हैवानियत की हद: नवजात के मुंह में रूई और कान में बालू भरकर मरने फेंका, महिलाओं ने झोले में देखा तो फटी रह गईं आंखें

Hastiness: रामानुजगंज क्षेत्र से ममता को शर्मसार (Ashamed of Mamta) करने वाली तस्वीर आई सामने, लकड़ी काटने गई महिलाओं की पड़ी नजर तो बची जान, जाको राखे साइयां मार सके ना कोय वाली कहावत हुई चरितार्थ

By: rampravesh vishwakarma

Published: 15 Oct 2020, 09:17 PM IST

रामानुजगंज. मारना और जिंदा रखना सब ऊपर वाले की मर्जी से होता है। ऐसी ही एक कहावत ‘जाको राखे साइयां मार सके ना कोय’ रामानुजगंज क्षेत्र में चरितार्थ हुई। 1 दिन की नवजात (Newborn) बालिका के मुंह में रूई तथा कान में बालू भरकर दरिंदों ने झोले में फेंक दिया।

वहां लकड़ी काटने गई महिलाओं की नजर पड़ी तो देखकर उनकी आंखें फटी की फटी रह गईं। महिलाएं उसे लेकर नगर में पहुंचीं और जनप्रतिनिधियों की मदद से बच्ची को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (Hospital) लाया गया, यहां स्टाफ नर्सों ने जांच कर नवजात को स्वस्थ बताया। ममता को शर्मसार करने वाली इस घटना से क्षेत्र में लोगों में आक्रोश है।

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रामानुजगंज के वार्ड क्रमांक 3 निवासी सरिता देवी गुरुवार की दोपहर 12 बजे लकड़ी लेने पलटन घाट (Paltan Ghat) के जंगल में गई थी। शाम करीब 4 बजे वह बांधने की तैयारी कर रही थी, इसी दौरान उसकी नजर एक झोले पर पड़ी, जो हिल रहा था।

यह देखकर वह डर गई। इस बीच उसके साथ में गई राजमती ने हिम्मत करके झोला को देखा तो दोनों की आंखें फटी रह गईं। झोला में बच्ची का मुंह बांधकर छोड़ दिया गया था।

जैसे ही बच्ची का मुंह खोला गया वह रोने लगी। इसके बाद तत्काल दोनों लकड़ी छोड़ उसे घर ले आए एवं इसकी सूचना नगर पंचायत अध्यक्ष रमन अग्रवाल, पार्षद विजय रावत, अनूप कश्यप एवं राधेश्याम गुप्ता को दी।

देर शाम बच्ची को रामानुजगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया जहां पर स्टाफ नर्स शिल्पी कटिहार एवं दीपा दास के द्वारा बच्ची का स्वास्थ्य परीक्षण (Health checkup) किया गया। उन्होंने बच्ची को स्वस्थ बताया, उसका वजन 2 किलो 310 ग्राम है।

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कान में भरा था बालू, मुंह में डाली गई थी रुई
1 दिन की बच्ची पर हैवानियत (Hastiness) की बात से समझा जा सकता है कि बच्ची को मारने के उद्देश्य मुंह तो बांध ही दिया गया था वहीं मुंह में रूई भी डाली गई थी। वही दोनों कानों में बालू भी भरे हुए थे, परंतु ऊपरवाले को कुछ और मंजूर था।


उमड़ पड़ी महिलाओं की ममता
दिन भर मेहनत करके सरिता एवं राजमति ने लकड़ी काटा था जिसे घर लाने की तैयारी थी परंतु जब मासूम बच्ची को देखा तो दोनों की ममता उमड़ पड़ी। लकड़ी को वहीं छोड़ तत्काल बच्ची की सेवा में लग गए। बच्ची को घर लाया उसकी सफाई की एवं दूध पिलाया।

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rampravesh vishwakarma Desk
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