बलोदा बाज़ार

ये कौन आ गया जंगल में जिसे देखने उमड़ा पूरा शहर, सब बोल रहे – पहले हम देखेंगे…

Tiger in Chhattisgarh: बारनवापारा के जंगलों में अरसे बाद इसी साल मार्च के महीने में पहली बार टाइगर देखा गया। यह खुशखबरी वन अमले के लिए अब चिंता का कारण बन गई है। दरअसल, बाघ देखने को लेकर लोग भी काफी उत्साहित हैं।

बलोदा बाज़ारApr 12, 2024 / 09:36 am

Shrishti Singh

Tiger Alert in CG: बारनवापारा के जंगलों में टाइगर 30 साल बाद लौटा है। जबसे ये बात फैली है, गाड़ी भर-भरकर लोग जंगलों की ओर जा रहे हैं। शिकारी भी सक्रिय हो गए हैं। इसके दो नतीजे सामने आ सकते हैं। भीड़ देखकर या तो बाघ लोगों पर हमले करेगा, या फिर शिकारी उसका शिकार कर देंगे। ऐसा कुछ न हो, जिला प्रशासन ने इसीलिए अभ्यारण्य के सात गांवों में धारा 144 लागू करते हुए यहां दूसरी जगहों से आने वाले लोगों की इंट्री पर बैन लगा दिया है।
बारनवापारा के जंगलों में अरसे बाद इसी साल मार्च के महीने में पहली बार टाइगर देखा गया। यह खुशखबरी वन अमले के लिए अब चिंता का कारण बन गई है। दरअसल, बाघ देखने को लेकर लोग भी काफी उत्साहित हैं। यही वजह है कि मार्च के महीने से ही ये ट्रेंड चल पड़ा है कि लोग छुट्टियों के दिन में बाघ देखने के लिए गांवों और जंगलों की ओर निकल जा रहे हैं। प्रदेश के दूसरे शहरों से भी लोगों के यहां आने की खबरे मिल रहीं हैं।
स्वतंत्र विचरण करने वाले बाघ का गलती से भी लोगों से आमना-सामना हुआ तो अनहोनी हो सकती है। कई बार तो भीड़ जानवर पर ही हमला कर देती है। ऐसी कोई भी परिस्थिति न बने इसलिए कलेक्टर एलके चौहान ने बुधवार को आदेश जारी करते हुए 7 गांवों रवान, मोहदा, कौहाबाहरा, मुरूमडीह, छतालडबरा, गजराडीह और दलदली में वन विभाग की अनुमति के बिना बाहरी लोगों के प्रवेश पर पाबंदी लगा दी है। इस अवधि में गांवों में लाउड स्पीकर (Loud speaker) के इस्तेमाल पर भी पूरी तरह से प्रतिबंध रहेगा।
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बारनवापारा में मार्च महीने में पहली बार बाघ दिखने की सूचना शिक्षक काशीराम पटेल ने 7 मार्च को वन विभाग को दी थी। उन्होंने सिरपुर रोड में बाघ को घूमते देखा था। इसका वीडियो बनाकर विभाग को भेजा भी था। इसके बाद से वन अमला लगातार बाघ को ट्रैक करते हुए उसकी सुरक्षा के इंतजामों में लगा हुआ है। वन विभाग के अनुमति बिना ग्रामीणों के जंगल जाने पर रोक लगाई गई थी। इसके बाद ग्रामीणों ने दूसरी बार 8 मार्च को बाघ देखने की सूचना दी। इस पर तत्काल वन विभाग ने टीम गठित कर कार्रवाई की। इस दौरान बाघ ने अमलोर सुकुलबाय में मवेशियों का शिकार किया। 12 मार्च को बाघ के पंजे के निशान मिले। वहीं 14 मार्च को बलौदाबाजार फॉरेस्ट रेंज के बल्दाकछार परिक्षेत्र में वन कर्मचारी ने भी बाघ दिखने की पुष्टि की थी।

बाघ लोगों पर हमला कर देगा या भीड़ बाघ को मार डालेगी, वन विभाग की यह इकलौती चिंता नहीं है। विभाग के लिए इससे भी बड़ी चिंता की बात हैं शिकारी, जो बाघ दिखने के बाद से ही इलाके में सक्रिय हैं। 24 मार्च को वन अमले ने ऐसे ही एक शिकारी को पकड़ा था। वह अपने साथ 5 कुत्ते लेकर शिकार पर निकला था। उसके पास से 5 गोला बम बरामद हुए थे। गनीमत कि शिकारी ट्रैप कैमरों में कैद हो गया और पकड़ा गया।

बलौदाबाजार में बाघ की सुरक्षा क्यों जरूरी है, इसके लिए गरियाबंद जिले के मैनपुर में मंगलवार को हुई एक घटना का ही उदाहरण ले लीजिए। यहां उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व के बफर जोन इंदागांव (धुरवागुड़ी) में एक मादा भालू का शिकार हो गया। शिकारियों ने उसे मारने के लिए पोटाश बम का इस्तेमाल किया था। कहने का मतलब शिकारी अब इतने हाइटेक हैं कि जानवरों का शिकार करने के लिए बम का इस्तेमाल करने से भी नहीं चूक रहे। बलौदाबाजार में पकड़े गए शिकारी के पास से भी 5 बम मिले थे। यानी इस इलाके में भी शिकार का यही पैटर्न है। उधर, उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर वरूण जैन का कहना है कि भालू का शिकारियों की तलाश के लिए डॉग स्क्वॉड बुलाई गई है।
वन्य जीव प्रेमी नितिन सिंघवी का कहना है कि वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत बाघ शेड्यूल-1 प्राणी है। इसकी सुरक्षा राष्ट्रीय मसला है। यही वजह है कि जनवरी 2013 में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण ने स्टैंडर्ड ऑपरेटिग प्रोसिजर (एसओपी) जारी किया। इसके तहत टाइगर अगर रहवासी इलाकों के करीब आता है तो वहां धारा 144 लागू की जानी है। मानव और बाघ का द्वंद रोकने के लिए ही एसओपी जारी किया गया है। बारनवापारा के 7 गांवों में भी इसी के तहत धारा 144 लागू हुई।
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