scriptAfter BJP victory in 4 states, Jolt of EX PM devegowda in karnataka | चार राज्यों में भाजपा की जीत के बाद कर्नाटक में देवगौड़ा की पार्टी को लगा तगड़ा झटका | Patrika News

चार राज्यों में भाजपा की जीत के बाद कर्नाटक में देवगौड़ा की पार्टी को लगा तगड़ा झटका

  • विधान परिषद सभापति होरट्टी भाजपा में होंगे शामिल
  • लगातार 42 साल से होरट्टी हैं विधान परिषद के सदस्य
  • अब भाजपा उम्मीदवार के तौर पर लड़ेंगे चुनाव

बैंगलोर

Updated: April 04, 2022 02:16:03 am

बेंगलूरु. लंबे समय से चली आ रही अटकलों को विराम देते हुए विधान परिषद के सभापति व जनता दल-एस के वरिष्ठ नेता बसवराज होरट्टी ने रविवार को भाजपा में शामिल होने की घोषणा कर दी। वे अगला चुनाव भाजपा उम्मीदवार के तौर पर लड़ सकते हैं।

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हुब्बल्ली में संवाददाताओं से बात करते हुए होरट्टी ने कहा 'वरिष्ठ मंत्रियों के साथ इस संदर्भ में कई बार बात हुई। मैंने भाजपा में शामिल होने का फैसला किया है। विधान परिषद चुनावों की घोषणा के बाद इस संबंध में आधिकारिक बयान जारी करूंगा। मैंने इस संदर्भ में जद-एस नेता व पूर्व मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी के साथ भी बात की है।Ó कुमारस्वामी ने पिछले सप्ताह होरट्टी से मुलाकात की थी।
होरट्टी के भाजपा में शामिल होने की घोषणा के साथ ही उत्तर कर्नाटक में जद-एस के हाथ से आखिरी वरिष्ठ नेता भी निकल जाएगा। वर्ष 1980 से लेकर लगातार सात बार विधान परिषद का चुनाव जीतकर होरट्टी ने एक रिकॉर्ड बनाया है।
हुब्बल्ली में अपनी उपलब्धियों पर एक पुस्तिका के विमोचन के बाद होरट्टी ने कहा कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येडियूरप्पा ने उनसे पार्टी में शामिल होने के लिए बातचीत की थी और उन्होंने उनके प्रस्ताव पर सहमति जता दी। होरट्टी ने सभापति बनने के बाद जद-एस की प्राथमिक सदस्यता से यह कहते हुए इस्तीफा दे दिया था कि इस पर आसीन व्यक्ति को किसी दल विशेष से जुड़ा नहीं होना चाहिए।

चुनाव की घोषणा के बाद होंगे शामिल
एक सवाल के जवाब में उन्होंने स्पष्ट किया कि भाजपा में शामिल होने की तारीख विधान परिषद चुनावों की घोषणा के बाद तय की जाएगी। उन्होंने कहा कि वे भाजपा प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ेंगे। इस मुद्दे पर पूर्व मुख्यमंत्री कुमारस्वामी से भी बात हुई है। भाजपा में शामिल होने के उनके फैसले से कुमारस्वामी को कोई दिक्कत नहीं है। उन्होंने अपनी सहमति दे दी है।
भाजपा नेताओं के एक गुट द्वारा विरोध किए जाने के सवाल पर होरट्टी ने कहा कि उन्हें इस बात की कोई फिक्र नहीं है कि कौन विरोध कर रहा है और क्यों विरोध कर रहा है। येडियूरप्पा ने इस मुद्दे पर उनसे बात की थी ताकि पार्टी आलाकमान की सहमति से उन्हें शामिल किया जा सके।

जून-जुलाई में चुनाव की संभावना
गौरतलब है कि वर्ष 1980 में पहली बार एक स्वतंत्र उम्मीदवार के तौर पर राज्य विधान परिषद में प्रवेश करने वाले होरट्टी ने बाद में जनता दल का दामन थाम लिया। विधान पार्षद के तौर पर उन्होंने 42 साल पूरे किए हैं। उन्होंने जनता परिवार को दिग्गज नेताओं जैसे रामकृष्ण हेगड़े, जेएच पटेल और एचडी देवगौड़ा के साथ काम किया और अपनी धर्मनिरपेक्ष और समाजवादी छवि के लिए जाने जाते रहे। वे जद-एस और भाजपा और जद-एस व कांग्रेस गठबंधन सरकारों में मंत्री रहे। उन्हें उत्तर कर्नाटक में जद-एस का चेहरा माना जाता है। होरट्टी कर्नाटक पश्चिम शिक्षक क्षेत्र से परिषद की सदस्य हैं। दो शिक्षक और दो स्नातक क्षेत्रों के लिए जून-जुलाई में चुनाव कराए जाने की संभावना है। होरट्टी सहित इन चारों सदस्यों का कार्यकाल ४ जुलाई को समाप्त होगा। परिषद के मौजूदा वरिष्ठ सदस्य होरट्टी पिछले साल भाजपा के समर्थन से परिषद के सभापति चुने गए थे। भाजपा ने अभी पश्चिम शिक्षक सीट के लिए प्रत्याशी घोषित नहीं किए हैं।

... बने रह सकते हैं सभापति
सूत्रों का कहना कि भाजपा में शामिल होने के साथ चुनाव जीतने पर होरट्टी सभापति पद पर बने रह सकते हैं। फरवरी २०२१ में कांग्रेस के प्रतापचंद्र शेट्टी को सभापति पद से हटाने के लिए भाजपा और जद-एस ने हाथ मिलाया था। शेट्टी को हटाए जाने के बाद समझौते के तहत जद-एस के होरट्टी को सभापति और भाजपा के एमके प्रणेश को उप सभापति का पद मिला था। प्रणेश दिसम्बर में स्थानीय निकाय क्षेत्र से फिर निर्वाचित हो चुके हैं। उप सभापति का पद तीन महीने से रिक्त है मगर पिछले दो सत्रों के दौरान उप सभापति पद के लिए चुनाव नहीं हुए। भाजपा ने मुख्य सचेतक के तौर पर वाईए नारायणस्वामी को नामित किया मगर उपसभापति पद के लिए उम्मीदवार घोषित नहीं किए। पार्टी सूत्रों का कहना है कि उपसभापति पद को रणनीतिक तौर पर रिक्त रखा गया है। जून-जुलाई में होने वाले चुनाव के परिणाम के बाद ही मानसून सत्र के दौरान उपसभापति पद को लेकर निर्णय की संभावना है।

जद-एस को दूसरा झटका
पिछले कुछ महीने के दौरान उत्तर कर्नाटक क्षेत्र में जद-एस को यह दूसरा झटका है। इससे पहले पूर्व विधायक कोनरेड्डी ने पार्टी छोड़ दी थी। होरट्टी के छोडऩे के बाद जद-एस के पास उत्तर कर्नाटक में कोई बड़ा लिंगायत चेहरा नहीं होगा। बताया जाता है कि कुमारस्वामी ने होरट्टी के साथ कई बार मुलाकात कर उन्हें मनाने की कोशिश की मगर बात नहीं बनी।

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