सात माह के इंतजार के बाद महिला को मिली नई जिंदगी

- हृदय प्रत्यारोपण

By: Nikhil Kumar

Published: 12 Jul 2021, 04:38 PM IST

बेंगलूरु. शहर के एक निजी अस्पताल के चिकित्सकों ने रविवार को हृदय प्रत्यारोपण कर आंध्र प्रदेश के धर्मावरम की 38 वर्षीय महिला की जान बचाई। महिला हृदय की डाइलेटेड कार्डियोमायोपैथी बीमारी से पीडि़त थी और हृदय प्रत्यारोपण ही अंतिम उपचार था। चिकित्सकों की सलाह पर महिला ने अंग दान के लिए नोडल निकाय जीवसार्थकते के साथ गत वर्ष दिसंबर में पंजीकरण कराया था। उसे सात महीने के भीतर दाता मिली।

रमय्या नारायण हार्ट केंद्र के डॉ. नागमलेश यू. एन. ने बताया कि डोनर एक 36 वर्षीय महिला थी, जो एक दुर्घटना का शिकार हो गई थी और बन्नेरघट्टा रोड स्थिति एक निजी अस्पताल में उपचाराधीन थी।चिकित्सकों ने 10 जुलाई को रात करीब 10 बजे उसे ब्रेन डेड घोषित किया। परिवार ने अंगदान के लिए सहमति दी।

डाइलेटेड कार्डिओमायोपथी हृदय की मांसपेशी का एक रोग है, जो आमतौर पर दिल के मुख्य पंपिंग चैम्बर (लेफ्ट वेंट्रिकल) में शुरू होता है। वेंट्रिकल खिचाव वाला और पतला होता है। यह दिल को रिलैक्स होने से रोकता है और इसमें खून का बहाव बढऩे लगता है।

Nikhil Kumar Reporting
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