सचिवों के खिलाफ सीईओ ने दिए थे जांच के आदेश, 10 दिन बीते, जांच टीम संदेह के घेरे में

Investigation against Secretaries: 10 दिन बाद भी नहीं शुरु हो पाई जांच (Investigation), दस दिनों के भीतर धंधापुर व छह दिन में तत्कालीन बदौली के सचिव के खिलाफ मिली शिकायत (Complaint) की करनी थी जांच

By: rampravesh vishwakarma

Published: 18 Jul 2021, 10:20 PM IST

राजपुर. बलरामपुर जिला पंचायत सीईओ (Jila Panchayat CEO) द्वारा राजपुर के धंधापुर व बदौली पंचायत में लाखों की गड़बड़ी के मामले में की गई शिकायत पर जांच कर 10 दिनों में रिपोर्ट तलब किया था। लेकिन अब तक जांच दल के अफसर गांव ही नहीं पहुंचे हैं।

इस बात की आशंका है कि जांच के नाम पर अफसरों ने खानापूर्ति की है और वे भी दोषी सचिव को बचाने में लग गए हैं। ऐसा इसलिए भी क्योंकि सचिवों ने अफसरों के शह में ही गड़बड़ी की है।

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धंधापुर पंचायत में 7 साल से प्रभारी सचिव नरेंद्र जायसवाल व बदोली के तत्कालीन सचिव दीपक गुप्ता के खिलाफ जांच के आदेश हुए थे।

धंधापुर के ग्रामीणों ने उप सरपंच के साथ शिकायत की थी और कई गंभीर आरोप लगाए थे जिस पर 4 माह पहले कलक्टर ने जांच के आदेश दिए थे जिसके बाद राजनीतिक दबाव के कारण जांच नहीं हुई तो जुलाई में एक दूसरा जांच आदेश हुआ लेकिन उसके बाद गांव में जाकर अफसरों ने जांच ही नहीं की है।

जबकि इन सचिवों के खिलाफ पहले भी कई शिकायत हुई लेकिन इसके बाद भी कार्यवाही नहीं हुई। धंधापुर के प्रभारी सचिव (Panchayat Secretaries) नरेंद्र जायसवाल को 2 साल पहले कलक्टर ने सस्पेंड किया था लेकिन उस जांच रिपोर्ट में खानापूर्ति कर दी गई और फिर से धंधापुर पंचायत का प्रभार जिला पंचायत के जिम्मेदारों ने तब दिया जबकि धंधापुर पंचायत में एक दूसरे सचिव की पदस्थापना है।

वहीं दूसरी तरफ बदौली में पदस्थ रहे सचिव को शिकायत के बाद वहां से पहले से ही हटाया जा चुका है लेकिन उस पर लगे आर्थिक अनियमितता की जांच नहीं हुई है।

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अपने परिजनों के नाम पर बना रखा है फर्म
राजपुर जनपद के ग्राम पंचायतों में कुछ पंचायत सचिव अपने परिजनों के फर्म के नाम पर निर्माण कार्यों में बाजार भाव से अधिक रेट पर निर्माण सामग्रियों की सप्लाई करते हैं और कर्मचारियों से लेकर अफसरों तक को इसके एवज में उनका हिस्सा देते हैं।

यही वजह है कि जब ऐसे सचिवों पर आरोप लगते हैं तो जांच के लिए अफसरों की हिम्मत नहीं होती है। उक्त मामले में जांच की जिम्मेदारी एसडीओ आरईएस अवधेश प्रजापति, पंचायत निरीक्षक फुलमोहन राम, सहायक विकास अधिकारी प्रदीप मानकर, वरिष्ठ अंकेक्षण लेखा परीक्षण करा रोपण अधिकारी लवंग साय भगत को दी गई है।


गांव-गांव पहुंच रहे विधायक ताकि सरकार के पक्ष में बना रहे माहौल
निर्वाचित जनप्रतिनिधियों पर ऐसे सचिवों को संरक्षण देने का आरोप राजनैतिक हलकों में सुनाई दे रहा है जिसके कारण अफसर जांच या कार्यवाही से अपना हाथ खींच लेते हैं।

लेकिन इसका नकरात्मक असर जनता के बीच में जा रहा है क्योंकि बेहतर माहौल और लोगों के बीच सरकार के पक्ष में सकारात्मक माहौल के लिए विधायक से लेकर अन्य जनप्रतिनिधि गांव गांव का दौरा कर रहे हैं और उनकी समस्या सुन रहे हैं। ऐसे में उन्हें इन मामलों पर कार्यवाही के लिए अफसरों को निर्देशित करना चाहिए।


अभी नहीं मिला है आदेश
आदेश अब तक अप्राप्त होने के कारण शिकायत जांच शुरू नही हो पाई है। जैसे ही आदेश प्राप्त होगा, टीम के साथ जाकर शिकायत जांच की कार्यवाही की जाएगी।
अवधेश प्रजापति, एसडीओ, आरईएस

rampravesh vishwakarma Desk
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