कल्पसूत्र का लाभ

कल्पसूत्र का लाभ

Ram Naresh Gautam | Publish: Sep, 09 2018 04:45:44 PM (IST) Bengaluru, Karnataka, India

तेजराजजी नागौरी ने कल्पसूत्र विमलाचल वालों को समर्पित किया

बेंगलूरु. पंन्यास प्रवर कल्परक्षित विजय की निश्रा में आदिनाथ जैन मंदिर चिकपेट का कल्पसूत्र शनिवार को घर ले जाने का लाभ वीवीपुरम विमलाचल अपार्टमेन्ट वालों ने लिया। तेजराजजी नागौरी ने कल्पसूत्र विमलाचल वालों को समर्पित किया।

 

 

श्रमण संघ विकास संघ का गठन
साधु-साध्वियों की हर सुविधा-व्यवस्था पर रहेगा ध्यान
बेंगलूरु. देशभर में ध्यान, ज्ञान, संस्कृति प्रचार में जुटे श्रमण संघ के साधु-साध्वियों को बेहतर सुविधा एवं व्यवस्था के लिए श्रमण संघ विकास संघ का गठन किया गया है। श्रमण संघीय उपाध्याय प्रवर रविंद्र मुनि ने इस संदर्भ में जानकारी दी और बताया कि कुछ समय से अनेक संघों में विषमताएं सामने आ रही हैं। कुछ संत-साध्वियों को मान-सम्मान मिलता है तो कुछ के प्रति ध्यान नहीं रहता।

देश में श्रमण संघीय साधु-साध्वियों के करीब 325 टोले हैं, जिनमें करीब 1300 साधु-साध्वी हैं। इनके लिए विभिन्न सुविधाओं व व्यवस्थाओं का खर्च समाज पर पड़ता है। कुछ लोग प्रभाव के चलते दबाव भी महसूस करते हैं। ऐसी विसंगतियां दूर करना ही संघ के गठन का उद्देश्य है। संघ में एक दानकोष भी बनाया गया है, जिसके विभिन्न मदों में दो हजार से लेकर 51 हजार रुपए तक दान किया जा सकेगा।

यह दान ऑनलाइन भी हो सकेगा। इससे पारदर्शिता रहेगी। रविन्द्र मुनि के अनुसार अध्ययन करने वाले साधु-साध्वियों की शिक्षा का खर्च अब कोई व्यक्ति, भामाशाह या समाजसेवी नहीं संघ उठाएगा। संतों द्वारा लिखी गई पुस्तकों के प्रकाशन के साथ ही उनके बीमार या ऑपरेशन होने पर समस्त खर्च भी संघ ही वहन करेगा।

 

वृद्ध संतों के लिए बनेंगे सात सेंटर
साधु-साध्वियों के लिए वृद्धावस्था आश्रय स्थल की परेशानी दूर करने के लिए देश में सात सेंटर स्थापित करने की योजना है। एक सेंटर लुधियाना के पास 40 कमरों का, जबकि दूसरा दिल्ली में बनाया गया है। मुुंबई-पूना के बीच एक सेंटर की जगह तय हो गई है। मौसम के मद्देनजर राजस्थान के उदयपुर, कर्नाटक के बेंगलूरु एवं मध्यप्रदेश के रतलाम या इंदौर में एक-एक सेंटर की योजना है। आवश्यक सुविधाओं से युक्त इन सेंटरों में करीब 140 साधु-साध्वी रह सकेंगे। उपाध्याय रविंद्र मुनि ने बताया कि साधु-साध्वियों के सहयोग के लिए साथ रहने वाले कर्मचारियों का वेतन अब तक अन्य संघों या व्यक्ति विशेष को वहन करना पड़ता रहा है। संघ ऐसे करीब 400 कर्मचारियों को उनके बैंक खातों में सीधा भुगतान करेगा।

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