खुले आम कर रहे बालश्रमिक काम, सरकार नहीं कर रही कोई कार्रवाई

खुले आम कर रहे बालश्रमिक काम, सरकार नहीं कर रही कोई कार्रवाई

Akansha Singh | Publish: Jun, 14 2018 02:52:59 PM (IST) Lucknow, Uttar Pradesh, India

बाल श्रमिक प्रशिक्षण केंद्रों पर महज कोरम पूरा करके लाखों रुपए प्रतिमाह का वारा न्यारा किया जा रहा है ।

बलरामपुर. भारत सरकार की महत्वाकांक्षी योजना बाल श्रम उन्मूलन कार्यक्रम के तहत चलाए जा रहे हैं बाल श्रमिक प्रशिक्षण केंद्रों पर महज कोरम पूरा करके लाखों रुपए प्रतिमाह का वारा न्यारा किया जा रहा है । बाल श्रमिकों के लिए बाकायदा स्थापित विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों की मिलीभगत से वर्षों से संचालित यह योजना परवान नहीं चढ़ पा रही है।जो हकीकत देखने को मिली वह भी चौंकाने वाली थी । जिले में कुल 30 बाल श्रमिक प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना की जानी है जिसके सापेक्ष मात्र 14 बाल श्रमिक प्रशिक्षण केंद्र ही संचालित हो रहे हैं।

बाल श्रमिक प्रशिक्षण केंद्र का उद्देश्य है कि ऐसे बच्चे जो विभिन्न कारणों से विद्यालय की शिक्षा से वंचित रह गए हैं और उनकी उम्र 9 वर्ष से 14 वर्ष के बीच है तथा वह बाल मजदूरी में लगे हुए हैं उन्ही बच्चों को चिन्हित करके उनका नाम बाल श्रमिक प्रशिक्षण केंद्रों को शामिल किया जाएगा और उन्हें शिक्षित करके योग्यता अनुसार किसी विद्यालय में नामांकित कराया जाएगा। इस दौरान बच्चे को 400 प्रतिमाह स्टाइपेंड भी दिया जाएगा परंतु जिले में संचालित बाल श्रमिक प्रशिक्षण केंद्रों पर महज कोरम पूरा किया जा रहा है। इन केंद्रों पर बाल मजदूरी में लगे बच्चों को न रखकर अधिकांश बच्चों को प्राइमरी से बुलाया गया है जो पहले से अध्ययनरत थे।

वहीं जिला मुख्यालय सहित पूरे जनपद के तमाम ढाबों तथा होटलों पर बाल मजदूर देखे जा सकते हैं। यहां तक की विकास भवन, डीएम व एसपी ऑफिस के आसपास के होटलों पर भी बाल श्रमिक कार्यरत हैं। इसके अलावा ईंट भट्ठों तथा दुकानों पर भी बाल श्रमिकों से खुलेआम कार्य कराया जा रहा है और जिम्मेदार अधिकारी जान कर भी अंजान बने हुए हैं। चूंकि इस योजना में बच्चों को 400 प्रतिमाह वजीफा दिया जाता है इसलिए प्राइमरी से पढ़ाई छोड़कर बच्चे विशेष बालश्रम प्रशिक्षण केंद्रों में अपना नामांकन करा रहे हैं और जानबूझकर इस परियोजना से जुड़े कर्मचारी महत्वाकांक्षी परियोजना को पलीता लगाने में जुटे हुए हैं। कर्मचारियों की मिलीभगत में कहीं ना कहीं विभागीय अधिकारियों के संलिप्तता से इनकार नहीं किया जा सकता। बाल श्रम परियोजना अधिकारी प्रवेश श्रीवास्तव व बाल श्रम समिति के नोडल अधिकारी अपर जिला अधिकारी अरुण कुमार शुक्ल से बात की गई तो उन्होंने कहा की केंद्रों पर नियमानुसार बाल श्रमिकों का ही नामांकन किया गया है। प्राइमरी स्कूल से बच्चों को नहीं लाया गया है और यदि सही नामांकन नहीं किया गया है तो उसकी जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।

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