डीके शिवकुमार और सिद्धरामय्या के बीच उम्मीदवारों के चयन को लेकर तीखी बहस

  • कांग्रेस नेताओं में नहीं बन पा रही सहमति

By: Ram Naresh Gautam

Published: 12 Nov 2019, 04:16 PM IST

बेंगलूरु. कांग्रेस और जद-एस गठबंधन सरकार के पतन में बेलगावी को लेकर कांग्रेस नेताओं के बीच आपसी खींचतान भी एक कारण था।

उपचुनाव से पहले बेलगावी जिले की राजनीति पर वर्चस्व को लेकर एक बार फिर कांग्रेस नेताओं में घमासान तेज हो गया है। सोमवार को हुई बैठक में भी बेलगावी जिले की सीटों को लेकर सहमति नहीं बन पाई।

सूत्रों का कहना है कि उम्मीदवारों के चयन को लेकर कांग्रेस के नेता सोमवार को फिर भिड़ गए। पूर्व मंत्री शिवकुमार और सिद्धरामय्या के बीच उम्मीदवारों के चयन को लेकर तीखी बहस हो गई।

पिछले महीने भी एक बैठक के दौरान सिद्धरामय्या और केएच मुनियप्पा व बीके हरिप्रसाद के बीच चुनावों में खराब प्रदर्शन और उम्मीदवारों के चयन को लेकर बहस हुई थी।

जारकीहोली बंधुओं को लेकर विवाद
बताया जाता है कि बैठक में शिवकुमार ने कहा कि पार्टी को मझधार में छोडऩे वाले नेताओं के बजाय काम करने वाले और जीतने में सक्षम नेताओं को टिकट दिया जाना चाहिए।

बताया जाता है कि इन नेताओं के बीच विवाद बेलगावी जिले की राजनीति में प्रभावी जारकीहोली बंधुओं को लेकर हुई। दोनों नेता कागवाड़ और गोकाक से उम्मीदवार को लेकर सहमत नहीं थे।

सूत्रों के मुताबिक बैठक में शिवकुमार ने सिद्धू और और दिनेश से कहा कि पार्टी की पहली सूची में घोषित आठ उम्मीदवारों के बारे में निर्णय आप लोगों ने ही किया है।

अब बाकी सात उम्मीदवारों के चयन में हमारे सुझाव पर ध्यान दिया जाना चाहिए। शिवकुमार ने कागवाड़ से राजू कागे और गोकाक से अशोक पुजारी को टिकट देने की वकालत की जबकि सिद्धरामय्या ने गोकाक से लखन जारकीहोली को टिकट देने की वकालत की।

इसे लेकर शिवकुमार नाराज हो गए। बताया जाता है कि शिवकुमार ने इसका विरोध करते हुए कहा कि जारकीहोली बंधु सिर्फ बाहर में ही आपस में लड़ते दिखते हैं लेकिन अपने इलाके की सीटों पर अलग-अलग दलों से चुनाव लड़कर जीत जाते हैं और वहां उनका ही वर्चस्व बना रहता है।

ये लोग मौका मिलने पर किसी भी पार्टी का साथ छोड़ देते हैं। शिवकुमार ने कहा कि इन सीटों पर वैकल्पिक नेतृत्व को उभरने का मौका दिया जाना चाहिए। बेलगावी की सीटों पर नेताओं की बीच असहमति के कारण बैठक बेनतीजा रही।

गौरतलब है कि जारकीहोली बंधुओं और शिवकुमार के बीच बेलगावी जिले की राजनीति में दखल को लेकर पिछले साल से ही तकरार चलती रही है।

वर्चस्‍व को लेकर भिड़ चुके हैं रमेश और डीके

पूर्व मंत्री रमेश जारकीहोली और शिवकुमार के बीच इसे लेकर काफी घमासान भी हुआ था। विधायकों की बगावत के पीछे रमेश जारकीहोली की भूमिका महत्वपूर्ण रही थी।

सोमवार की बैठक में पूर्व मंत्री सतीश जारकीहोली नहीं शामिल हुए। कागे सिद्धरामय्या से मिलने से पहले शिवकुमार से मिले और तब कांग्रेस में उनके शामिल होने एवं टिकट मिलने की अटकलें तेज हुईं।

सिद्धरामय्या से भेंट करने के बाद ही उन्होंने भाजपा छोडऩे और कांग्रेस में शामिल होने की बात कही। लेकिन, इन तमाम उठापटक और कांग्रेस की बैठकों से सतीश जारकीहोली दूर रहे, जो कांग्रेस के भीतर असंतोष की बात को हवा दे रही है।

जानकारों का कहना है कि सतीश अपने भाई को टिकट देने का हो रहे विरोध से खफा हैं। सतीश पहले ही कह चुके हैं गोकाक में जीतने के लिए कांग्रेस को लखन को टिकट देना चाहिए।

Ram Naresh Gautam Desk
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