छत्तीसगढ़ के इन 2 समितियों में बारदाने की कमी के कारण बंद हुई धान खरीदी, किसान चिंतित

Paddy purchase closed: जिले के अधिकांश सहकारी समितियों में बारदाने (Gunny bags) की कमी, बुधवार से बंद हो चुकी है धान की खरीदी (Paddy purchase)

By: rampravesh vishwakarma

Published: 06 Jan 2021, 09:52 PM IST

रामानुजगंज. जिले के अधिकांश सहकारी समितियों में बारदाने के अभाव में धान खरीदी (Paddy purchase) बुधवार से से बंद हो गई या बंद होने की स्थिति में आ गई है। आदिम जाति सेवा सहकारी समिति महावीरगंज एवं त्रिकुंडा सहित अन्य समितियों में बारदाना के अभाव में खरीदी बंद (Paddy purchase closed) है। आदिम जाति सेवा सहकारी समिति महावीरगंज में 1226 किसानों ने अपना पंजीयन कराया है जिसमें 688 किसान अब तक धान बेच चुके हैं।

538 किसान (Farmers) अब तक अपना धान नहीं बेच सके हैं, वहीं बुधवार से बारदाना खत्म हो जाने से धान खरीदी भी बंद हो गई है। यह सिर्फ भंवरलाल सहकारी समिति की स्थिति नहीं है, वरन जिले के अधिकांश सहकारी समितियों में बारदाने के अभाव में धान खरीदी बंद हो गई है या बंद होने की स्थिति में आ गई है।


गौरतलब है कि बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में 40 धान उपार्जन केंद्रों में धान की खरीदी हो रही है परंतु बारदाने के अभाव में अधिकांश समितियों में धान खरीदी बंद हो गई है या बंद होने की स्थिति में आ गई है।

भंवरमाल सहकारी समिति में अब तक 100942 बारदाने में खरीदी हुई है, वहीं अब खरीदी के लिए प्रतिदिन 8000 बारदाना चाहिए तभी जाकर बचे हुए 538 किसानों का धान खरीदा जा सकेगा।

बारदाने (Bardana) के अभाव में धान खरीदी बंद होने से टोकन कटने के बाद धान लेकर आए किसान बहुत ही चिंतित हैं। एक ओर जहां मौसम खराब हो रहा है, वहीं दूसरी ओर खरीदी नहीं होने से किसानों के सामने बड़ी समस्या खड़ी हो गई है कि वह अपने धान की सुरक्षा कैसे करें।


बफर लिमिट से कई गुना अधिक धान
जिले की सहकारी समितियों के बफर लिमिट से कई कई गुना ज्यादा धान खुले आसमान के नीचे पड़ा हुआ है। इसका उठाव नहीं हो पा रहा है इससे समितियां भी चिंतित हैं।


मौसम में आए बदलाव से बढ़ेगी परेशानी
मौसम में जिस प्रकार से बदलाव आया है यदि बूंदाबांदी होती है तो समितियों में धान बेचने आए किसानों के धान जहां भीगेंगे, वहीं खुले आसमान के नीचे रखे धान को भी बचाना सहकारी समितियों के लिए बड़ी चुनौती साबित होगी। ऐसे में किसान एवं सहकारी समितियां दोनों चिंतित हैं कि धान का उठाव नहीं हो पा रहा है।

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