जब अटल बिहारी वाजपेई को हराने के लिए कांग्रेस ने इस फिल्म स्टार से कराया था प्रचार

जब अटल बिहारी वाजपेई को हराने के लिए कांग्रेस ने इस फिल्म स्टार से कराया था प्रचार

Ashish Kumar Pandey | Publish: Mar, 17 2019 08:27:35 PM (IST) Lucknow, Lucknow, Uttar Pradesh, India

1962 में सुभद्रा जोशी से हार गए थे वाजपेई।

 

बलरामपुर. बलरामपुर लोकसभा सीट जब अब बदलकर श्रावस्ती हो गई है। यहां का चुनावी इतिहास काफी दिलचस्प रहा है। इस सीट से ही 1957 में लोकसभा का चुनाव जीत कर अटल बिहारी वाजपेयी पहली बार संसद पहुंचे थे। 1962 में अटल बिहारी वाजपेई के सामने पंडित जवाहर लाल नेहरू ने कांग्रेस पार्टी से सुभद्रा जोशी को प्रत्याशी बनाया। अटल की क्षेत्र में लोकप्रियता को देखते हुए कांग्रेस ने उस समय के मशहूर एक्टर बलराज साहनी को चुनाव प्रचार में उतारा था। बलराज ने दो दिन लोकसभा क्षेत्र में रहकर सुभद्रा जोशी के लिए प्रचार किया। इस दौरान वह रिक्शे पर बैठकर भी प्रचार करते नजर आते थे। जिसके बाद सुभद्रा जोशी ने कांटे की टक्कर में वाजपेई को 2052 मतों से हरा कर जीत हासिल की थी।
2009 में परिसीमन के बाद बलरामपुर का नाम बदल कर श्रावस्ती हो गया। इस लोकसभा क्षेत्र के अंर्तगत बलरामपुर की तीन विधानसभा बलरामपुर, तुलसीपुर व गैंसड़ी तथा श्रावस्ती जिले के दो विधानसभा क्षेत्र श्रावस्ती और भिनगा आते हैं। शुरू से ही इस यहां भाजपा का दबदबा रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेई जनसंघ पार्टी से पहली बार 1957 में इसी सीट से जीत कर लोकसभा पहुंचे थे। हालांकि 1962 में उन्हें कांग्रेस की सुभद्रा जोशी ने मात दे दिया, लेकिन एक बार फिर अटल बिहारी वाजपेई 1967 में जनसंघ के टिकट से ही निर्वाचित हुए। शुरू से यह लोकसभा सीट काफी दिलचस्प रही है। यहां पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय वाजपेई से लेकर सुभद्रा जोशी, नाना जी देशमुख जैसी महान हस्तियां यहां से निर्वाचित हो चुकी हैं।

बहुबलियों के टक्कर की गवाह रह चुकी है श्रावस्ती लोकसभा

2004 के चुनाव में भाजपा ने बाहुबली नेता बृजभूषण शरण सिंह को श्रावस्ती लोकसभा से अपना उम्मीदवार बनाया। उनके सामने समाजवादी पार्टी छोड़कर बसपा में बाहुबली नेता रिजवान जहीर ने चुनाव लड़ा। रिजवान पूर्व में भी लगातार दो बार इसी सीट से चुनाव जीत चुके थे। लेकिन इस चुनाव में उन्हें शिकस्त खानी पड़ी। वहीं 2014 में समाजवादी पार्टी ने बाहुबली नेता अतीक अहमद को अपना प्रत्याशी बनाकर लोकसभा में उतारा। वहीं बसपा ने अपने कद्दावर नेता लाल जी वर्मा को श्रावस्ती लोकसभा से उम्मीदवार घोषित किया। लेकिन मोदी मैजिक के आगे वह भी नहीं टिक सके और भाजपा के दद्दन मिश्रा ने इस सीट पर जीत हासिल की।

जब दुबारा चर्चा में आया श्रावस्ती लोकसभा

2014 में मोदी सरकार बनने के बाद श्रावस्ती लोकसभा क्षेत्र एक बार फिर चर्चा में आया। मोदी सरकार पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेई की कर्मभूमि बलरामपुर से उनके जन्मभूमि ग्वालियर तक जोडऩे के मुहिम चलाई। जिसके बाद क्षेत्रवासियों को सुशासन एक्सप्रेस की सौगात मिली जो वाजपेई के कर्म भूमि को उनके जन्म भूमि से जोड़ती है। वहीं वाजपेई जी के देहांत होने पर श्रावस्ती लोकसभा एक बार फिर चर्चा का विषय बना और उनकी अस्थियों को यहां लाकर राप्ती नदी में प्रवाहित किया गया। वहीं योगी सरकार ने अटलजी की स्मृति में बलरामपुर में स्मारक बनाने की भी घोषणा की।

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