रमजान का पाक महीना शुरू, रमजान का महीना मुसलमानों का सबसे अफजल महीना

रमजान का पाक महीना शुरू, रमजान का महीना मुसलमानों का सबसे अफजल महीना

Akanksha Singh | Publish: May, 18 2018 02:22:04 PM (IST) Lucknow, Uttar Pradesh, India

रमजान का महीना मुसलमानों का सबसे अफजल महीना है।

बलरामपुर. रमजान का महीना मुसलमानों का सबसे अफजल महीना है। यह महीना बड़ी रहमतों व बरकतों वाला माना जाता है। इस माह मे मुसलमानों की सबसे अहम पाक (पवित्र) किताब कुरान-ए-शरीफ का नुजूल हुआ। इस महीने का महत्व इसी से समझा जा सकता है कि अल्लाह तआला ने अपने मंसूब करते हुए इसे अपना महीना करार दिया है। इस महीने मे हर प्रकार की शैतानी ताकतें कैद हो जाती है इस माह मे सभी मुसलमानों के लिए रोजा वाजिब करार दिया गया है।

यह जानकारी जामा मस्जिद के इमाम मौलाना मुफ्ती मोहम्मद जमील साहब ने देते हुए बताया कि पूरे महीने इंसान अल्लाह की इबादतों में व्यस्त हो जाता है। पांचों वक्त की नमाज के अलावा कलाम-ए-पाक की तिलावत इस महीने की इबादत में शामिल है। ऱमजान के पूरे तीस दिन यानी ईद का चांद निकलने तक मुसलमानों को रोजा रखना होता है। बच्चों व बीमार लोगों को छोड़कर सभी मुसलमान पुरूष महिला, नौजवान पर वाजिब हैं। उन्होंने बताया कि रोजा का मतलब सिर्फ भूखे रहना ही नहीं बल्कि भूख प्यास के साथ पूरे जिस्म का रोजा रखना होता है। यानी रोजेदार की जुबान से झूठी बातें नहीं निकलनी चाहिए। आंख से किसी की बुरी चीज को नहीं देखनी चाहिए तथा कान से किसी की बुराई नहीं सुननी चाहिए। मतलब कि हर बुराई व गुनाह से दूर रखा गया रोजा ही अल्लाह स्वीकार करता है। पैगम्बर हजरत मोहम्मद सल०अलैहे व सल्लम का फरमान है कि जो शख्स सच्चे दिल से रोजा रखता है उसके पिछले सारे गुनाह माफ कर दिये जाते हैं और वह इन्सान रहमतों बरकतों से मालामाल हो जाता है। सुबह की अजान से पहले लोग सेहरी खाकर रोजे की नियत करते हैं। जब कि मगरिब की अजान के समय इफ्तार के जरिये रोजा खोला जाता है। यदि कोई शख्स किसी रोजेदार को इफ्तार करवाता है तो उसको काफी अधिक शवाब (पुण्य) प्राप्त होता है। रमजानुल मुबारक में शब-ए-कदर की रात महत्व रखती है। इस रात की इबादत कई हजार रातों की इबादत से अफजल मानी गई है।

Ad Block is Banned