एसआई की रहमदिली, सब इंस्पेक्टर ने निजी कार से प्रसूता को पहुंचाया अस्पताल, कार में जन्मा नया मेहमान

एसआई की रहमदिली, सब इंस्पेक्टर ने निजी कार से प्रसूता को पहुंचाया अस्पताल, कार में जन्मा नया मेहमान
एसआई की रहमदिली, सब इंस्पेक्टर ने निजी कार से प्रसूता को पहुंचाया अस्पताल, कार में जन्मा नया मेहमान

Neeraj Patel | Updated: 25 Aug 2019, 03:46:52 PM (IST) Lucknow, Lucknow, Uttar Pradesh, India

- महिला ने रास्ते में ही दिया शिशु को जन्म
- फोन करने पर भी समय से नहीं पहुंची एंबुलेंस

ह्यूमन एंगल

बांदा. बुंदेलखण्ड के बांदा में एक बार फिर संवेदनहीनता की मिसाल बन चुके स्वास्थ्य विभाग के ऊपर पुलिस विभाग की रहमदिली भारी पड़ी है। शहर में सड़क किनारे प्रसव पीड़ा से तड़प रही गर्भवती की मदद के लिए कई बार फोन करने के बावजूद भी स्वास्थ्य विभाग की एंबुलेंस समय से नहीं पहुंची लेकिन तभी रास्ते से गुजर रहे सब इंस्पेक्टर ने मानवता की मिसाल पेश करते हुए अपनी निजी कार में प्रसूता को लिटाकर अस्पताल पहुंचाया, लेकिन रास्ते में जाते समय कार में ही प्रसूता ने शिशु को जन्म दिया। फिलहाल बांदा पुलिस की इंसानियत के चलते जच्चा और बच्चा दोनों की जिंदगी बच सकी है।

समय से नहीं पुहंची एंबुलेंस

दरअसल देर रात बांदा देहात कोतवाली क्षेत्र के गांव गुरेह के भज्जू का पुरवा निवासी श्याम सुंदर की गर्भवती बेटी चमेली को प्रसव पीड़ा हो रही थी। श्याम सुंदर ने सरकारी एंबुलेंस को फोन मिलाया तो वहां से जवाब मिला कि रोड पर पीड़िता को लेकर आओ। एंबुलेंस 108 कंट्रोल रूम की हिदायत के मुताबिक श्यामसुंदर गर्भवती को लेकर बाईपास सड़क किनारे पहुंच गया और एंबुलेंस को कई बार फोन किया लेकिन एंबुलेंस 2 घंटे तक नहीं पहुंची। प्रसव पीड़ा से बुरी तरह तड़प रही प्रसूता सड़क किनारे ही पड़ी रही।

कार में ही शिशु को दिया जन्म

मटौंध थाने में तैनात एसआई रोशन गुप्ता चित्रकूट से वापस निजी कार से लौट रहे थे कि उनकी नजर सड़क किनारे दर्द से तड़प रही प्रसूता पर पड़ी, तो उन्होंने तत्काल गाड़ी रोककर अपनी निजी गाड़ी में प्रसूता और उसके परिजनों को बैठाया और तेजी से महिला अस्पताल की तरफ चल दिए। बांदा मंडी समिति के सामने कार में ही प्रसव शुरू हो गया और प्रसूता ने एक शिशु को जन्म दिया। इसके बाद एसआई रोशन गुप्ता ने जच्चा और बच्चा को जिला महिला अस्पताल पहुंचाया और उन्हें अस्पताल में भर्ती करा कर अपने फर्ज को अंजाम दिया।

पीड़िता का हाल-चाल लेने नहीं पहुंची आशा बहू

पीड़ित के पिता का कहना है कि वह 2 घंटे से बराबर 108 एंबुलेंस को फोन मिला रहे थे लेकिन उसके बाद भी एंबुलेंस नहीं आई इसके साथ ही गांव की आशा बहू पिछले कई महीनों से पीड़िता का हाल-चाल लेने नहीं पहुंची। जच्चा और बच्चा को अस्पताल में भर्ती कराकर लौट रहे एसआई रोशन गुप्ता का कहना है कि वह चित्रकूट से अपनी कार से वापस लौट रहे थे। बाईपास के पास दर्द से तड़प रही प्रसूता के परिजनों ने उनको हाथ दिया और उन्होंने जो हो सकता था उन्होंने उनकी मदद की।

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