प्रभु ऋषभदेव एवं राम के आदर्शों के अनुरूप नए युग के निर्माण का दिन है-देवेंद्रसागर

धर्मचर्चा

By: Yogesh Sharma

Published: 05 Aug 2020, 04:47 PM IST

बेंगलूरु. राजाजीनगर में प्रवचन के दौरान आचार्य देवेंद्रसागर सूरी ने अध्योध्या स्थित राम जन्मभूमि में आयोजित शिलान्यास कार्यक्रम पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि लगभग पांच शताब्दियों की भक्तपिपासु प्रतीक्षा, संघर्ष और तप के उपरांत कोटि-कोटि सनातनी बंधु-बांधवों के स्वप्न को साकार करते हुए आज के दिन अभिजीत मुहूर्त में मध्याह्न बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रामलला के चिर अभिलाषित भव्य-दिव्य मंदिर की आधारशिला रखी। यह अवसर उल्लास, आह्लाद, गौरव एवं आत्मसंतोष और करुणा का है। दर्जनों पीढिय़ां अपने आराध्य का मंदिर बनाने की अधूरी कामना लिए भावपूर्ण सजल नेत्रों के साथ ही इस धराधाम से परमधाम में लीन हो गईं, किंतु प्रतीक्षा और संघर्ष का क्रम सतत जारी रहा। अब वह शुभ घड़ी आ ही गई जब कोटि-कोटि सनातनी आस्थावानों के त्याग और तप की पूर्णाहुति होने जा रही है।
आचार्य ने कहा कि आस्था से उत्पन्न भक्ति की शक्ति का प्रताप अखंड होता है। रामजन्मभूमि मंदिर निर्माण में अवरोध विगत पांच शताब्दियों से सनातन हिंदू समाज की आस्थावान सहिष्णुता की कठोर परीक्षातुल्य था। रामलला विराजमान की भव्य प्राण-प्रतिष्ठा भारत की सांस्कृतिक अंतरात्मा की समरस अभिव्यक्ति का प्रतिमान सिद्ध होगा। आचार्य ने कहा कि रामजन्मभूमि मंदिर के निर्माण के लिए भूमिपूजन के अवसर पर जैन समाज की और से चांदी की पाटे अर्पण की गई हैं। आचार्य ने कहा कि अयोध्या ना सिर्फ मर्यादा पुरुषोत्तम राम का ही जन्मभूमि है अपितु हमारे आद्य पुरुष ऋषभदेव परमात्मा का भी जन्मभूमि है। ऋषभनाथ की जन्मभूमि अयोध्या- जैन और हिन्दू धर्म दोनों ही अलग अलग धर्म है। लेकिन यह एक ही कुल के धर्म हैं। कुलकरों की क्रमश: कुल परंपरा के सातवें कुलकर नाभिराज और उनकी पत्नी मरुदेवी से ऋषभदेव का जन्म चैत्र कृष्ण 9 को अयोध्या में हुआ था। इसलिए अयोध्या भी जैन धर्म के लिए तीर्थ स्थल है। अयोध्या में आदिनाथ के अलावा अजितनाथ, अभिनंदननाथ, सुमतिनाथ और अनंतनाथ का भी जन्म हुआ था। इसलिए यह जैन धर्म के लिए बहुत ही पवित्र भूमि है। इस जन्मभूमि की मुक्ति के लिए बड़ा और कड़ा संघर्ष हुआ। न्याय और सत्य की संयुक्त विजय का यह उल्लास अतीत की कटु स्मृतियों को विस्मृत कर नए कथानक रचने और समाज में समरसता की सुधा सरिता के प्रवाह की नवप्रेरणा दे रहा है। आज के दिन होने वाले भूमिपूजन और शिलान्यास न केवल मंदिर का है वरन एक नए युग का भी है। यह नया युग प्रभु ऋषभदेव एवं श्री राम के आदर्शों के अनुरूप नए भारत के निर्माण का है। यह युग मानव कल्याण का है। यह युग लोककल्याण के लिए तपोमयी सेवा का है। भाव-विभोर करने वाले इस ऐतिहासिक अवसर पर प्रत्येक देशवासी का मन प्रफुल्लित होगा।

Yogesh Sharma Reporting
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