आचार्य महाश्रमण ने दिया नशा मुक्ति का संदेश

आचार्य महाश्रमण ने दिया नशा मुक्ति का संदेश

Santosh Kumar Pandey | Updated: 12 Jun 2019, 06:09:50 PM (IST) Bangalore, Bangalore, Karnataka, India

जिले के नरसापुर स्थित नाहर इंजीनियरिंग परिसर में आयोजित धर्मसभा में श्रद्धालुओं को सम्बोधित करते हुए आचार्य महाश्रमण ने कहा कि मनुष्य, जीवन जीने के लिए शरीर धारण करता है और शरीर को चलाने के लिए मनुष्य को भोजन, पानी करना, समय-समय पर देखभाल, दवा आदि का उपयोग भी करना होता है।

कोलार. जिले के नरसापुर स्थित नाहर इंजीनियरिंग परिसर में आयोजित धर्मसभा में श्रद्धालुओं को सम्बोधित करते हुए आचार्य महाश्रमण ने कहा कि मनुष्य, जीवन जीने के लिए शरीर धारण करता है और शरीर को चलाने के लिए मनुष्य को भोजन, पानी करना, समय-समय पर देखभाल, दवा आदि का उपयोग भी करना होता है।

एक प्रश्न उठता है कि आखिर शरीर को क्यों टिकाए रखना चाहिए? इसका शास्त्रकार ने उत्तर देते हुए कहा कि पुराने कर्मों को काटने अर्थात् पूर्व कर्मों का क्षय करने के लिए व धर्म करने के लिए शरीर को टिकाने की आवश्यकता होती है। आचार्य ने कहा कि मनुष्य जीवन में नशे में भी चला जाता है। नशा व्यक्ति के दिमाग को भ्रमित और उन्मुक्त कर देता है। ऐसे में मनुष्य पापाचार में भी जा सकता है। नशे से शरीर को भी नुकसान होता है। इसलिए मनुष्य को नशे सेे मुक्त रहने का प्रयास करना चाहिए।

इससे पूर्व आचार्य महाश्रमण ने अहिंसा यात्रा के साथ कोनदराजनपल्ली से विहार कर बारह किलोमीटर दूर नरसापुर पहुंचे। औरंगाबाद अक्षय तृतीया व्यवस्था समिति के अध्यक्ष सुभाष नाहर व मंत्री अनिल नाहर ने अपनी बात कही।

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