फर्जी कॉल्स से आहत को राहत में विलम्ब

गंभीर स्थिति में जल्दी से जल्दी अस्पताल पहुंचाने वाले 108 एम्बुलेंस वाहन सिरफिरों के फर्जी कॉल के चक्कर में बहुत से मामलों में वास्तविक पीडि़त मरीज तक

By: शंकर शर्मा

Published: 22 Aug 2017, 10:10 PM IST

निखिल कुमार
बेंगलूरु. गंभीर स्थिति में जल्दी से जल्दी अस्पताल पहुंचाने वाले 108 एम्बुलेंस वाहन सिरफिरों के फर्जी कॉल के चक्कर में बहुत से मामलों में वास्तविक पीडि़त मरीज तक तत्काल नहीं पहुंच पा रहे। इसके चलते एम्बुलेंस का समय और ईंधन दोनों बर्बाद हो रहा है और कर्मचारियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

कॉल करने वाला व्यक्ति अपना नाम बताकर कोई भी बीमारी का बहाना बना देता है जिसके चलते एंबुलेंस कर्मी उस स्थान पर पहुंच जाते हैं लेकिन वहां न वह व्यक्ति मिलता है और न ही मरीज। इस कारण एम्बुलेंस कर्मचारियों को फिजूल दौड़ लगानी पड़ती है। फर्जी कॉल के चक्कर में कई बार दूसरे जरूरतमंद गंभीर मरीज को उसी समय तत्काल सहायता नहीं मिल पाती।


राज्य में सरकार के साथ मिलकर १०८ एम्बुलेंस सेवा का परिचालन करने वाली जीवीके-इमरजेंसी मैनेजमेंट व रिसर्च इंस्टीट्यूट (ईएमआरआई) के आंकड़े काफी चौंकाने वाले हैं। इसके अनुसार जनवरी २०१५ से जून २०१७ तक १९९६ हॉक्स कॉल आए। ऐसे भी मामले आम हैं जब बुलावे पर एम्बुलेंस पहुंचती है तो जवाब मिलता है कि वे पुष्टि करना चाहते थे, एम्बुलेंस समय पर आती है या नहीं। मानवता के साथ ये क्या मजाक है?

50 % से ज्यादा कॉल्स शरारती
जीवीके -ईएमआरआई के आंकड़े बताते हैं कि जरूरतमंदों से ज्यादा कॉल फर्जी होते हैं। वर्ष २०१५ में कुल ४९ लाख ९२हजार ५७१ कॉल्स आए। इनमें से ६६ फीसदी यानी ३३ लाख १४हजार ९८९ कॉल्स प्रैंक (शरारती) थे। वर्ष २०१६ में कुल ५२लाख २२हजार६८५ कॉल्स आए, जिसमें से ६५ फीसदी यानी ३४,०३,८५८ कॉल्स प्रैंक थे। इस साल जून तक के आंकड़े बताते हैं कि २८लाख ५३हजार ७३८ में से १७,७७,४९१ कॉल्स पैं्रक थे। १०८ के कॉल सेंटर में ५० फीसदी से ज्यादा कॉल्स इसी तरह के होते हैं।

२६ मोबाइल नम्बर, ३५ हजार कॉल
जीवीके-ईएमआरआई के पूर्व प्रदेश प्रमुख अभिनव के. जयराम के अनुसार दुख की बात है कि लोगों ने इस एम्बुलेंस सेवा से ही मजाक करना शुरू कर दिया है। ऐसे कई लोग भी हैं जिन्होंने एक ही मोबाइल नम्बर से हजारों बार कॉल कर कॉल सेंटर के कर्मचारियों को परेशान किया है। वो भी एक ही वर्ष में। वर्ष २०१६ के दौरान एक ही मोबाइल नम्बर से ३,२४४ जबकि दूसरे नम्बर से २,८५५ बार कॉल कर परेशान किया गया।

ऐसे करीब २६ मोबाइल नम्बर हैं जिसे जीवीके-ईएमआरआई ने चिह्नित कर काली सूची में रखा है। कॉलर कई बार कॉल सेंटर की महिला कर्मचारियों को परेशान करते हैं। अभद्र भाषा का प्रयोग करते हैं। कई बार कॉल करते हैं लेकिन कुछ बोलते नहीं। वर्ष २०१६ और २०१७ के जून माह तक २६ मोबाइल नम्बरों से ३५ हजार से भी ज्यादा कॉल आए। जीवीके-ईएमआरआई प्रबंधन इन पर केस करने की तैयारी में जुटा है।

कर्मचारी परेशान, अश्लीलता पर उतारु
हॉक्स और प्रैंक कॉलों से प्रबंधन और कर्मचारी परेशान हैं। सेवा प्रभावित होती है। लोगों को समय पर एम्बुलेंस मिलने में दिक्कतें आ रही हैं। कई लोग तो कॉल करके कुछ बोलते भी नहीं, कई बार बच्चे भी कॉल कर शरारत करते हैं। कॉल सेंटर में एक पुलिसकर्मी की ड्यूटी भी रहती है। पुलिस ने भी इन कॉलरों को कई बार फोन कर समझाया मगर ऐसे कॉल आने जारी हैं। कई कॉलर तो हद पार कर चुके हैं। वे कॉल सेंटर की महिला कर्मचारियों को फोन कर अश्लीलता पर भी उतर जाते हैं।नौशाद अली खान,प्रमुख,कॉल सेंटर व विपणन विभाग, जीवीके-ईएमआरआई

शंकर शर्मा
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