कोरोना काल में लौटी 15 गरीब बच्चों की मुस्कान

- प्रतिवर्ष क्लेफ्ट लिप और क्लेफ्ट पैलेट के साथ जन्म लेते हैं 35000 से ज्यादा बच्चे

By: Nikhil Kumar

Published: 21 Nov 2020, 10:59 PM IST

बेंगलूरु. कोरोना महामारी के बीच शहर के एक निजी अस्पताल के चिकित्सकों ने क्लेफ्ट लिप और क्लेफ्ट पैलेट या फांक (कटा) होंठ व तालू पीडि़त 15 गरीब बच्चों की नि:शुल्क सर्जरी कर उनके चेहरे पर खुशियां बिखेरी। चिकित्सक अब तक 100 से ज्यादा बच्चों की नि:शुल्क सर्जरी कर उन्हें समाज की मुख्य धारा से जोड़ चुके हैं। इनमें से ज्यादातर बच्चे गांव से हैं जहां आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं की कोई विशेष पहुंच नहीं है।

एस्टर सीएमआइ अस्पताल में क्रैनियोमैक्सिलोफेशियल सर्जन डॉ. सतीश एम. एस. वशिष्ठ ने बताया कि कटा होंठ और तालू एक ऐसी स्थिति है, जो तभी होती है जब होंठ के दो किनारे या मुंह का ऊपरी भाग (तालू) पूरी तरह से एक साथ नहीं मिलते हैं। होंठ और तालू अलग से विकसित होते हैं, इसलिए किसी बच्चे में कटे होंठ, कटे तालू या दोनों होना संभव है। जब शिशु आपके गर्भ में पल रहा होता है, उसकी खोपड़ी, चेहरे और सिर के दोनों तरफ के हिस्से धीरे-धीरे एक साथ बढ़ते हैं। फांक होंठ और तालु तब होते हैं, जब कुछ हिस्से जन्म के पहले पूरी तरह नहीं जुड़ पाते।

देश में हर साल 35 हजार से ज्यादा बच्चे क्लेफ्ट लिप या क्लेफ्ट पैलेट के साथ जन्म लेते हैं। प्रति 350 जीवित जन्म पर एक शिशु इससे प्रभावित होता है। पीडि़त बच्चे स्तनपान नहीं कर पाते हैं और बोतल के दूध के सहारे बढ़ते हैं। ऐसे कई मामले भी सामने आए जब अभिभावकों ने इस समस्या के साथ जन्मीं बच्चियों को त्याग दिया हो जबकि सर्जरी से उपचार संभव है। जागरूकता की कमी या फिर आर्थिक तंगी के कारण कई अभिभावक सामने नहीं आते हैं।

Nikhil Kumar Reporting
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned