बीजेपी के इस प्रत्याशी ने की थी गठबंधन को जिताने की अपील, सभी रह गए थे हैरान

बीजेपी के इस प्रत्याशी ने की थी गठबंधन को जिताने की अपील, सभी रह गए थे हैरान

Neeraj Patel | Updated: 26 May 2019, 03:32:39 PM (IST) Lucknow, Lucknow, Uttar Pradesh, India

-सपा छोड़कर भाजपा में शामिल होने पर मिला था टिकट
-58 हजार मतों से गठबंधन उम्मीदवार को हराया
-मतदान के दौरान गठबंधन को जिताने की अपील की थी

बांदा. लोकसभा चुनाव में बांदा-चित्रकूट सीट से बीजेपी हाई कमान ने पूर्व सपा सांसद आर के सिंह पटेल को टिकट दिया था। बीजेपी प्रत्याशी आर के सिंह पटेल ने 58 हजार मतों से जीत हासिल कर साबित कर दिखा दिया है कि बांदा जिले की जनता को उनसे बहुत उम्मीदें हैं। इसलिए बांदा जिले की जनता ने आर के सिंह पटेल को सांसद के रूप में चुना। बीजेपी प्रत्याशी ने गठबंधन को 58 हजार मतों से हराकर बांदा-चित्रकूट क्षेत्र में अपना कब्ज़ा जमा लिया है।

बता दें कि जब बांदा लोकसभा सीट पर जिस दिन मतदान हो रहा था उस दिन बीजेपी प्रत्याशी आर के सिंह पटेल ने एक नुक्कड़ सभा में अजीबों गरीब बयान देकर सबको चौंकाया था। जिसमें वह जनता से गठबंधन को जिताने की अपील की थी। जिससे पूरे भाजपा खेमे में हलचल मच गई थी लेकिन उनके इस बयान को बड़े-बड़े बुद्धजीवी भी नहीं पाए कि आखिर बीजेपी प्रत्याशी आर के सिंह पटेल गठबंधन को जिताने की अपील क्यों कर थे।

बांदा लोकसभा संसदीय क्षेत्र पर इस बार का चुनाव बड़ा ही दिलचस्प रहा क्योंकि आर. के. सिंह पटेल समाजवादी पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हुए और चुनाव भी जीते। जबकि वह सपा के पूर्व सांसद भी रह चुके हैै। आर. के. सिंह पटेल के भाजपा में शामिल होने पर लोगों को लग रहा था कि वह इस बार चुनाव हार जाएंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने जनता को भरोसा दिलाया कि हमेशा उनके साथ रहेंगे।

2014 में बने बीजेपी सांसद भैरो प्रसाद मिश्र को भारतीय जनता पार्टी ने टिकट ने देकर सपा के आर. के. सिंह पटेल को भाजपा से टिकट दिया। जिससे सांसद भैरो प्रसाद मिश्र का टिकट कटने पर बीजेपी के कार्यकर्ता काफी नराज हुए थे और वहीं दूसरी ओर बीजेपी की रीढ़ की हड्डी माने जाने वाले अशोक त्रिपाठी उर्फ़ जीतू भइया ने भी नाराज होकर भाजपा खिलाफ निर्दलीय नामांकन किया था लेकिन संयोग वश उनका नामांकन रद्द हो गया।

गठबंधन के लिए मांगे थे वोट

मतदान के दौरान बांदा-चित्रकूट लोकसभा क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी आर के सिंह पटेल ने एक नुक्कड़ सभा में जनता से अपील की थी कि यदि आपको मैं पसंद नहीं हूं तो मुझे वोट देना, पर गठबंधन को वोट देकर उसे जरूर जिता देना, अपने वोट को बर्बाद न करना, कोई और नहीं जीतना नहीं चाहिए। बीजेपी प्रत्याशी के इस अजीबों गरीब बयान से बीजेपी खेमे में हलचल मच गई थी। बुद्धजीवी भी बीजेपी प्रत्याशी के इस बयान को समझ नहीं पाए और अंत में आर के सिंह पटेल को ही जीत मिली क्योंकि जनता उनके इस बयान को अच्छे से समझ गई थी। कांग्रेस के बाल कुमार पटेल जो की कुख्यात डकैत ददुआ के भाई हैं को हराने के लिए बीजेपी प्रत्याशी आर के सिंह पटेल ने ये बयान दिया थी।

आर के पटेल का राजनीतिक सफर

1994 में पहली बार मामूली अंतर से चुनाव हारे।
1996 में विधानसभा पहुंचे और कैबीनेट मंत्री भी बने।
2002 में बसपा से फिर विधायक बने।
2007 में बसपा से टिकट कटने पर सपा में शामिल होकर चुनाव लड़े, लेकिन मामूली अंतर से चुनाव हार गए।
2009 में दूसरी बार सपा से ही सांसद बने।
2014 में बसपा से लोकसभा लड़े और मोदी की आंधी में हार का सामना करना पड़ा।
2017 में भाजपा में शामिल होकर मनिकपुर से विधानसभा लड़े और विधायक बने और
2019 में भाजपा से चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचे।

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