एनीकट से फिसलकर नदी में बहे किशोर का 50 घंटे बाद मिला शव, पसर गया मातम

Incident: झारखंड के एक ग्रामीण की सूचना पर नगर सेना, एसडीआरएफ की टीम ने नदी से निकाला शव

By: rampravesh vishwakarma

Published: 27 Jul 2020, 08:16 PM IST

रामानुजगंज. नगर के वार्ड क्रमांक-10 निवासी गोविंदा गुप्ता पिता स्वर्गीय विनोद गुप्ता 16 वर्ष शनिवार की दोपहर एनीकट से फिसलने के बाद बह गया था। इसका शव आज 50 घंटे बाद शाम 4 बजे नगर सेना, एसडीआरएफ एवं एक ग्रामीण की मदद से निकाला जा सका। शव देखकर परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया।


सूरजपुर जिले के बिश्रामपुर कार्मेल स्कूल में कक्षा सातवीं में पढऩे वाले नगर के वार्ड क्रमांक-10 निवासी गोविंदा गुप्ता शनिवार की दोपहर एनीकट से रामानुजगंज आ रहा था इसी दौरान अचानक पानी का बहाव तेज हुआ जिससे उसका पैर फिसल गया और वह बह गया। इसके बाद से लगातार उसकी खोजबीन की जा रही थी।

इस बीच पुलिस अधीक्षक रामकृष्ण साहू के निर्देश पर सोमवार को नगर सेना के गोताखोरों के साथ अंबिकापुर एसडीआरएफ की टीम भी बुलाई गई थी जिनकी संयुक्त मेहनत एवं गोविंदा के परिजनों द्वारा भी लगातार खोजबीन की जा रही थी।

इस बीच पलटन घाट के समीप झारखंड के ग्राम बरमुडा के श्रमिक कुलदीप सिंह ने सांसद प्रतिनिधि पवन गुप्ता को सूचना दी कि झारखंड की ओर पत्थर में एक शव फंसा हुआ है।

इस पर तत्काल एसडीओपी नितेश गौतम, थाना प्रभारी सुरेंद्र श्रीवास्तव, सब इंस्पेक्टर मनोज सिंह, आरक्षक अंकित पांडे, विनोद यादव, अनिल यादव मौके पर पहुंचे। फिर कुलदीप सिंह के साथ नगर सेवा सेना एवं एसडीआरएफ की टीम के संयुक्त प्रयास से शव को निकाला जा सका।

सांसद प्रतिनिधि पवन गुप्ता ने रमदद करने एवं सूचना देने के लिए श्रमिक कुलदीप सिंह को 2100 रुपए की नगद राशि दी। गोविंदा का शव मिलते ही परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। वहीं नगर में भी शोक की लहर है।


उफनती नदी में उतरे जवान
गोविंदा का शव पलटन घाट के समीप झारखंड की ओर पत्थर में फंसा हुआ था जिसे झारखंड के मजदूरों ने देखकर सूचना दी थी। यहां से शव को लाना बहुत बड़ी चुनौती थी क्योंकि नदी की धार काफी तेज थी। इस बीच नगर सेना के लांस नायक सजंय पटेल एवं एसडीआरएफ के शीशमल के नेतृत्व में जवानों द्वारा उफनती नदी से गोविंदा के शव को निकाला गया।


डाउनस्ट्रीम फ्लोर का फर्श अब तक नहीं बना
कन्हर एनीकट को आज तक पूर्ण नहीं किया जा सका है। वहीं एनीकट के डाउन स्ट्रीम का फर्श नहीं बना है। डाउनस्ट्रीम फ्लोर की दीवार भी टूट गई है। यदि डाउनस्ट्रीम फ्लोर का फर्श बना रहता तो शायद गोविंदा बच सकता था क्योंकि उसे तैरना आता था।

यदि डाउनस्ट्रीम फ्लोर का फर्श बना रहता तो उसे संभलने का पूरा मौका मिल जाता। लेकिन डाउनस्ट्रीम फ्लोर में छड़ निकले हुए हैं एवं कई जगह पत्थर हैं। साथ में गड्ढा भी है जिस कारण वह संभल नहीं पाया होगा।

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rampravesh vishwakarma Desk
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