किशमिश व्यापारियों के 1200 करोड़ रुपए फंसे

  • 1.20 लाख टन किशमिश गोदामों में
  • पड़ोसी राज्य में किशमिश के खरीदार घटे

By: Ram Naresh Gautam

Published: 13 Sep 2020, 08:42 PM IST

कोल्हापुर. महाराष्ट्र में अंगूर की अक्टूबर माह में फलछटणी की तैयारी शुरू हुई है। गए साल 60 हजार टन ज्यादा किशमिश तैयार हुई।

जबकि कोरोना के चलते देश के साथ दुनियाभ रमें बिक्री के लिए मांग नहीं होने से समस्या उठ खडी हुई है। ऐसे में फलछटणी के लिए किसानों के सामने आर्थिक संकट खडा हुआ है।

इस साल राज्य में 2.20 लाख टन किशमिश तैयार की गई। उसमें 1.20 लाख टन किशमिश गोदामों में पड़ी हुई है। औसतन 100 रुपए किलो भी दर मानें तो लगभग 1200 करोड रुपए किशमिश में फंसे हुए हैं।

जबकि दशहरा और दिवाली में लगभग 50 हजार टन किशमिश की बिक्री होने की उम्मीद है। दो माह के बाद ही आर्थिक चक्र से किसानों के संवरने की संभावना है।

राज्य में सबसे ज्यादा अंगूर का नासिक, सांगली, जालना, सोलापुर, सातारा, इंदापुर के साथ कुछ हद तक इंदापुर, बीड और कर्नाटक के सीमाभाग में उत्पादन होता है।

इस साल कोरोना के चलते लॉकडाउन से राज्यभर में 60 हजार टन किशमिश ज्यादा तैयार हुई। बिक्री के लिए अंगूर से किशमिश की प्रत कम हुई। कोरोना के चलते देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर में मांग घटी।

हर साल के ग्राहक भी मिलना कठिन हुआ। ज्यादा किशमिश तैयार होने से दर भी गिरी और ज्यादा माल पडा रहा। राज्यभर के कुल शीतगृह में 1.20 टन किशमिश पड़ी हुई है।

सांगली के साथ नासिक जिले में फलछटणी की तैयारी अंतिम चरण में है।

आनेवाले समय देश के साथ निर्यात के लिए बाजारपेठ का अनुमान नहीं होने से देर से हंगाम लेने की ओर किसानों का कल है। जबकि नासिक अंगूर का बडे पैमाने पर नुकसान होने से 15 अगस्त से छटणी शुरू हुई है।

सांगली में इसकी शुरुआत हुई है। सितंबर के आखिर तक दस फीसदी और बाकी 85 फीसदी छटणी अक्टूबर में होगी। उसकी तैयारी शुरू है। गए साल निर्यात किए कुछ किसानों को अब भी पूरी रकम नहीं मिली है।

कोरोना के चलते बाजारपेठ, दर, मांग, निर्यात, दलालों की ओर से होने वाली खरीदारी, इसके बारे में अस्थिरता होने से कृषि सेवा केंद्र की ओर से उधार नहीं दिया जा रहा जिससे हंगाम की चलते किसानों के सामने संकट खडा हुआ है।

किशमिश का उठाव भी जल्दी से होनेकी संभावना नहीं है। कर्जमाफी, ज्यादा कर्जा के चलते कईयों को नए सिरे से कर्जा मिलना नामुमकिन हुआ है।

  • इनका कहना है
    औसतन 40 से 45 फीसदी किशमिश पड़ा हुआ है। देश में ही नहीं बल्कि दुनिया भर के सामने आ गई मुसीबत से हम सभी हतप्रभ हैं।
    -मनोज मालू, अध्यक्ष किशमिश एसोसिएशन
Ram Naresh Gautam Desk
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