मिड डे मील बंद होने से 56 लाख बच्चे प्रभावित

  • शिक्षा मंत्री ने बताया कि बच्चों को दूध मिले इसके लिए सरकार कर्नाटक सहकारी दुग्ध महासंघ से बात कर रही है। जल्द ही बच्चों के घर पर दूध पाउडर दिया जाएगा।

By: Nikhil Kumar

Published: 18 Oct 2020, 10:03 AM IST

- शारीरिक प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर होने से कोरोना वायरस संक्रमण का खतरा
- परिवारों को अनाज की आपूर्ति भी प्रभावित
- कोविड की मार

बेंगलूरु. कोविड महामारी के कारण प्रदेश के सरकारी व अनुदानित स्कूलों के करीब 56 लाख बच्चे मध्याह्न भोजन (मिड डे मील) से वंचित हैं। विकल्प के रूप में प्रदेश सरकार ने बच्चों के लिए इनके परिवारों को तीन किलो चावल और एक किलो दाल देने की बात कही थी। लेकिन जून के बाद से सरकार आपूर्ति करने में असफल रही है। धीरे-धीरे बच्चों की थाली से भोजन गायब हो गया। चिकित्सकों व शिक्षाविदों ने सरकार के इस रवैये पर चिंता व्यक्ति की है। पौष्टिक भोजन के अभाव में बच्चों की शारीरिक प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर हो रही है। ऐसे में कोरोना वायरस संक्रमण का खतरा है।

वित्त विभाग ने जताई थी आपत्ति
वित्त विभाग ने अनाज की आपूर्ति पर आपत्ति जाताई थी। विभाग के अनुसार परिवारों को पहले से ही सार्वजनिक वितरण प्रणाली कार्यक्रम का लाभ मिल रहा है। ऐसे में अलग से अनाज उपलब्ध कराने की जरूरत नहीं है। इसके बाद परिवारों को बताए बिना अनाज की आपूर्ति रोक दी गई।

एसोसिएटेड मैनेजमेंट ऑफ इंग्लिश मीडियम स्कूल्स इन कर्नाटक (केएएमएस) के महासचिव डी. शशिकुमार ने कहा कि लाखों गरीब बच्चे पहले से ही ऑनलाइन शिक्षा से वंचित हैं। विद्यागम शिक्षा योजना बंद होने से बच्चे शिक्षा से और कट गए हैं। अब भोजन पर भी आफत है। बच्चों को केवल भोजन ही नहीं बल्कि पौष्टिक व गरम खाने की जरूरत है।

गर्म और पके भोजन का विकल्प नहीं
नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (एनएलएसआइयू) के संकाय सदस्य व बाल अधिकार कार्यकर्ता निरंजन अराध्य के अनुसार सूखा अनाज गर्म और पके भोजन का विकल्प नहीं हो सकता है। बच्चों के हित में सरकार को सरकारी स्कूलों को खोलना और मध्याह्न भोजन फिर शुरू करना होगा। ओडिशा सरकार ने मध्याह्न भोजन के विकल्प के रूप में अनाज की मात्रा बढ़ाई लेकिन कर्नाटक में ऐसे उदाहरण हैं जहां बच्चों के परिवारों को केवल चंद माह के लिए चावल मिला। अराध्य ने कहा कि गरीबी बढऩे से परिवार बच्चों को खेतों में काम या अन्य नौकरी की ओर धकेलेंगे। कम उम्र में ही बेटियों की शादी करने पर मजबूर होंगे क्योंकि सरकार ने बच्चों की सभी प्रकार की शैक्षणिक गतिविधियां बंद कर दी है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि कोविड के कम प्रभाव वाले क्षेत्रों में सरकार स्कूल शुरू करना भी चाहे तो लोग विरोध करते हैं।

यह करे सरकार
बच्चे अनाज, दूध, अंडा आदि से वंचित हैं। सरकार को कम-से-कम संयुक्त राष्ट्र बाल फंड (यूनिसेफ) की ओर से प्रस्तावित विटामिन कैप्सूल और प्रोटीन, बिस्कुट की आपूर्ति शुरू करनी चाहिए।
- नागसिह्मा जी. राव, निदेशक, चाइल्ड राइट ट्रस्ट।

समीक्षा जारी, आपूर्ति शुरू होने की उम्मीद
वित्तीय स्थित इजाजत देती है तो शिक्षा विभाग आपूर्ति बहाल करेगा। स्थिति की समीक्षा जारी है। बच्चों को दूध मिले इसके लिए सरकार कर्नाटक सहकारी दुग्ध महासंघ से बात कर रही है। जल्द ही बच्चों के घर पर दूध पाउडर दिया जाएगा।
-एस. सुरेश कुमार, प्राथमिक व माध्यमिक शिक्षा मंत्री।

Nikhil Kumar Reporting
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