scriptIn 1969 Indira not supported Alva Mother in law for VP post | Vice President Election : कभी इंदिरा ने नहीं किया था अल्वा की सास का समर्थन, अब बहू को मौका | Patrika News

Vice President Election : कभी इंदिरा ने नहीं किया था अल्वा की सास का समर्थन, अब बहू को मौका

53 साल बाद बहू बनीं विपक्ष की साझा उम्मीदवार

बैंगलोर

Published: July 18, 2022 02:47:12 am

बेंगलूरु. उप राष्ट्रपति पद Vice President Election के लिए विपक्ष की साझा उम्मीदवार Margaret Alva मार्गरेट अल्वा (80) सिर्फ 32 साल की उम्र में पहली बार संसद के उच्च सदन राज्यसभा के लिए चुनी गई थीं। उपराष्ट्रपति राज्यसभा के पदेन सभापति भी होते हैं। अल्वा की सास वायलेट अल्वा करीब साढ़े सात साल तक राज्यसभा की उपसभापति रही थीं। हालांकि, कभी अल्वा की सास को कांग्रेस ने उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाने से इनकार कर दिया था मगर 53 साल बाद अल्वा को कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्ष ने संयुक्त उम्मीदवार के तौर पर नामित किया है।

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alva1.jpgकांग्रेस पर भी साधा था निशाना
गांधी परिवार की करीबी रहीं अल्वा ने कभी कांग्रेस पर टिकट बेचने का आरोप भी लगाया था। वर्ष 2008 के विधानसभा चुनाव में अपने बेटे को टिकट नहीं मिलने से नाराज अल्वा ने कांग्रेस आलाकमान पर निशाना साधा था। इसके बाद अल्वा को पार्टी महासचिव सहित अन्य जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया गया था। मगर जल्द ही विवाद का पटाक्षेप हो गया और अल्वा को तत्कालीन यूपीए सरकार ने अगस्त २००९ में उत्तराखंड की पहली महिला राज्यपाल के तौर पर नामित किया।

40 साल में बनी मंत्री, 29 साल रहीं सांसद
लगातार 29 साल तक सांसद रहीं अल्वा 40 साल की उम्र में ही केंद्रीय मंत्रिमंडल की सदस्य बन गई थीं। मूलत: मेंगलूरु की रहने वाली अल्वा चार बार राज्यसभा और एक बार उत्तर कन्नड़ क्षेत्र से लोकसभा की सदस्य रह चुकी हैं। राजीव गांधी और पी वी नरसिम्हा राव की सरकार में राज्य मंत्री के अल्वा 2009-14 के बीच चार राज्यों- गोवा, गुजरात, राजस्थान और उत्तराखंड की राज्यपाल भी रहीं। मार्गरेट अल्वा बेंगलूरु के प्रतिष्ठित माउंट कार्मेल कॉलेज और सरकारी विधि कॉलेज की छात्रा रह चुकी हैं।

ससुराल पक्ष से विरासत में मिली राजनीति
मार्गरेट अल्वा को राजनीति ससुराल पक्ष से विरासत में मिली। अल्वा के सास-ससुर संसद के दोनों सदनों के सदस्य रहे थे। अल्वा की सास वायलेट अल्वा वर्ष 1962 से 1969 के बीच दो बार राज्यसभा की उपसभापति रहीं। वायलेट दूसरी और तीसरी उपसभापति रहीं थी। वायलेट किसी उच्च न्यायालय में पेश होने वाली पहली महिला अधिवक्ता के साथ ही राज्यसभा की पहली महिला उप सभापति भी थीं। 1952 में राज्यसभा के लिए पहली बार चुनी गई वायलेट अल्वा दूसरे आम चुनाव के बाद 1957 में नेहरु मंत्रिमंडल उप राज्य मंत्री (गृह) बनाई गई थीं। 1962 में उप सभापति चुनी गई मगर 1969 में उप राष्ट्रपति पद के लिए प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के समर्थन नहीं करने पर वायलेट अल्वा ने इस्तीफा दे दिया था। इसके पांच दिन बाद ही वायलेट का निधन हो गया। स्वतंत्रता के बाद मुंबई के पहले शेरिफ रहे मार्गरेट अल्वा के ससुर जोआचिम अल्वा भी तीन बार लोकसभा और एक बार राज्यसभा के सदस्य रहे थे। देश के संसदीय इतिहास में स्वतंत्रता सेनानी रहे वायलेट और जोआचिम पहले सांसद दंपती थे। सास के निधन के बाद मार्गरेट अल्वा ने राजनीति में कदम रखा और सांसद चुने जाने से पहले कांग्रेस की राष्ट्रीय संयुक्त सचिव रहीं। बाद में प्रदेश और राष्ट्रीय संगठन में कई पदों पर काम किया।

अधिवक्ताओं के बीच मुकाबला
उप राष्ट्रपति पद के दोनों उम्मीदवार- भाजपा के जगदीप धनखड़ और अल्वा, अधिवक्ता के तौर पर भी काम कर चुके हैं। दोनों राज्यपाल, केंद्रीय मंत्री और सांसद रह चुके हैं। दोनों का जुड़ाव भी राजस्थान से रहा है। धनखड़ राजस्थान से हैं तो अल्वा राजस्थान की राज्यपाल रह चुकी हैं। उप राष्ट्रपति के चुनाव में लोकसभा और राज्यसभा के सदस्य ही चुनाव करते हैं। संसद के दोनों सदनों के दलीय गणित के हिसाब से मार्गरेट की राह काफी मुश्किल हैं। हालांकि, उन्होंने विपक्षी दलों की ओर से उम्मीदवार बनाए जाने पर कहा कि यह उनके लिए सम्मान की बात है।

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