विधान परिषद की चार सीटों के लिए मतदान आज,परिणाम २ को

२.३५ लाख मतदाता करेंगे ४० उम्मीदवारों के भाग्य का निर्णय

By: Sanjay Kulkarni

Published: 28 Oct 2020, 08:31 AM IST

बेंगलूरु. राज्य विधान परिषद की चार सीटों के लिए बुधवार को मतदान होगा। शिक्षक और स्नातक कोटे की दो-दो सीटों के लिए १८ जिलों में २.३५ लाख मतदाता ४० उम्मीदवारों के भाग्य का निर्णय करेंगे। कोरोना के बाद राज्य में यह पहला चुनाव होगा जिसमें आम मतदाता भी मतदान करेंगे। सदस्यों के कार्यकाल पूरा होने के कारण चारों सीटें जून में रिक्त हुई थी लेकिन कोरोना के कारण चुनाव टाल दिए गए थे। चारों सेवानिवृत सदस्यों के अलावा दो पूर्व विधान पार्षद और एक पूर्व विधायक भी किस्मत आजमा रहे हैं। मतदान सुबह ८ से शाम ५ बजे तक होगा। मतगणना २ नवम्बर को होगी।चुनाव आयोग ने मतदान की तैयारियां पूरी कर ली हैं। आयोग के मुताबिक सबसे अधिक १,०९,१२७ मतदाता दक्षिण-पूर्व स्नातक क्षेत्र में मतदान करेंगे। इस क्षेत्र में १८७ मतदान केंद्र बनाए गए हैं। भाजपा के चिदानंद एम गौड़ा, कांग्रेस के रमेश बाबू और जद-एस के आरसी रेड्डी तोपल्ली सहित १५ उम्मीदवार मैदान में हैं। तोपल्ली का कार्यकाल जून में पूरा हुआ था।पश्चिम स्नातक क्षेत्र में ७४ हजार से अधिक मतदाता भाजपा के एसवी संकनूर और कांग्रेस के आरएम कुबेरप्पा सहित ११ उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला करेंगे। इस क्षेत्र में १४६ मतदान केंद्र बनाए गए हैं। संकनूर का कार्यकाल जून में पूरा हुआ था। उत्तर-पूर्व शिक्षक क्षेत्र में करीब ३० हजार मतदाता १४७ मतदान केंद्रों पर मतदान करेंगे।इस क्षेत्र में भाजपा के शशिल नमोशी, कांग्रेस के शरणप्पा मट्टूर और जद-एस के तिमय्या पुर्ले सहित पांच उम्मीदवार मैदान में हैं। मट्टूर का कार्यकाल जून में पूरा हुआ था। बेंगलूरु शिक्षक क्षेत्र में २२ हजार से अधिक मतदाता ६९ मतदान केंद्रों पर मतदान करेंगे। भाजपा के पुट्टण्णा, कांग्रेस के प्रवीण पीटर, जद-एस के एपी रंगनाथ सहित ९ उम्मीदवार मैदान में हैं। पुट्टण्णा का कार्यकाल जून में पूरा हुआ था। पिछली बार वे जद-एस के टिकट पर जीते थे लेकिन बाद में भाजपा में शामिल हो गए थे। नमोशी और रमेश बाबू पहले भी परिषद के सदस्य रह चुके हैं। रमेश पहले जद-एस में थे और अब कांग्रेस के उम्मीदवार हैं। पूर्व विधायक और कन्नड़ वाटाल पक्ष के नेता वाटाल नागराज उत्तर-पूर्व शिक्षक क्षेत्र से मैदान में हैं।चुनाव का राजनीतिक महत्वविधानमंडल के उच्च सदन में सत्तारुढ़ भाजपा को बहुमत नहीं होने के कारण इन चारों सीटों के चुनाव का राजनीतिक महत्व भी है। पिछले चुनाव में इनमें से दो सीटें भाजपा और एक-एक कांग्रेस और जद-एस ने जीती थी। मानसून सत्र के दौरान बहुमत नहीं होने के कारण सरकार विधानसभा में पारित होने के बावजूद कई विधेयक सदन में पारित नहीं करा सकी। विपक्षी कांग्रेस और जद-एस की एकजुटता के कारण परिषद ने श्रम सुधार कानून में संशोधन से संबंधित विधेयक को खारिज कर दिया जबकि भूमि सुधार विधेयक लंबित रह गया। विपक्ष के विरोध के कारण सरकार कृषि उपज मंडी कानून में संशोधन से संबंधित विधेयक सदन में पेश नहीं कर पाई।७५ सदस्यीय सदन में सभापति को छोड़कर कांग्रेस के २८, भाजपा के २७, जद-एस के १४, एक निर्दलीय सदस्य हैं और चार सीटें रिक्त हैं जिसके लिए चुनाव हो रहे हैं।

Sanjay Kulkarni Reporting
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