जीवन में आए परिवर्तनों को स्वीकार करेंं: आचार्य देवेंद्रसागर

  • जयनगर में प्रवचन

By: Santosh kumar Pandey

Published: 03 May 2021, 05:20 PM IST

बेंगलूरु. राजस्थान जैन मूर्ति पूजक संघ जयनगर में प्रवचन के दौरान आचार्य देवेंद्रसागर सूरी ने कहा कि जीवन हमेशा एक-सा नहीं रहता। परिवर्तन को स्वीकार कर ही हम अपनी हताशा-निराशा से उबर सकते हैं और समय के साथ चलकर अपने जीवन को सुखमय बना सकते हैं। परिवर्तन प्रकृति का नियम है। हम प्रकृति के इस नियम को जब भी मानने से इनकार करते हैं, तब हम दुखी होते हैं, अवसाद से घिर जाते हैं।

हमें स्वीकारना होगा कि जब अच्छे दिन स्थाई नहीं रहते, तो बुरे दिन भी नहीं रहेंगे। जो व्यक्ति इस सत्य को जान लेता है, वह कभी निराश-हताश नहीं होता। उसका कर्मशील जीवन मजबूत होकर सामने आता है।

उन्होंने कहा कि हम समय की ऐसी रेलगाड़ी के साथ-साथ चल रहे हैं, जिसमें रुकने का मतलब पिछड़ जाना होता है। जीवन के सफर का वास्तविक आनंद हम तभी उठा सकते हैं, जब हम समय के साथ चलें, पुराने स्टेशनों जैसे जड़ रीति-रिवाजों और पुरानी अवधारणाओं को छोड़ते जाएं और नए स्टेशनों समय के अनुकूल नवीनता को अपनाते जाएं।

Santosh kumar Pandey Desk
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