। वनकर्मियों ने घटना की सूचना फोन पर कनिष्ठ यंत्री गिरौदपुरी गिरधर कुमार को सुबह 9 बजे दी थी, लेकिन मात्र 4 किमी की दूरी पर स्थित विद्युत वितरण उप केन्द्र से विद्युत विभाग के कर्मचारी दोपहर 12 बजे तक याने 3 घंटे के इंतजार के बाद भी नहीं पहुंचे तो रेन्जर टीआर वर्मा ने वन विभाग के विद्युत के जानकार कर्मचारियों से पहले चालू विद्युत प्रवाह को बंद कराया और पंचनामा के बाद मृत भालू के पोस्टमार्टम कराया। पोस्टमार्टम करने वाले पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. योगेश साहू ने बताया कि मृत भालू वयस्क मादा थी, उसके दाहिने आंख के ऊपर, दाहीने पीछे पैर में जलने के निशान हैं और विद्युत का तार उसके मुंह में दांतों के बीच फंसा स हुआ था.

जो कि बहुत प्रयास के बाद भी नहीं निकल पाया। इसलिए मुंह के दोनों ओर 1-1 मीटर लंबाई तक तार को काटना पड़ा। एसडीओ, वन यूएस ठाकुर के समक्ष पोस्टमार्टम के बाद भालू के शव को जलाकर निरस्त्रीकरण किया गया। इस संबंध में एसडीओ यूएस ठाकुर ने बताया कि घटना में विद्युत विभाग के अधिकारी कर्मचारियों की घोर लापरवाही है। क्योंकि विद्युत तार टूटने की जानकारी हमारे कर्मचारियों द्वारा फोन से कनिष्ठ यंत्री को 28 अगस्त को ही जानमाल की क्षति की आशंका से सूचना देदी थी।

फिर भी उनके द्वारा विद्युत प्रवाह विच्छेद नहीं किया गया, जिसके कारण आज भालू की मौत हो गई। इस मामले विद्युत विभाग के डी टी आर धीवर, एई वासुदेव साहू जेई गिरधर कुमार, सहायक राजेश धीरहि, रमेश कश्यप, महंगू दास भार्गव, तरुण कुर्रे के खिलाफ वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम 1972 की धारा 9505152 वन संरक्षण अधिनियम 1980 की धारा 2 एवं 3 के तहत कार्रवाई की गई है। इस मामले में वन परिक्षेत्र सहायक रामकुमार विश्वकर्मा, वन रक्षक राजेश्वर वर्मा, सुनीता पैकरा, चनद्रभुवन मनहर तृत्ति जायसवाल, सोहन यादव, नरोत्तम पैकरा की अहम भूमिका रही।

Bhawna Chaudhary
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