प्रीकोल मजदूरों के समर्थन में एक्टू ने मनाया सद्भावना दिवस

प्रीकोल मजदूरों के समर्थन में एक्टू ने मनाया सद्भावना दिवस

Ram Naresh Gautam | Publish: Sep, 05 2018 05:12:58 PM (IST) Bengaluru, Karnataka, India

मागड़ी रोड स्थित आंजनेय नगर में एक्टू की नेता निर्मला के नेतृत्व में कार्यक्रम का आयोजन कर प्रीकोल मजदूरों की मांगें मानने की अपील की गई

बेंगलूरु. विभिन्न मांगों के समाधान के निए संघर्षरत कोयम्बटूर स्थित प्रीकोल लिमिटेड के मजदूरों के समर्थन में ऑल इंडिया काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियन्स (एक्टू) के कार्यकर्ताओं ने कई स्थानों पर सद्भावना दिवस का आयोजन किया। मागड़ी रोड स्थित आंजनेय नगर में एक्टू की नेता निर्मला के नेतृत्व में कार्यक्रम का आयोजन कर प्रीकोल मजदूरों की मांगें मानने की अपील की गई।

इसी प्रकार कार्मिक भवन के सामने मजदूर नेता मोहन के नेतृत्व में सद्भावना दिवस का आयोजन किया गया। इसमें बड़ी संख्या में मजदूरों ने भाग लिया। सुबह आठ बजे हूडी स्थित आरएमसी गेट के सामने सभा हुई, जिसे मजदूर नेता माधवन ने संबोधित किया। उन्होंने प्रीकोल से निकाले गए कामगारों को बिना शर्त नौकरी पर रखने तथा अन्य सुविधाएं बहाल करने की मांग की। सभा को एक्टू के नेता बी विनय, लेखा, शंकर, अपन्ना, निर्मला आदि ने संबोधित किया।

 

कन्नड़ में डब की गई फिल्मों का विरोध
कन्नड़ संगठनों ने कन्नड़ एवं संस्कृति मंत्री को सौंपा ज्ञापन
बेंगलूरु. राज्य के विभिन्न कन्नड़ संगठनों ने मंगलवार को कन्नड़ एवं संस्कृति मंत्री जयमाला को सौैंपे ज्ञापन में अन्य भाषाओं की कन्नड़ में डब की गई फिल्मों के प्रदर्शन पर रोक लगाने की मांग की है। विधानसभा में मंगलवार को कन्नड़ चलुवली वाटाल पक्षा के नेता वाटाल नागराज के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने अन्य भाषाओं की फिल्मों की डबिंग से कन्नड़ फिल्म उद्योग को नुकसान पहुंचने तर्क दिया और इस पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है।

वाटाल नागराज ने कहा कि तमिल, तेलगु तथा मलयालम फिल्मों को कन्नड़ भाषा में डब करने का प्रयास किया जा रहा है। कन्नड़ फिल्मों के लिए केवल कर्नाटक ही कारोबार का केंद्र है। लेकिन तेलगु, तमिल तथा मलयाली फिल्में उनके राज्यों में प्रदर्शित करने से साथ-साथ कर्नाटक में प्रदर्शित की जाती हैं। ऐसी फिल्मों से संदलवुड को हानि हो रही है।

कन्नड़ में डब की गई फिल्मों को राज्य में प्रदर्शित करने का मौका नहीं मिलना चाहिए।
उन्होंने कहा कि कन्नड़ साहित्य परिषद तथा कन्नड़ विकास प्राधिकरण जैसी संस्थाओं को भी इस मांग का समर्थन करते हुए राज्य सरकार पर दवाब लाना चाहिए। इस अवसर पर कन्नड़ संगठनों के पदाधिकारी एच. गिरीश गौड़ा, एच.बी. पार्थसारथी तथा अजय उपस्थित थे।

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