जल संरक्षण एवं संचयन दिवस पर डीएम और सदर विधायक ने किया श्रमदान, चलाये फावड़े

Akansha Singh

Publish: Jun, 24 2019 10:19:41 AM (IST)

Lucknow, Lucknow, Uttar Pradesh, India

बलरामपुर. जल संरक्षण एवं संचयन दिवस के मौके पर जिलाधिकारी कृष्णा करुणेश ने श्रीदत्तगंज ब्लॉक के गांव पिपरी कोल्हाई में प्रधानमंत्री जल संचयन अभियान के तहत प्राथमिक विद्यालय पिपरी कोल्हाई से सटे तालाब के जीर्णोद्धार कार्य में श्रम दान कर लोगों को जल संरक्षण हेतु प्रेरित किया और इस दौरान डीएम ने प्राथमिक विद्यालय में पौधारोपण कर ग्राम वासियों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक भी किया। कार्यक्रम के दौरान डीएम कृष्णा करुणेश ने देश के प्रधानमंत्री द्वारा सरपंचों को सम्बोधित संदेश को पढ़कर ग्राम वासियों को जल संरक्षण व संचयन की शपथ भी दिलायी।

तालाब की जीर्णोद्धार की लागत 3 लाख 25 हजार रुपये है व इसमें 1050 मानवरोजगार दिवस सृजन का लक्ष्य रखा गया है। कार्यक्रम के बाद जिलाधिकारी ने चौपाललगाकर ग्रामवासियों की समस्याएं सुनी। ग्राम वासियों को सम्बोधित करते हुए डीएम ने कहा कि वर्षा का पानी रोकने हेतु ग्राम प्रधान अपने खण्ड विकास अधिकारियों से विचार विमर्श करके मनरेगा के माध्यम से बेहतर तालाब का निमार्ण कर सकते हैं। इससे गांव में जल संरक्षण भी होगा और स्थानीय मजदूरों को रोजगारभी मुहैया होगा। उन्होंने कहा कि गांव के विकास के लिए प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री प्रतिबद्ध हैं तथा गांव के विकास के लिए धन की कोई कमी नही है। उन्होंने कहा कि तालाब के अलावा गांव में सामुदायिक भवन या जहां पर पंचायत भवन नहीं हैं का भी निर्माण कराया जा सकता है। गांव में भू-जल स्तर में सुधार एवं निकट भविष्य में जलापूर्ति, भूजल स्तर को ऊपर उठाने एवं वर्षा जल संचयन के लिए सभी घरों में वर्षाजल संचयन ढांचा बनाने के लिए प्रधानमंत्री जल संचयन योजना का शुभारम्भ किया गया है। जल, जीवन के लिये सबसे अहम प्राकृतिक संसाधन है। वैज्ञानिकों के मतानुसार आगामी दशकों में यह विश्व के कई क्षेत्रों में एक गंभीर अभाव की स्थिति में चला जायेगा। जल पृथ्वी में सबसे प्रचुर मात्रा में पाया जाने वाला पदार्थ है, फिर भी यह समान रूप से वितरित नहीं है। उन्होंने कहाकि दुनियाभर में पानी की कमी निम्न कारणों से बढ़ रही हैं जैसे सूखे, सिंचाई कीबढ़ती मांग, औद्योगिक मांग, प्रदूषण, जल संसाधनों के प्रयोग में कमी और जल की व्यर्थ बर्बादी और गैर जिम्मेदाराना रवैया। उन प्रयासों पर जोर देने की आवश्यकता है जो कि सूखे के मौसम में, अधिक से अधिक वर्षाजल को संग्रहित कर सके। स्थानीय स्तर पर वर्षा के पानी का संचयन या संग्रहण को या तो जलाशयों, टैंकों या झीलों में जल को संग्रहित करके रखने के माध्यम से हो सकता है अथवा भूमिगत जल के पुनर्भरण द्वारा किया जा सकता है। इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी अमनदीप डुली ने भी ग्राम पंचायत पिपरी कोल्हाई में तालाब निर्माण में श्रमदान किया व लोगों को जागरूक करते हुये कहा कि बढ़ती हुई घरेलू, औद्योगिक औरकृषि से संबंधित कार्यों की मांग की पूर्ति के कारण, पानी की उपलब्ध मात्रा में कमी हो रही है और यह स्थिति भविष्य में और गंभीर हो सकती है।

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